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दिलबाग सिंह बने रहेंगे जम्मू एवं कश्मीर के कार्यकारी पुलिस महानिदेशक
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Fri, 21 Sep 2018 05:38 AM IST
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IPS DILBAG SINGH
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जम्मू एवं कश्मीर पुलिस महानिदेशक केंकार्यकारी पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह अपने पद पर बने रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में दखल देने से इनकार किया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने वृहस्पतिवार ने कहा कि कार्यकारी पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह अपने पद पर बने रहेंगे। लेकिन पीठ ने राज्य सरकार को पांच दिनों के भीतर पुलिस महानिदेशक के संभावित नामों की सूची यूपीएससी को देने केलिए कहा है।
सूची मिलने केबाद यूपीएससी को चार हफ्ते के भीतर इस पर निर्णय लेने के लिए कहा गया है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट केदिशानिर्देश केमुताबिक राज्य सरकार को महानिदेशक केसंभावित नामों की सूची यूपीएससी को देनी होती है और यूपीएससी को इनमें से तीन नामों को शार्टलिस्ट करना होता है।
सुनवाई के दौरान जम्मू एवं कश्मीर सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य की हालत ऐसी नहीं है कि यहां पुलिस निदेशक का पद खाली हो। यहीं वजह है कि कार्यकारी पुलिस महानिदेशक को नियुक्त करना पड़ा। मालूम हो कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उस आदेश में बदलाव करने की गुहार की जिसमें कहा गया था कि पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से पहले यूपीएससी से अनुमति जरूरी है।
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वहीं वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्य सरकार केखिलाफ अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि इस मामले में आदेश का उल्लंघन किया गया है। बिना यूपीएससी की अनुमति के कार्यकारी पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया। साथ ही इसमें वरिष्ठता को भी नजरअंदाज कर दिया गया। वरिष्ठता सूची में दिलबाग सिंह पांचवे नंबर पर थे। अदालत अब इस मामले पर पांच हफ्ते बाद सुनवाई करेगी।
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सूची मिलने केबाद यूपीएससी को चार हफ्ते के भीतर इस पर निर्णय लेने के लिए कहा गया है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट केदिशानिर्देश केमुताबिक राज्य सरकार को महानिदेशक केसंभावित नामों की सूची यूपीएससी को देनी होती है और यूपीएससी को इनमें से तीन नामों को शार्टलिस्ट करना होता है।
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सुनवाई के दौरान जम्मू एवं कश्मीर सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य की हालत ऐसी नहीं है कि यहां पुलिस निदेशक का पद खाली हो। यहीं वजह है कि कार्यकारी पुलिस महानिदेशक को नियुक्त करना पड़ा। मालूम हो कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उस आदेश में बदलाव करने की गुहार की जिसमें कहा गया था कि पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से पहले यूपीएससी से अनुमति जरूरी है।
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वहीं वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्य सरकार केखिलाफ अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि इस मामले में आदेश का उल्लंघन किया गया है। बिना यूपीएससी की अनुमति के कार्यकारी पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया। साथ ही इसमें वरिष्ठता को भी नजरअंदाज कर दिया गया। वरिष्ठता सूची में दिलबाग सिंह पांचवे नंबर पर थे। अदालत अब इस मामले पर पांच हफ्ते बाद सुनवाई करेगी।