कांग्रेस नेता के बाद धनंजय मुंडे ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में दर्ज केस वापस लेने की मांग की
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नाणार रिफाइनरी परियोजना के प्रदर्शनकारियों और मुंबई की आरे कॉलोनी में पेड़ काटने का विरोध जताने पर पर्यावरणविदों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने के एलान के बाद अब भीमा कोरेगांव मामले में दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग उठी है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता धनंजय मुंडे ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को वापस लेने की मांग की है।
Senior Nationalist Congress Party (NCP) leader Dhananjay Munde (file pic) has also written a letter to Chief Minister Uddhav Thackeray seeking withdrawal of FIRs registered against social activists and protesters in Bhima Koregaon violence case. #Maharashtra https://t.co/0i7OHIKeh6 pic.twitter.com/Hx0dsQ0tEc
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) December 3, 2019
इससे पहले कांग्रेस के एमएलसी प्रकाश गजभिये ने भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिख कर भीमा कोरेगांव मामले में दर्ज किए गए केसों को वापस लेने की अपील की है।
वहीं इस मामले ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि, पिछली सरकार ने भीमा कोरेगांव मामलों को वापस लेने का आदेश दिया था। पहले, हम आकलन करेंगे कि क्या इसे लागू किया गया था।
Maharashtra Chief Minister Uddhav Thackeray: Previous government had ordered withdrawal of the cases in connection with Bhima Koregaon case. First, we are assessing if it was implemented. pic.twitter.com/7Z9r18qCsm
— ANI (@ANI) December 3, 2019
बता दें कि सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने नाणार रिफाइनरी परियोजना के खिलाफ आंदोलन करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का आदेश दिया था। इससे पहले रविवार को मुंबई की आरे कॉलोनी में पेड़ काटने का विरोध जताने पर पर्यावरणविदों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने का एलान किया था। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इस संबंध में कार्रवाई के लिए कहा गया है। उद्धव सरकार पहले ही मेट्रो के कार शेड प्रोजेक्ट पर रोक लगा चुकी है। सरकार में आने से पहले भी शिव सेना ने इस प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों की कटाई का विरोध किया था। उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे ने इस मामले पर भाजपा से अलग राय रखी थी जबकि उस समय दोनों गठबंधन में थे।
वहीं चर्चा इस बात की भी है कि शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की नई सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के ड्रीम प्रोजेक्ट को झटका दे सकती है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्होंने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन समेत राज्य में चल रही सभी विकास परियोजनाओं की समीक्षा के आदेश दिए हैं। बुलेट ट्रेन परियोजना को किसानों और आदिवासियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा जिनकी भूमि अधिग्रहित की जानी है।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘यह सरकार आम आदमी की है। हम बुलेट ट्रेन (परियोजना) की समीक्षा करेंगे। ठाकरे ने बताया कि उनकी सरकार राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र भी लाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जिस पर करीब पांच लाख करोड़ रुपये का कर्ज है वह किसानों का बिना शर्त कर्ज माफ करने को लेकर प्रतिबद्ध है। ठाकरे ने कहा कि भाजपा नीत सरकार की जो प्राथमिकताएं थीं, उन्हें हटाया नहीं गया है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रतिशोध की राजनीति नहीं है।