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Health: मसूड़ों-दांतों की बीमारी और नुकसान से दिमाग का सीधा जुड़ाव, मुंह की साफ-सफाई मस्तिष्क के लिए भी जरूरी

Thu, 13 Jul 2023 05:58 AM IST
जलज मिश्रा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 13 Jul 2023 05:58 AM IST
सार

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 67 वर्ष की औसत आयु वाले 172 लोगों को शामिल किया था। इन्हें शुरुआत में याददाश्त से जुड़ी कोई समस्या नहीं थी। अध्ययन की शुरुआत में इन लोगों के दांतों व याददाश्त का परीक्षण किया गया था।

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Direct connection of the brain with gums and teeth disease cleanliness of mouth is important for brain
face - फोटो : istock

विस्तार

दांतों की बेहतर देखभाल न केवल मुंह की साफ-सफाई और स्वास्थ्य के लिए जरूरी है बल्कि यह दिमाग के बेहतर स्वास्थ्य से भी जुड़ी है। इस बारे में जापान के तोहोकू विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए अध्ययन से पता चला है कि मसूड़ों की बीमारी और दांतों को होने वाला नुकसान मस्तिष्क के एक अहम हिस्से हिप्पोकैंपस में सिकुड़न से जुड़ा है। इस अध्ययन के नतीजे  अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के मेडिकल जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं।

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गौरतलब है कि हिप्पोकैंपस दिमाग के टेंपोरल लोब में पाया जाता है। दिमाग का यह हिस्सा नई चीजों को सीखने और पुरानी को याद रखने में मदद करता है। साथ ही यह क्षेत्र अल्जाइमर नामक बीमारी से भी जुड़ा है। हालांकि अध्ययन इस बात की पुष्टि नहीं करता है कि मसूड़ों की बीमारी या दांत खराब होने से अल्जाइमर हो सकता है। यह अध्ययन केवल उनके बीच के संबंध को उजागर करता है। इस बारे में अध्ययन और जापान की तोहोकू विश्वविद्यालय से जुड़े लेखक सातोशी यामागुची ने बताया कि अध्ययन से पता चला है कि मौखिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियां, सोच और स्मृति के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क क्षेत्र को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में यह खोज दांतों की बेहतर देखभाल के महत्व पर जोर देती हैै। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 67 वर्ष की औसत आयु वाले 172 लोगों को शामिल किया था। इन्हें शुरुआत में याददाश्त से जुड़ी कोई समस्या नहीं थी। अध्ययन की शुरुआत में इन लोगों के दांतों व याददाश्त का परीक्षण किया गया था।

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जापान की तोहोकू विवि के शोधकर्ताओं ने किया अध्ययन
दिमाग और मसूड़ों की बीमारी के बीच संबंध की पुष्टि के लिए अध्ययन की शुरुआत और फिर चार साल बाद हिप्पोकैंपस को मापने के लिए उनके दिमाग का स्कैन भी किया गया। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान इन सभी लोगों के दांतों की गिनती की थी और उनके मसूड़ों की भी जांच की थी, जिससे उससे जुड़ी बीमारियों का पता लगाया जा सके। इसके लिए उन्होंने पीरियोडोंटल प्रोबिंग डेप्थ नामक माप का उपयोग किया था जो मसूढ़ों के स्वास्थ्य को निर्धारित करता है।

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मसूड़ों की गंभीर बीमारी में हड्डियों को नुकसान ज्यादा
आदर्श रूप से, एक से तीन मिलीमीटर के बीच की रीडिंग स्वस्थ मसूड़ों का संकेत देती है। कई क्षेत्रों में तीन या चार एमएम की गहराई तक जांच करने पर हल्के मसूड़ों की बीमारी की पहचान की गई थी। वहीं, दूसरी ओर मसूड़ों की गंभीर बीमारी के मामले में पांच या छह एमएम की गहराई तक जांच की गई। इस तरह के मामलों में हड्डियों को अधिक नुकसान हो सकता है। साथ ही दांत गिर सकते हैं। दांतों की संख्या और मसूड़ों की बीमारी की गंभीरता मस्तिष्क के बाएं हिप्पो कैंपस में बदलावों से जुड़ी थी।

 

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