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Digital Payment: 10,000 रुपये से अधिक के भुगतान में लगेगा एक घंटा, डिजिटल धोखाधड़ी रोकने की कवायद
Fri, 10 Apr 2026 04:23 AM IST
Nitin Gautam
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitin Gautam
Updated Fri, 10 Apr 2026 04:23 AM IST
सार
देश में डिजिटल धोखाधड़ी के मामले काफी बढ़ रहे हैं और ऐसे मामलों में अक्सर बुजुर्गों को निशाना बनाया जाता है। ऐसे में रिजर्व बैंक ने एक ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिससे इस पर रोक लग सकती है, लेकिन इसका असर ये होगा कि डिजिटल भुगतान में देरी हो सकती है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobestock
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विस्तार
डिजिटल भुगतान में धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) नए सुरक्षा उपाय लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नियमों के तहत 10,000 रुपये से अधिक का लेनदेन तुरंत पूरा करने के बजाय एक तय समय के लिए रोका जा सकता है, ताकि ग्राहकों को उसकी समीक्षा या रद्द करने का मौका मिल सके।
आरबीआई के ताजा सर्कुलर के मुताबिक, 10,000 रुपये से अधिक राशि वाले अकाउंट-से-अकाउंट ट्रांसफर पर एक घंटे का कूलिंग पीरियड लागू किया जा सकता है। इस दौरान पैसा खाते से अस्थायी रूप से कट जाएगा, लेकिन ग्राहक चाहे, तो तय समयसीमा में लेनदेन निरस्त कर सकता है। यदि किसी लेनदेन में गड़बड़ी का संदेह होता है, तो बैंक ग्राहक से दोबारा पुष्टि करने के बाद ही भुगतान आगे बढ़ाएगा।
बुजुर्गों के लिए हो सकता है खास प्रावधान
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आरबीआई के ताजा सर्कुलर के मुताबिक, 10,000 रुपये से अधिक राशि वाले अकाउंट-से-अकाउंट ट्रांसफर पर एक घंटे का कूलिंग पीरियड लागू किया जा सकता है। इस दौरान पैसा खाते से अस्थायी रूप से कट जाएगा, लेकिन ग्राहक चाहे, तो तय समयसीमा में लेनदेन निरस्त कर सकता है। यदि किसी लेनदेन में गड़बड़ी का संदेह होता है, तो बैंक ग्राहक से दोबारा पुष्टि करने के बाद ही भुगतान आगे बढ़ाएगा।
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बुजुर्गों के लिए हो सकता है खास प्रावधान
- छोटे निजी व कारोबारी खातों में वार्षिक जमा सीमा 25 लाख रुपये तय की जा सकती है। इससे अधिक रकम होने पर उसे शैडो क्रेडिट के रूप में रखा जाएगा। यानी पैसा खाते में दिखेगा, पर उपयोग तब तक नहीं हो सकेगा, जब तक कि जांच न हो जाए। 30 दिन में संतोषजनक जानकारी नहीं दी जाती, तो राशि वापस भेजी जा सकती है।
- रिजर्व बैंक ने किल स्विच सुविधा का भी प्रस्ताव किया है। इसके जरिये ग्राहक एक ही क्लिक में अपने सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों को बंद कर सकता है। यह फीचर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत सुरक्षा प्रदान करेगा।
- रोजमर्रा के भुगतान जैसे मर्चेंट पेमेंट, ऑटो-डेबिट (ई-मैंडेट) और चेक वाले लेनदेन इस नियम से बाहर रखे जा सकते हैं। इसके अलावा, ग्राहक व्हाइटलिस्ट फीचर के जरिये भरोसेमंद लोगों या खातों को चुनकर ऐसे लेनदेन में देरी से छूट भी पा सकते हैं।
- आरबीआई ने 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा का सुझाव दिया है। 50,000 रुपये से अधिक के डिजिटल लेनदेन के लिए भरोसेमंद स्रोत के रूप में पहचान अनिवार्य की जा सकती है।
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