कोरोना से जंग: 96 घंटे में 16 लाख लोगों तक पहुंची 838 टीमें, राजस्थान का यह जिला बना ग्रामीण भारत के लिए मिसाल
डूंगरपुर जिला कलेक्टर सुरेश कुमार ओेला ने बताया कि अमूमन देखने में आ रहा था कि जिले में लोग कोरोना होने पर या तो छुपाते हैं अथवा प्रारंभ के चार-पांच दिनों तक लापरवाह बने रहते हैं। इससे कोरोना संक्रमण गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है। जब उनका ऑक्सीजन लेवल 40 से 50 के बीच आ जाता है तो वे चिकित्सालय पहुंचते हैं...
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ग्रामीण भारत में अब कोरोना का कहर देखने को मिल रहा है। कई राज्यों के गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं नाकाफी हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में कोरोना महामारी के लक्षणों को छिपाया जा रहा है। नतीजा, चार-पांच दिन बाद जब मरीज की हालत बिगड़ने लगती है तो उसे अस्पताल याद आता है। लोगों की यही गलती, ग्रामीण भारत में कोरोना संक्रमण फैलने की एक बड़ी वजह बन रही है। इस बीच राजस्थान का डूंगरपुर जिला, कोरोना को मात देकर ग्रामीण भारत के लिए एक मिसाल बन गया है। जिला प्रशासन ने यह जिद कर ली कि कोरोना को हर सूरत में मात दी जाएगी।
जिला कलेक्टर सुरेश कुमार ओला के नेतृत्व में प्लान तैयार हो गया। नाम रखा गया, 'मेरा वार्ड-मेरा गांव-मेरा जिला कोरोना मुक्त अभियान'। जिला प्रशासन की 838 टीमों ने 96 घंटे में 3,01779 घरों के 16,32569 सदस्यों का सर्वे पूरा कर लिया। सर्वे की सत्यता जांच के लिए 30 अधिकारियों को प्रभारी नियुक्त किया गया। सघन अभियान चलाया गया। परिणामस्वरूप ऐसे 13 हजार 512 कोविड लक्षणों से संबंधित लोगों तक प्रशासन की सीधी पहुंच बन गई। आज वहां कोविड चिकित्सालय के 52 फीसदी बेड खाली हैं। ऑक्सीजन का अतिरिक्त स्टॉक है। कोरोना संक्रमण की मृत्यु दर में 40 से 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
राजस्थान के दक्षिण में स्थित डूंगरपुर जिले में प्रशासन की मेहनत अब रंग लाने लगी है। तेज गर्मी के बीच चार दिन में जिला प्रशासन की टीमें गांव के अंतिम छोर तक पहुंची हैं। जो लोग खेतों में या दूर दराज के इलाकों में रह रहे थे, उन्हें भी इस अभियान में कवर किया गया। टीमों द्वारा सर्वे करने के बाद 30 अधिकारियों की टीम ने क्रॉस चेक किया, जिससे प्रारंभिक लक्षण वाले लोगों को प्रथम स्टेज पर ही चिन्हित किया जा सका। उन्हें तत्काल मेडिकल किट उपलब्ध करा दी गई। कोरोना संक्रमितों का समय पर उपचार शुरू हो गया। नतीजा, मृत्यु दर में भारी गिरावट दर्ज हुई। साथ ही कोविड चिकित्सालय में 52 फीसदी बेड का खाली होना सुकुनदायी दृश्य को परिलक्षित कर रहा है।
जिला कलेक्टर सुरेश कुमार ओेला ने बताया कि अमूमन देखने में आ रहा था कि जिले में लोग कोरोना होने पर या तो छुपाते हैं अथवा प्रारंभ के चार-पांच दिनों तक लापरवाह बने रहते हैं। इससे कोरोना संक्रमण गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है। जब उनका ऑक्सीजन लेवल 40 से 50 के बीच आ जाता है तो वे चिकित्सालय पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती यह थी कि लोगों में कोरोना के लक्षणों का पता कैसे लगाया जाए।
इसके मद्देनजर जिला प्रशासन ने 'कोरोना मुक्त अभियान' तथा 'चिकित्सा आपके द्वार अभियान', शुरू कर दिया। धरातलीय क्रॉस चेकिंग की गई। अभियान का उद्देश्य ऐसे लोग, जो प्रारंभिक लक्षण के बावजूद चिकित्सालय नही पहुंच रहे हैं अथवा लापरवाह बने हुए हैं, को चिन्हित कर गंभीर संक्रमण की ओर जाने से बचाना था। साथ ही बाहर से आए प्रवासियों को होम क्वारंटीन करना, प्रभावी मॉनिटरिंग, कोरोना संक्रमण के अधिक लक्षणों वालों को चिकित्सालय तक पहुंचाना, ऑक्सीजन लेवल के लिए प्रोनिंग विधि के बारे में बताना, मेडिकल किट उपलब्ध कराना तथा विवाह जैसे आयोजनों को वर्तमान समय में नहीं आयोजित करने के लिए प्रेरित करना था।
योजनाबद्ध तरीके से किया गया क्रियान्वयन
जिला कलेक्टर ओला ने बताया अभियान की सफलता के लिए अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, सरपंच, वार्ड पंच एवं कोर कमेटियों के साथ आत्मीय संवाद करते हुए मिलकर प्रयास करने की अपील की। जिले में कुल 838 टीमें लगाई गईं। इसके अन्तर्गत 3,01779 घरों के 16,32569 सदस्यों का सर्वे किया गया। प्रशासन द्वारा ऐसे चिन्हित लोगों को प्रारम्भिक लक्षणों के आधार पर ही तत्काल समय पर कुल 22,560 मेडिकल किट उपलब्ध कराई गई। अभियान के दौरान 13,595 लोगों को क्वारंटीन किया गया तथा 8,502 लोगों को नजदीक स्वास्थ्य केन्द्र में उपचार दिलाया गया।
जिला कलक्टर ने स्वयं संभाली कमान, आला अधिकारियों ने लगाई दौड...
जिला कलेक्टर ओला ने स्वयं अभियान की कमान संभालते हुए एडीएम कृष्णपाल सिंह चौहान, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंजली राजौरिया सहित आला अधिकारियों ने चार दिन में 353 गांव-गांव पहुंचकर चेकिंग की। अभियान का प्रभाव यह हुआ कि मृत्यु दर में 40 से 50 फीसदी की कमी आ गई। अप्रैल में करीब 200 से अधिक मरीज चिकित्सालय में थे, पर गत सात दिन में यह संख्या घटकर 150 तक आ गई है। कोविड डेडिकेटेड चिकित्सालय में कुल 305 बेड में से 155 बेड यानि अब 52 फीसदी बेड खाली हैं। ऑक्सीजन की भी अतिरिक्त उपलब्धता है। उन्होंने आमजन से अपील की है कि हमारे पास पर्याप्त संसाधन है, सांस लेने में तकलीफ होने अथवा कम ऑक्सीजन लेवल होने पर तत्काल ही चिकित्सालय पहुंचें। अभियान के अगले चरण में पुनः चिन्हित लोगों पर ही फोकस करते हुए उनका फॉलोअप किया जाएगा।