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धनशोधन मामला: नवाब मलिक के परिवार की कंपनी की याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य

Thu, 13 Nov 2025 09:15 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 13 Nov 2025 09:15 PM IST
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Discharge plea of firm run by Nawab Malik's kin rejected in PMLA case linked to Dawood Ibrahim
नवाब मलिक, नेता, एनसीपी - फोटो : X / @nawabmalikncp
मुंबई की एक विशेष अदालत ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता नवाब मलिक के परिवार द्वारा संचालित एक रियल एस्टेट कंपनी को धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले से बरी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
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मलिक और उनके परिवार की कंपनियां 'सॉलिडस इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड' और 'मलिक इंफ्रास्ट्रक्चर' भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसके साथियों की गतिविधियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी हैं। मलिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने अदालत में दलील दी थी कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का मामला केवल 'अनुमान और अटकलों' पर आधारित है, इसलिए उसे इस मामले से मुक्त किया जाए।
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लेकिन सांसदों/विधायकों के मामलों की सुनवाई करने वाले विशेष जज सत्यनारायण नवंदर ने 11 नवंबर को इस याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि नवाब मलिक ने डी-कंपनी के सदस्यों हसीना पारकर, सलीम पटेल और आरोपी सरदार खान के साथ मिलकर अवैध रूप से कब्जाई गई संपत्ति की मनी लॉन्ड्रिंग में हिस्सा लिया, जो अपराध से प्राप्त धन है।


अदालत ने कहा कि यह संपत्ति धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जब्त की गई है। आदेश में कहा गया, सॉलिडस इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और मलिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिये वसूला गया किराया, जो मलिक परिवार के नियंत्रण में हैं, अपराध से प्राप्त धन की श्रेणी में आता है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं।

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ईडी का मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस प्राथमिकी पर आधारित है, जो दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज की गई थी। ईडी ने नवाब मलिक को फरवरी 2022 में गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल जमानत पर हैं।
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