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संसद में हंगामा टालने के लिए टली ढींगरा आयोग की रिपोर्ट
हिमांशु मिश्र /अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 04 Jul 2016 02:23 AM IST
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हरियाणा में हुड्डा सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए जमीन सौदे की जांच के लिए गठित जस्टिस ढींगरा अयोग की रिपोर्ट तैयार होने के बाद अचानक टाल दिए जाने पर सियासी अटकलें और आरोप-प्रत्यारोप चरम पर है। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि 18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में इस रिपोर्ट के कारण हंगामे की संभावना को टालने के लिए ही आयोग की रिपोर्ट टाली गई।
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दरअसल, इस सत्र में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर बनती दिख रही सहमति के बीच केंद्र सरकार ऐसा कोई विवाद नहीं चाहती थी जिससे विपक्ष को फिर से एकजुट होने का मौका हाथ लग जाए। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट पूरी तैयार तैयार थी और आयोग इसे बीते हफ्ते बृहस्पतिवार को ही सरकार को पेश भी करने वाला था।
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रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा, वर्तमान मुख्य सचिव सहित उस दौरान कंट्री प्लानिंग से जुड़े रहे अधिकारियों की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी की गई है।
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दरअसल, अरसे बाद सरकार मानसून सत्र में जीएसटी बिल के पारित होने को लेकर आशान्वित है। इस मामले में सरकार के रणनीतिकार कांग्रेस को अलग-थलग करने में सफल रहे हैं। सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि यही स्थिति कायम रहने पर कांग्रेस का रुख भी जीएसटी के लिए सकारात्मक होने के आसार बन रहे हैं।
रिपोर्ट पेश होने पर संसद में इस पर हंगामा मचना तय था। उक्त सूत्र का कहना है कि रिपोर्ट में वाड्रा, हुड्डा से पूछताछ न करने की स्थिति में इसकी विश्वसनीयता और कानूनी रूप से कमजोर होने की बात गलत है।
दरअसल आयोग गुड़गांव जमीन सौदे से जुड़ी वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी और हुड्डा से लिखित सवाल कर चुकी है। वाड्रा की कंपनी की ओर से वकील आयोग के समक्ष पेश हो चुके हैं। रिपोर्ट में इनके जवाब का जिक्र है और इसकी कमियों का भी ब्योरा दिया गया है। ऐसे में पूरे मामले में दूसरे पक्ष की दलील सामने न आने की बात गलत है।
गौरतलब है कि कार्यकाल खत्म होने के महज कुछ घंटे पहले दो बार विस्तार हासिल कर चुके आयोग ने 6 सप्ताह के लिए एक और विस्तार मांग लिया था। खट्टर सरकार ने भी विस्तार देने में देरी नहीं लगाई।