तीसरी शताब्दी की कलाकृति को लेकर केंद्र सरकार और आंध्र सरकार आमने-सामने
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पुरातत्व महत्व के एक पैनल को लेकर केंद्र सरकार और आंध्र राज्य सरकार आमने-सामने हैं। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने तीसरी शताब्दी का पत्थर से बने पैनल जिसे 'भगवान बुद्ध के उपासक' टाइटल दिया गया है। इस पैनल को मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश सरकार के वापस करने के अनुरोध को ठुकरा दिया है।
इस प्रतिमा को 2005 में आंध्र के संग्रहालय से चुराया गया था । आस्ट्रेलिया ने इसे भारत को वापस किया था जहां वर्तमान में इसे राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा गया है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने तर्क दिया है कि आंध्र प्रदेश को पहले चंदवारम साइट संग्रहालय की सुरक्षा को तंत्र को प्रभावी बनाना चाहिए। क्योंकि चंदवारम की तुलना में कलाकृति राष्ट्रीय संग्रहालय में अधिक सुरक्षित है।
इसके अलावा एक तर्क यह भी है कि यह पैनल राष्ट्रीय संग्रहालय में लोगों केआकर्षण का भी केंद्र बनी हुई है। इसके अलावा मंत्रालय ने चंद्रबाबू नायडू सरकार से चंदवारम साइट संग्रहालय में सुरक्षा के जमीनी स्तर पर किए जा रहे उपायों का ब्यौरा भी मांगा है, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और फिर से चोरी संभावना पर विराम लग सके।
प्राचीन भारतीय शैली में चूना पत्थर से बने इस सजावटी पैनल में भगवान बुद्ध के दो जोड़ों वाली एक अनूठी कलाकृति है। इसे 2016 में आस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी ने भारत को लौटाया था। एनजीए ने 2005 में न्यूयॉर्क में आर्ट डीलर आर्टिफेक्ट ट्रैफिकर सुभाष कपूर से इस पैनल को 595.000 डॉलर में खरीदा था। कपूर इस समय चेन्नई जेल में बंद है।
ऐसे हुई कलाकृति की वापसी
प्राचीन इतिहासकार रॉबर्ट अल्टर ने इसके लिए दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। इसमें बताया गया था कि बुद्ध के उपासक पैनल को 1970 के दशक में चंदवारम साइट संग्रहालय के पास से स्तूप से खोला गया था। 2001 में इसे संग्रहालय से चुराया गया था। इसके सबूत जर्नल फॉर आर्ट मार्केट स्टडीज में प्रकाशित एक पेपर में मिले जिसमें बताया गया है कि इसे भारत से अवैध रूप से निर्यात करके लाया गया था।
बुद्ध पैनल की सुरक्षा को लेकर मंत्रालय की चिंता अकारण नहीं है। आंध्र प्रदेश में 2000 से 2001 के बीच चंदवारम साइट संग्रहालय से कुल नौ कलाकृतियां चुराई गई थीं। इसमें से चार पुरातन कलाकृतियों को बरामद करा लिया गया है। विडंबना यह है कि आंध्र प्रदेश को पुरातत्व महत्व की कलाकृतियों की चोरी का स्वर्ग माना जाता है।
2012-14 के बीच गिरफ्तार किए गए थे 250 से ज्यादा लोग
दक्षिण राज्यों में 2017 में अंतिम चोरी हुई थी । इसमें 11वीं और 12वीं शताब्दी के नंदी के पत्थर की मूर्ति को आंध्र प्रदेश के चितूर जिले के गुडिमलम में श्री अनादावल्ली अम्मावरु मंदिर से चुराया गया था। इससे पहले 2008 में भी बड़ी चोरी हुई थी।
डिजिटलाइज होंगे संग्रहालय
लगातार हो रही चोरियों की वजह से बदहाल आंध्र प्रदेश पुरातत्व और संग्रहालय विभाग ने व्यवस्था को सुधारने की कवायद शुरू की है। विभाग राज्य के संग्रहालयों के डिजिटल भंडार बनाने की प्रक्रिया में है। इससे संग्रहालयों को दोहरा लाभ होगा। तकनीक का लाभ लोगों को मिलेगा और प्रभावी प्रबंधन से सुरक्षा तंत्र मजबूत होगा।
इसमें पहले चरण में विजयवाड़ा, गुंटूर, नेल्लोर, कुरनूल, काकीनाडा और राजमेंद्रम के संग्रहालयों में कलाकृतियों और प्राचीन पांडुलिपियों समेत सारे संग्रहों को थ्रीडी प्रारूप में डिजिटलाइज किया जाएगा और सारी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा ऑनलाइन सिस्टम की मदद से संग्रहालयों की निगेहबानी आसानी से की जा सकेगी।