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ऋतब्रत बने रहेंगे नेता प्रतिपक्ष?: कोर्ट का स्पीकर के फैसले पर अंतरिम रोक से इनकार; 16 जून को अगली सुनवाई
Thu, 11 Jun 2026 06:27 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 11 Jun 2026 06:27 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर विवाद जारी है, जिसमें टीएमसी नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है और इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया है। पढ़िए रिपोर्ट-
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नेता प्रतिपक्ष की मान्यता का मामला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
विस्तार
टीएमसी के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष की ओर से विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने के फैसले को चुनौती दी है। चट्टोपाध्याय ने गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में कहा कि यह कदम संविधान की मूल संरचना के खिलाफ है।
वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी शोभनदेब चट्टोपाध्याय की ओर से पेश हुए। उन्होंने जस्टिस कृष्णा राव के समक्ष कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने विधानसभा अध्यक्ष को पार्टी के फैसले की जानकारी दे दी थी। जिसमें शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था।
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शोभनदेब चट्टोपाध्याय और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता की मान्यता दी गई है। ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि उन्हें टीएमसी के 57 अन्य विधायकों का समर्थन हासिल है और वह अलग हुए गुट का नेतृत्व कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें: तृणमूल कांग्रेस: 'कौन गया-कौन नहीं गया, मुझे नहीं पता', पार्टी के बागी सांसदों पर सौगत रॉय ने क्या कहा?
विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश वकील बिल्वदल भट्टाचार्य ने याचिका में उठाए गए मुद्दों पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। जस्टिस कृष्णा राव ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया और मामले की अगली सुनवाई 16 जून के लिए निर्धारित कर दी।
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वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी शोभनदेब चट्टोपाध्याय की ओर से पेश हुए। उन्होंने जस्टिस कृष्णा राव के समक्ष कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने विधानसभा अध्यक्ष को पार्टी के फैसले की जानकारी दे दी थी। जिसमें शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था।
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शोभनदेव चट्टोपाध्याय के वकील ने क्या दलील दी?
उन्होंने दलील दी कि ऐसा फैसला लेने का अधिकार विधायी दल के बजाय राजनीतिक दल के पास होता है और विधानसभा अध्यक्ष पार्टी की ओर से चुने गए व्यक्ति को स्वीकार करने के लिए बाध्य हैं। कल्याण बनर्जी ने अदालत से कहा, विधानसभा अध्यक्ष का यह कदम संविधान की मूल संरचना पर आघात करता है।
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शोभनदेब चट्टोपाध्याय और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता की मान्यता दी गई है। ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि उन्हें टीएमसी के 57 अन्य विधायकों का समर्थन हासिल है और वह अलग हुए गुट का नेतृत्व कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें: तृणमूल कांग्रेस: 'कौन गया-कौन नहीं गया, मुझे नहीं पता', पार्टी के बागी सांसदों पर सौगत रॉय ने क्या कहा?
साहा को मुख्य सचेतक के रूप में मान्यता को भी चुनौती
याचिकाकर्ताओं ने विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को भी चुनौती दी है, जिसमें अलग हुए गुट के नेता संदीपन साहा को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के रूप में मान्यता दी गई है। विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की मांग करते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा कि विधानसभा का सत्र 18 जून से शुरू होने वाला है।विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश वकील बिल्वदल भट्टाचार्य ने याचिका में उठाए गए मुद्दों पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। जस्टिस कृष्णा राव ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया और मामले की अगली सुनवाई 16 जून के लिए निर्धारित कर दी।