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Hindi News ›   India News ›   Developed Agriculture Sankalp Abhiyan from May 29 Shivraj Singh Chauhan told how farmers can avail benefits

Shivraj Singh Chauhan: विकसित कृषि संकल्प अभियान 29 मई से, शिवराज ने बताया किसान घर बैठे कैसे उठा सकेंगे फायदा

Mon, 19 May 2025 02:53 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 19 May 2025 02:53 PM IST
सार

शिवराज सिंह ने कहा कि पिछले दिनों हमने खरीफ कॉन्फ्रेंस की थी। जिसमें कई राज्यों के कृषि मंत्री आए थे और हमने तय किया कि इस साल खरीफ की फसल के लिए हम विकसित कृषि संकल्प अभियान चलाएंगे।

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Developed Agriculture Sankalp Abhiyan from May 29 Shivraj Singh Chauhan told how farmers can avail benefits
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान। - फोटो : एक्स

विस्तार

केंद्रीय कृषि मंत्रालय देशभर में 29 मई से विकसित कृषि संकल्प अभियान शुरू करने जा रहा है।  इस अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के निर्माण का अभियान चल रहा है और विकसित भारत के लिए विकसित कृषि, विकसित खेती और समृद्ध किसान जरूरी है। आज भी कृषि, भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लगभग आधी आबादी के रोजगार का साधन है और इससे भी आगे बढ़कर देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है।

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कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय का उद्देश्य देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लगभग 145 करोड़ की आबादी वाले हमारे देश में सबको भरपूर खाद्यान मिले सब्जियां व फल की उपलब्धता भी हों, किसानों की आजीविका ठीक चले, मतलब कृषि फायदे का धंधा बने और खाद्यान तो मिले लेकिन पोषणयुक्त हो, उसका प्रयत्न करना और हमारे प्राकृतिक संसाधन हैं, उनका संरक्षण करना, उनका ऐसा उपयोग करना कि वो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खाद्यान, फल-सब्जियां उत्पन्न करते रहें।
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छह सूत्रीय रणनीति पर काम कर रहा मंत्रालय
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए हमारी छह सूत्रीय रणनीति है- एक उत्पादन बढ़ाना, दूसरा- उत्पादन लागत घटाना, तीसरा- उत्पादन के ठीक दाम देना, चौथा- प्रकृतिक आपदाओं में नुकसान हो जाएं तो भरपाई करना पांचवां- कृषि का विविधीकरण, उसके साथ-साथ वैल्यू एडिशन, फूड प्रोसेसिंग बाकी सारी चीजें और एक बहुत महत्वपूर्ण काम है- प्राकृतिक खेती, जैविक खेती बढ़ाने की दिशा में सोचना है।
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कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने उत्पादन बढ़ने के बारे में कहा कि ओवरऑल देंखे तो खरीफ चावल 1206.79 लाख मीट्रिक टन, गेहूं 1154.30 लाख मीट्रिक टन, खरीफ मक्का 248.11 लाख मीट्रिक टन, मूंगफली 104.26 लाख मीट्रिक टन और सोयाबीन 151.32 लाख मीट्रिक टन, इस साल का ये उत्पादन है ऑल टाइम हाई एक रिकॉर्ड है। हमारा उत्पादन बढ़ रहा है, इसलिए अन्न के भंडार भरे हैं, लेकिन हम यहां रूकना नहीं चाहते, हम अपने देश की जरूरत पूरी करेंगे और भारत चूंकि विश्वबंधु भी है तो कई देशों को भी मदद करेंगे। हमारा सपना और संकल्प एक दिन भारत को फूड बास्केट आफ वर्ल्ड बनाना है, इसलिए हम लोगों ने तय किया है कि खरीफ फसल के लिए हम सारे संस्थानों को, जो कृषि उत्पादन बढ़ाने व लागत घटाने के लिए काम कर रहे हैं, उन सभी को एक साथ लाकर एक दिशा में ले जाएं। अब आईसीएआर के 113 संस्थान हैं, जिनमें इस अभियान के माध्यम से बेहतर कॉर्डिनेशन होगा। राज्य सरकार अपने प्रयत्न करती है, केंद्र सरकार की अपनी योजनाएं है, यूनिवर्सिटी अपना काम करती है, हमने तय किया-इन सभी को जोड़कर एक दिशा में ले चलना है।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि 2023-24 में टोटल फूड ग्रेन का उत्पादन खरीफ में 1557.68 लाख टन था, जो 2025-25 में 1663.91 लाख टन हो गया, वहीं रबी का हमारा उत्पादन 2023-24 में 1600.06 लाख टन था, जो अब 1645.27 लाख टन हो गया है। कुल मिलाकर, फूड ग्रेन उत्पादन एक साल में 3157.74 से बढ़कर 3309.18 लाख टन हो गया है। अगर दालें भी इसमें जोड़ दी जाएं तो दालों का जो टोटल है, वो भी 221.71 से बढ़कर 230.22 लाख टन हो गया और ऑइल सीड्स भी इसमें जोड़े जाएं, तो तिलहनी फसलें वो भी 384 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 416 लाख मीट्रिक टन हो गई है।

हर गांव में इन बिंदुओं पर फोकस करेगी टीम
शिवराज सिंह ने कहा कि पिछले दिनों हमने खरीफ कॉन्फ्रेंस की थी। जिसमें कई राज्यों के कृषि मंत्री आए थे और हमने तय किया कि इस साल खरीफ की फसल के लिए हम विकसित कृषि संकल्प अभियान चलाएंगे। अभी लगभग 16 हजार वैज्ञानिक रिसर्च के काम में लगे हुए हैं, लेकिन वर्तमान स्थितियों के अनुसार किसानों के लिए इसकी उपयोगिता प्रतिपादित होना चाहिए, इसलिए हमने तय किया कि डिमांड पर भी रिसर्च होना चाहिए। हमने इस अभियान की रूपरेखा बनाई, जिसमें वैज्ञानिकों की 2170 टीमें बनाई जा रही हैं, इन टीमों में कम से कम 4 साइंटिस्ट हरेक टीम में होंगे, इनके साथ एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को भी जोड़ेंगे। यूनिवर्सिटी, कॉलेज, राज्य सरकार का अमला, केंद्र की कृषि विभाग की टीम, प्रगतिशील किसान, FPO's आदि, ये सब मिलकर टीम के रूप में जिलों में जाएंगे और गांवों में पहुंचकर वहां आसपास के गांवों से भी किसानों को एकत्र कर 29 मई से 12 जून तक रोज सुबह-शाम व दोपहर के भोजन के समय भी किसानों से संवाद करेंगे।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने बताया कि जिस जगह पर टीमें जाएंगी, वहां की एग्रो क्लाईमेटिक कंडीशन क्या है, वहां मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्व हैं, किन की कमी है, पानी कितना है, वर्षा कितनी होती है, जलवायु कैसी है, सॉइल हेल्थ कार्ड बना है, लेकिन यदि किसान उसका उपयोग नहीं कर रहे तो सॉइल हेल्थ कार्ड में जो मिट्टी में तत्व हैं जिनकी कमी है उसके आधार पर यहां कौन-से बीज किस फसल के अच्छे रहेंगे, कौन-सी फसल ठीक होगी, वो किसानों को बताया जाएगा, किस पद्धति से बोवनी की जाएं ये भी टीम बताएगी, कौन-सा खाद कितनी मात्रा में डाला जाए, ये भी बताएंगे। कई बार जिस चीज की जरूरत नहीं है, वो भी किसान डालते रहते हैं, डीएपी, यूरिया जितनी जरूरत है, उससे ज्यादा हो जाता है तो खर्च बढ़ता है व मिट्टी का स्वास्थ्य भी खराब होता है, तो सारे वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर किसानों को जानकारी देंगे, ये संवाद के रूप में होगा।


किसान पूछेंगे सवाल
शिवराज सिंह ने बताया कि किसान टीमों से सवाल पूछेंगे और समस्याएं भी बताएंगे और किसान जो बताएंगे, उसके आधार पर हम रिसर्च की दिशा भी तय करेंगे कि क्षेत्र के किसानों की ये समस्या है, ये दिक्कत आ रही है, इन कीटों का प्रकोप होता है तो उससे बचने के लिए क्या करें। ये अभिनव, महत्वपूर्ण, रचनात्मक अभियान है, इसमें किसान व विज्ञान दोनों जुड़ेंगे। 731 कृषि विज्ञान केंद्रों व ICAR के 113 संस्थानों के वैज्ञानिक-विशेषज्ञ सक्रिय रूप से भाग लेंगे। अभियान 723 जिलों में चलाया जाएगा। प्रत्येक जिले के लिए 3 टीमों का गठन किया गया है, जिसमें कृषि, बागवानी, पशुपालन, मछली पालन आदि विभागों के अधिकारी, वैज्ञानिक एवं नवोन्मेषी किसान भी शामिल हैं। 2,170 टीमें 65 हजार से अधिक गांवों में किसानों से सीधा संवाद करेगी। अभियान में 1.30 करोड़ से अधिक किसानों से सीधा संवाद होगा, जो देश में कृषि नवाचार और जागरूकता को नई दिशा देगा।

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