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DGHS: नाम के आगे डॉक्टर नहीं लगा सकेंगे फिजियोथेरेपिस्ट, स्वास्थ्य महानिदेशालय ने जारी किया निर्देश
Wed, 10 Sep 2025 10:09 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 10 Sep 2025 10:09 PM IST
सार
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने आदेश जारी कर कहा है कि फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे ‘डॉ.’ उपसर्ग का प्रयोग नहीं कर सकते। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय चिकित्सा डिग्री अधिनियम 1916 के तहत कोई भी व्यक्ति अगर बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के डॉक्टर की उपाधि इस्तेमाल करता है तो यह अवैध है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Freepik
विस्तार
फिजियोथेरेपिस्ट को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशालय ने अहम दिशा निर्देश जारी किए हैं। अब फिजियोथेरेपिस्ट को डॉक्टर (Dr.) लिखने की अनुमति नहीं होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशालय (डीजीएचएस)ने जारी आदेश में फिजियोथेरेपिस्ट के अपने नाम के साथ ‘डॉक्टर’ लगाने पर रोक लगा दी है।
महानिदेशालय ने भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) को भेजे पत्र में कहा है कि फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल डॉक्टर नहीं हैं। इसलिए उन्हें यह उपाधि इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय चिकित्सा डिग्री अधिनियम 1916 के तहत कोई भी व्यक्ति अगर बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के डॉक्टर की उपाधि इस्तेमाल करता है तो यह अवैध है और उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। महानिदेशालय ने कहा कि फिजियोथेरेपी की नई पाठ्यक्रम पुस्तिका से तुरंत इसे हटाया जाए। इसके बजाय कोई सम्मानजनक लेकिन स्पष्ट उपाधि दी जा सकती है, जिससे मरीजों या आम जनता को भ्रम न हो।
क्यों शुरू हुआ विवाद?
यह फैसला उस अप्रैल 2025 की अधिसूचना के बाद आया है, जिसमें नेशनल कमीशन फॉर एलाइड ऐंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) ने फिजियोथेरेपिस्टों को अपने नाम के आगे ‘Dr.’ और नाम के बाद ‘PT’ लगाने की अनुमति दी थी।
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इसे लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन सहित कई अन्य संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया।आईएमए की ओर से भी इसके खिलाफ शिकायत की गई।
ये भी पढ़ें: Cryptocurrency: 'क्रिप्टोकरंसी को पूरी तरह नियंत्रित करने वाला कानून नहीं बनाएगी सरकार ', रिपोर्ट में खुलासा
अदालतों ने लगाई है रोक
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता शर्मा ने कहा कि कई अदालतों और मेडिकल काउंसिल ने पहले भी इस पर रोक लगाई है। साल 2003 में पटना हाईकोर्ट, 2016 में तमिलनाडु मेडिकल काउंसिल, 2020 में बंगलूरू कोर्ट और साल 2022 में मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे डॉक्टर का इस्तेमाल नहीं कर सकते। सुनीता शर्मा ने बताया कि ऐसा करना इंडियन मेडिकल डिग्री एक्ट 1916 का उल्लंघन होगा।
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महानिदेशालय ने भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) को भेजे पत्र में कहा है कि फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल डॉक्टर नहीं हैं। इसलिए उन्हें यह उपाधि इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय चिकित्सा डिग्री अधिनियम 1916 के तहत कोई भी व्यक्ति अगर बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के डॉक्टर की उपाधि इस्तेमाल करता है तो यह अवैध है और उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। महानिदेशालय ने कहा कि फिजियोथेरेपी की नई पाठ्यक्रम पुस्तिका से तुरंत इसे हटाया जाए। इसके बजाय कोई सम्मानजनक लेकिन स्पष्ट उपाधि दी जा सकती है, जिससे मरीजों या आम जनता को भ्रम न हो।
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क्यों शुरू हुआ विवाद?
यह फैसला उस अप्रैल 2025 की अधिसूचना के बाद आया है, जिसमें नेशनल कमीशन फॉर एलाइड ऐंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) ने फिजियोथेरेपिस्टों को अपने नाम के आगे ‘Dr.’ और नाम के बाद ‘PT’ लगाने की अनुमति दी थी।
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इसे लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन सहित कई अन्य संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया।आईएमए की ओर से भी इसके खिलाफ शिकायत की गई।
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अदालतों ने लगाई है रोक
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता शर्मा ने कहा कि कई अदालतों और मेडिकल काउंसिल ने पहले भी इस पर रोक लगाई है। साल 2003 में पटना हाईकोर्ट, 2016 में तमिलनाडु मेडिकल काउंसिल, 2020 में बंगलूरू कोर्ट और साल 2022 में मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे डॉक्टर का इस्तेमाल नहीं कर सकते। सुनीता शर्मा ने बताया कि ऐसा करना इंडियन मेडिकल डिग्री एक्ट 1916 का उल्लंघन होगा।