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बंद कंपनियों के खिलाफ एक और एक्शन, बैंक खातों से पैसा निकालने पर 10 साल की होगी जेल
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 07 Sep 2017 07:44 AM IST
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बंद (स्ट्रक ऑफ) कंपनी के निदेशक या प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता कंपनी के बैंक खाते से गैर अनधिकृत रूप से पैसे निकालता है तो वह जेल भेजा जा सकता है। कंपनी कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री पी पी चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई समीक्षा बैठक में इस आशय का फैसला किया गया।
इस मामले में केंद्र सरकार की जारी विज्ञप्ति के मुताबिक दोषी व्यक्ति को कम से कम छह महीने या 10 वर्ष तक की जेल की सजा हो सकती है। यदि यह पता चलता है कि धोखाधड़ी से आम नागरिक का हित प्रभावित होता है तो सजा कम से कम तीन वर्ष की होगी। इसके साथ जितनी रकम की निकासी का प्रयास होगा, उस रकम के तीन गुनी रकम का जुर्माना भी होगा।
उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्रालय के बैंकिंग डिवीजन ने बीते पांच सितंबर को सभी बैंकों को जारी किए गए निर्देशों के जरिये शेल कंपनियों के पूर्व निदेशकों या उनके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को ऐसी कंपनियों के बैंक खातों के संचालन से प्रतिबंधित कर दिया गया था।
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अयोग्य निदेशकों की एमसीए में अर्जी दाखिल करने पर रोक
नई दिल्ली। कॉरपोरेट मंत्रालय (एमसीए) ने बुधवार को कहा कि कंपनियों के अयोग्य करार दिए गए निदेशक अगर एमसीए में कोई अर्जी या दस्तावेज दाखिल करेंगे, तो उन्हें तत्काल खारिज कर दिया जाएगा।
मंत्रालय ने कथित तौर पर अवैध फंड के लेनदेन को लेकर बनाई गई शेल कंपनियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है। मंगलवार को केंद्र सरकार ने ऐसी 2.09 लाख से अधिक कंपनियों का पंजीकरण खत्म कर दिया था और उनके बैंक खातों को फ्रीज करने का आदेश देते हुए ऐसी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी।
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इस मामले में केंद्र सरकार की जारी विज्ञप्ति के मुताबिक दोषी व्यक्ति को कम से कम छह महीने या 10 वर्ष तक की जेल की सजा हो सकती है। यदि यह पता चलता है कि धोखाधड़ी से आम नागरिक का हित प्रभावित होता है तो सजा कम से कम तीन वर्ष की होगी। इसके साथ जितनी रकम की निकासी का प्रयास होगा, उस रकम के तीन गुनी रकम का जुर्माना भी होगा।
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उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्रालय के बैंकिंग डिवीजन ने बीते पांच सितंबर को सभी बैंकों को जारी किए गए निर्देशों के जरिये शेल कंपनियों के पूर्व निदेशकों या उनके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को ऐसी कंपनियों के बैंक खातों के संचालन से प्रतिबंधित कर दिया गया था।
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अयोग्य निदेशकों की एमसीए में अर्जी दाखिल करने पर रोक
नई दिल्ली। कॉरपोरेट मंत्रालय (एमसीए) ने बुधवार को कहा कि कंपनियों के अयोग्य करार दिए गए निदेशक अगर एमसीए में कोई अर्जी या दस्तावेज दाखिल करेंगे, तो उन्हें तत्काल खारिज कर दिया जाएगा।
मंत्रालय ने कथित तौर पर अवैध फंड के लेनदेन को लेकर बनाई गई शेल कंपनियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है। मंगलवार को केंद्र सरकार ने ऐसी 2.09 लाख से अधिक कंपनियों का पंजीकरण खत्म कर दिया था और उनके बैंक खातों को फ्रीज करने का आदेश देते हुए ऐसी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी।