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Supreme Court: 'बेहद गंभीर मामलों में हो बर्खास्तगी का दंड, आश्रितों पर पड़ता है असर', कोर्ट की अहम टिप्पणी

Thu, 11 Jun 2026 08:41 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 11 Jun 2026 08:41 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त करना सबसे सख्त सजा है, इसलिए इसे केवल बेहद गंभीर मामलों में ही लागू किया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जहां भ्रष्टाचार या बड़ा नुकसान साबित न हो और कर्मचारी का रिकॉर्ड अच्छा रहा हो, वहां कम सख्त दंड पर भी विचार किया जाना चाहिए। पढ़िए रिपोर्ट-

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Disciplinary authority must be very careful in imposing punishment of dismissal from service: SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि किसी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त करने जैसा सख्त दंड देने से पहले अनुशासन प्राधिकरण को बेहद सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इसका असर न केवल कर्मचारी पर बल्कि उसके आश्रित परिवार पर भी बहुत गंभीर होता है।कोर्ट ने कहा कि बर्खास्तगी का दंड केवल उन्हीं मामलों में होना चाहिए, जहां गलत आचरण अत्यंत गंभीर हो और जिसमें नरमी या वैकल्पिक दंड देना उचित न हो। 
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महिला ने दायर की थी याचिका
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड की एक महिला कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। महिला को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। पीठ ने कहा कि जब कर्मचारी का व्यवहार ऐसा हो जो अनुशासन, भरोसे या संस्थागत कार्यप्रणाली के पूरी तरह खिलाफ हो, तभी बर्खास्तगी उचित मानी जा सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार, रिश्वत, नैतिक पतन, वित्तीय गबन या बड़े आर्थिक नुकसान जैसे मामलों को अलग नजर से देखा जाता है। कोर्ट ने कहा कि जिन मामलों में भ्रष्टाचार या बड़ा नुकसान साबित नहीं होता और कर्मचारी का सेवा रिकॉर्ड लंबा व संतोषजनक रहा हो, वहां कम सख्त सजा पर विचार किया जाना चाहिए।

'परिस्थितियों को ध्यान में रखकर सजा तय करे अधिकारी'
इस मामले में कोर्ट ने कहा कि बर्खास्तगी की सजा पूरी तरह असंगत है और सक्षम अधिकारी को चाहिए कि वह कर्मचारी की लंबी सेवा, उम्र, कार्य की प्रकृति और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखकर कोई कम सजा तय करे। पीठ ने यह भी कहा कि कर्मचारी को फिर से बहाल नहीं किया जाएगा, क्योंकि वह पहले ही सेवानिवृत्ति की उम्र पार कर चुकी है। लेकिन उसे मिलने वाले वेतन और अन्य लाभों का फैसला नए आदेश के आधार पर किया जाएगा।
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