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Hindi News ›   India News ›   India China News: Disengagement troops of India and China has been completed Patrolling Point 15, Chinese troops moved 2 kms back

चीन ने पीछे किए कदम तो भारत ने भी सेना को हटाया, गलवां में बन रहे पहले जैसे हालात

Wed, 08 Jul 2020 01:32 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Wed, 08 Jul 2020 01:32 PM IST
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India China News: Disengagement troops of India and China has been completed Patrolling Point 15, Chinese troops moved 2 kms back
लद्दाख की गलवां घाटी - फोटो : Amar Ujala

भारत और चीन के बीच दो महीनों से चल रहा गतिरोध धीरे-धीरे समाप्त होते नजर आ रहा है। भारत और चीन के सैनिकों ने बुधवार को पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 पर पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी कर ली। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवान करीब दो किलोमीटर तक पीछे लौट गए हैं। भारतीय सेना के सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है। 

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बता दें कि, भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ तनाव वाली जगहों से चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की वापसी की निगरानी के लिए सत्यापन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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वहीं, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा में एक जटिल विघटन (डिसइंग्गेजमैंट) योजना आगे बढ़ गई है। यहां पर दोनों सेनाएं 24 घंटे की समय सीमा के भीतर सैनिकों के बीच 4 किमी बफर जोन बनाने के लिए काम कर रही हैं। इस घटनाक्रम से परिचित अधिकारियों ने मंगलवार को इस बात की जानकारी दी। 

यह भी पढ़ें: लद्दाख में तीन बिंदुओं पर बना चार किमी का बफर जोन, चीनी फौज ने झड़प वाले स्थान से लौटना शुरू किया

एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, बुधवार शाम तक पेट्रोलिंग प्वाइंट-17 (गोगरा) से भी चीनी सैनिक पीछे लौट सकते हैं। वहीं, भारतीय सेना भी इसी गति से पीछे लौट रही है। पिछले हफ्ते शीर्ष भारतीय और चीनी सैन्य कमांडरों द्वारा लद्दाख में चल रहे सीमा विवाद को लेकर हुई बैठक में इसका निर्णय लिया गया था।

गौरतलब है कि, पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच 15-16 जून की दरमियानी रात हिंसक झड़प हो गई थी। इस झड़प में सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। वहीं, इस घटना में चीन के भी 43 जवान हताहत हुए थे। हालांकि, चीन ने हताहत हुए जवानों को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया था। 

इस घटना के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया। भारत में बड़े पैमाने पर लोगों ने चीन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया और चीनी वस्तुओं का बहिष्कार किया। सरकार ने भी टिकटॉक समेत 59 चीनी एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके अलावा, चीनी कंपनियों को दिए गए ठेकों को वापस लेना शुरू कर दिया। 


दूसरी तरफ, तनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक लेह का दौरा किया और झड़प में घायल हुए जवानों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। साथ ही उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि लेह, लद्दाख से लेकर करगिल और सियाचिन तक, यहां की बर्फीली चोटियों से लेकर गलवां घाटी की ठंडे पानी की धारा तक। हर चोटी, हर पहाड़, हर जर्रा-जर्रा, हर कंकड़, पत्थर भारतीय सैनिकों के पराक्रम की गवाही दे रहा है। 

मोदी ने आगे कहा कि विस्तारवाद की जिद किसी पर सवार हो जाती है तो उसने हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा पैदा किया है और यह न भूलें इतिहास गवाह है। ऐसी ताकतें मिट गई हैं या मुड़ने को मजबूर हो गई है। 


 

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