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केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देश को समर्पित किया पश्चिम बंगाल का पहला तेल एवं गैस रिजर्व

Sun, 20 Dec 2020 06:01 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 20 Dec 2020 06:01 PM IST
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Dharmendra Pradhan dedicated the first oil and gas reserve of West Bengal to the country
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान - फोटो : social media

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में एक तेल एवं गैस उत्पादन फील्ड को रविवार को देश को समर्पित किया। यह राज्य में पहला तेल एवं गैस रिजर्व है।  प्रधान ने कहा कि कोलकाता से लगभग 47 किलोमीटर दूर स्थित पेट्रोलियम रिजर्व से उत्पादन शुरू हो गया है और निकाले जा रहे तेल को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) की हल्दिया रिफाइनरी भेजा जा रहा है।

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उन्होंने परियोजना का उद्घाटन करने के बाद कहा कि अशोकनगर तेल एवं गैस रिजर्व से उत्पादन शुरू होने के साथ ही पश्चिम बंगाल भी उन राज्यों में शामिल हो गया है जहां तेल निकाला जाता है। राज्य में तेल एवं गैस का पहला रिजर्व 2018 में खोजा गया था।
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उन्होंने कहा कि महानदी-बंगाल-अंडमान (एमबीए) बेसिन के अंतर्गत आने वाला अशोकनगर फील्ड व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (पीएसयू) ओएनजीसी ने अशोकनगर तेल क्षेत्र की खोज के लिए 3,381 करोड़ रुपये खर्च किए थे। उन्होंने कहा कि कंपनी ओपन एक्रियेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएलएपी) के तहत दो और कुओं की खोज करेगी।
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मंत्री ने कहा कि अशोकनगर रिजर्व में खोजा गया कच्चा तेल उच्च गुणवत्ता का है। उन्होंने कहा कि तेल क्षेत्र से वाणिज्यिक उत्पादन होने से पश्चिम बंगाल के राजस्व में वृद्धि होगी और राज्य में रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।

देश का आठवां हाइड्रोकार्बन बेसिन

सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने रविवार को बंगाल बेसिन में एक कुएं से तेल का उत्पादन शुरू कर भारत का आठवां हाइड्रोकार्बन उत्पादक बेसिन चालू किया। कंपनी ने एक बयान में कहा कि तेल उत्पादन 24 परगना जिले के अशोकनगर-1 कुएं से शुरू हुआ। प्रधान ने ओएनजीसी को बधाई दी और कहा कि यह खोज भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

बयान के अनुसार, ‘तेल उत्पादक के रूप में अशोकनगर-1 कुएं को पूरा किया गया है। भारत सरकार ने परियोजना के जल्दी अमल में लाने को लेकर दिशानिर्देश जारी किया था।’ इसके साथ ओएनजीसी ने आठ हाइड्रोकार्बन उत्पादक बेसिन में से सात में खोज और उत्पादन का काम शुरू कर दिया है। यह स्थापित तेल एवं गैस भंडार का 83 प्रतिशत है।

ओएनजीसी देश की सबसे बड़ी तेल और गैस उत्पादक कंपनी है। इसका देश के हाइड्रोकार्बन उत्पादन में 72 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बंगाल बेसिन करीब 1.22 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इसमें से दो तिहाई बंगाल की खाड़ी के जल क्षेत्र में है। बयान के अनुसार ओएनजीसी अबतक बंगाल बेसिन में हाइड्रोकार्बन खोज एवं उत्खनन कार्यों में 3,361 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। अगले दो साल में उत्खनन गतिविधियों में 425 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

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