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सियासत: भाजपा के हाथ में कांग्रेसी खुद दे रहे सत्ता की चाभी ! इस बार फिर 'ऐसे' कर दी शुरुआत 

Wed, 13 Apr 2022 02:19 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Wed, 13 Apr 2022 02:19 PM IST
सार

कांग्रेस की अपनी एक विचारधारा रही है और उसी विचारधारा के आधार पर कांग्रेस ने लंबे समय तक देश में शासन किया। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता मानते हैं कि उसे अपनी विचारधारा के साथ समझौता नहीं करना चाहिए।

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Difficult to defeat BJP on Hindutva, Congress doing  same mistake again
प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चुनावी राज्यों में कांग्रेस हर बार कुछ न कुछ ऐसा कर देती है जिससे नतीजे उसके पक्ष की बजाय उसके खिलाफ हो जाते हैं। इस बार भी आने वाले कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के नेताओं ने खुद के लिए कुछ वैसा ही मकड़जाल तैयार करना शुरू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, कांग्रेस बीते कुछ समय से भारतीय जनता पार्टी की तरह हिंदुत्व की राह पर चलने का एक असफल प्रयास करती है। इस कड़ी में मध्यप्रदेश में फिर से वही गलती दोहराने का प्रयास शुरू कर दिया गया है।

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अगले साल मध्यप्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं। चूंकि 2018 के चुनाव में कांग्रेस को वहां सत्ता मिली थी। लेकिन राजनैतिक उठापटक और सियासी समीकरण के चलते सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा का राज वापस आ गया। 2018 के पुराने समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर से ऐसा आदेश जारी कर दिया जो उनके लिए मुसीबत बन सकता है। राजनीतिक विश्लेषक आरएन चतुर्वेदी कहते हैं कि मध्य प्रदेश में अगले साल के चुनावों की राजनैतिक पिच को तैयार करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने हिंदुत्व की राह पकड़ ली है। इसके लिए मध्यप्रदेश कांग्रेस ने बाकायदा अपने कार्यकर्ताओं को भगवान राम की कथा और रामलीला के साथ मध्य प्रदेश के सभी गांव तहसील शहर और कस्बों में हर छोटे-बड़े मंदिर में पूजा अर्चना के लिए कहा है। रामनवमी से शुरू हुआ यह कार्यक्रम हनुमान जयंती तक मंदिरों में भजन पूजन और सुंदरकांड समेत हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए अपने सभी कार्यकर्ताओं को कहा गया है। चतुर्वेदी कहते हैं कांग्रेस यहीं पर हर बार मात खा जाती है। वह कहते हैं जिस मुद्दे पर कांग्रेस को जाकर कोई नतीजा हासिल नहीं हो तो उस पर चलने का कोई मतलब ही नहीं बनता है। उनका कहना है कांग्रेस खुद भारतीय जनता पार्टी को ऐसा मौका दे देती है जिससे तमाम असली मुद्दे पीछे हो जाते हैं और हिंदुत्व का मुद्दा आगे आ जाता है। हकीकत यह है कि हिंदुत्व के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी को फिलहाल पीछे कर पाना किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी के बस की बात नज़र नहीं आती है। 
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हिन्दुत्व का फार्मूला कांग्रेस औऱ बाकी पार्टियों के लिए नाकाम
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश शुक्ल कहते हैं की उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस के नेताओं ने सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पकड़ी थी। प्रियंका गांधी से लेकर राहुल गांधी तक विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना करने लगे थे। ब्रजेश शुक्ला कहते हैं कि इस तरीके के सॉफ्ट हिंदुत्व वाले एजेंडे के साथ कांग्रेस जब-जब मैदान में उतरती है तो उसको नुकसान का ही सामना करना पड़ता है। वह कहते हैं 2017 में गुजरात में हुए विधानसभा के चुनावों में भी राहुल गांधी ने वहां के मंदिरों में जाकर मत्था टेकना शुरू किया था। जैसे ही राहुल गांधी ने मंदिरों में जाकर दर्शन करने शुरू किए वैसे ही भारतीय जनता पार्टी के शासन के दौरान की नाराजगी और चुनाव के असली मुद्दे किनारे हो गए। वह कहते हैं कि बात जब हिंदुत्व और हिंदुत्व की पार्टी की आती है तो भारतीय जनता पार्टी हमेशा बाजी मारती है। राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में भी इसी तरीके का एक प्रयोग समाजवादी पार्टी ने और बहुजन समाज पार्टी ने भी किया। समाजवादी पार्टी ने परशुराम जयंती पर भव्य तरीके से अलग-अलग जगहों पर आयोजन किया कई जगह पर मंदिर बनवाए और हिंदुत्व की राह पर चलने का एक प्रयास किया। भारतीय जनता पार्टी के लिए समाजवादी पार्टी ने तमाम मुद्दों को किनारे करने का बड़ा मौका दे दिया और चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने हिंदुत्व के मुद्दे को जमकर कैश भी कराया गया।
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अपनी विचारधारा से समझौता न करे कांग्रेस 
कांग्रेस की अपनी एक विचारधारा रही है और उसी विचारधारा के आधार पर कांग्रेस ने लंबे समय तक देश में शासन किया। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता मानते हैं कि पार्टी को अपनी लाइन से बिल्कुल नहीं भटकना चाहिए। क्योंकि वक्त जरूर इस समय उनके पक्ष में नहीं है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि आने वाले दिनों में चीजें फिर से उनकी तरफ ना आएं। कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि पार्टी आलाकमान से लेकर चुनावी राज्यों में रणनीति बनाने वाले नेताओं को इस बात से चिंतित नहीं होना चाहिए और अपनी विचारधारा के साथ समझौता नहीं करना चाहिए। कांग्रेस के एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी में वरिष्ठ पद पर काम कर चुके नेता कहते हैं कि जब आप हिन्दुत्व के कार्ड पर खुलकर सामने आएंगे तो उसमें कांग्रेस की जीत की संभावनाएं बहुत कम नजर आएंगी। क्योंकि बात जब हिंदुत्व की आती है तो बहुत सारे असली मुद्दे पीछे रह जाते हैं और भारतीय जनता पार्टी उसे हिंदुत्व को अपना राजनीतिक हथियार मान कर सबसे आगे निकल जाती है। वह कहते हैं कांग्रेस हिंदू और मुसलमान की राजनीति नहीं करती है। यही वजह है कि दोनों समुदाय के लोग पार्टी में सम्मान पाते हैं। लेकिन पार्टी जब मंदिर जाकर मत्था टेकना शुरू करती है तो पार्टी में न सिर्फ विघटन होता है बल्कि भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा मौका हाथ लग जाता है। हिन्दुत्त्व के मुद्दे पर कांग्रेस पिछड़ जाती है। कांग्रेस के नेताओं ने अपने ही नेतृत्व को सलाह दी है कि कम से कम आने वाले विधानसभा के चुनावों में हिंदुत्व के मुद्दे को आगे कर उसकी राजनीति करने से बचना चाहिए।

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