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'कांग्रेस-भाजपा-आप' के चुनाव प्रचार में जासूसों की भरमार, करा रहे एक दूसरे की जासूसी

Sat, 04 May 2019 10:32 PM IST
Gaurav Pandey जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Sat, 04 May 2019 10:32 PM IST
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Detectives in rallies of BJP Congress and BJP in Lok Sabha Election

दिल्ली के दंगल में कांग्रेस, भाजपा और आप ने पूरी ताकत झोंक दी है। तीनों पार्टियों ने एक-दूसरे की कमी या आचार संहिता उल्लंघन जैसा कुछ ढूंढना शुरू कर दिया है। इसके लिए खासतौर पर जासूसों की एक फौज तैयार की गई है। हाथ में मोबाइल और सिर पर संबंधित पार्टी की टोपी पहने ये जासूस किसी भी दल के रोड शो, डोर टू डोर कैंपेन, जनसभा और यहां तक कि पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठकों में भी घुसपैठ कर जाते हैं। दिनभर में इन जासूसों को जो भी फोटो या वीडियो बनता है, उन्हें शाम को पार्टी दफ्तर में आकर दे देते हैं। जासूसों को एक दिन का हजार रुपये मेहनताना मिलता है।

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बता दें कि दिल्ली में इस तरह की जासूसी का खेल सबसे पहले आम आदमी पार्टी ने शुरू किया था। जब पहली बार आप ने विधानसभा चुनाव लड़ा तो दूसरे दलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पांच सौ से ज्यादा कैमरे और मोबाइल फोन खरीदकर अपने कार्यकर्ताओं को दे दिए थे। अब वही खेल लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिल रहा है। फर्क केवल इतना आया है कि पहले यह जासूसी केवल आप करती थी, अब उन्हें देखकर कांग्रेस और भाजपा वाले भी सचेत हो गए हैं। उन्होंने भी अपने जासूसों को आप के पीछे लगा दिया है।

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अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की दी जाती है जिम्मेदारी

Detectives in rallies of BJP Congress and BJP in Lok Sabha Election

इन जासूसों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है। कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें सुबह नेताओं का प्रचार कार्यक्रम थमा दिया जाता है। रोहिणी के मलकीत सिंह, जिन्हें एक पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के रोड शो को कवर करने की जिम्मेदारी सौंपी है, वे बताते हैं, हमें देखना होता कि कोई पार्टी आचार संहिता का उल्लंघन तो नहीं कर रही है। हालांकि हमें चुनाव आचार संहिता के बारे में ज्यादा कुछ नहीं मालूम, लेकिन पार्टी वाले चार-पांच बातें बता देते हैं, बस हमें उन्हीं पर नजर रखनी पड़ती है। 

इसी तरह प्रीत विहार निवासी करण भी भाजपा की जासूसी में लगे हैं। इनका कहना है, हमें जिन नेताओं की सूची थमाई जाती है, हम उनके समूह में शामिल हो जाते हैं। कई बार इसमें दिक्कत भी आती है। वो तब, जब हम प्रत्याशी के निकट जाने या उनकी गाड़ियों में तांक-झांक करने का प्रयास करते हैं। पकड़े जाने पर हमसे पूछताछ होती है। कई बार तलाशी की प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। हम यही कहते हैं कि हमारा किसी पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। जैसे और लोग आपके साथ चल रहे हैं, वैसे ही हम भी देख रहे हैं। दूसरे लोग भी वीडियो बनाते हैं तो हम भी बना रहे हैं। इस तरह की बहसबाजी होना आम बात है।

इस तरह होता है जासूसों द्वारा एकत्रित सामग्री का इस्तेमाल

Detectives in rallies of BJP Congress and BJP in Lok Sabha Election

अभी आपको ध्यान होगा कि अमित शाह की रैली में खाली कुर्सियों का एक वीडियो आम आदमी पार्टी ने जमकर चलाया था। उसे सोशल मीडिया पर भी डाल दिया गया। इसी तरह मनोज तिवारी के साथ सपना चौधरी के वीडियो भी शेयर किए गए। भाजपा ने केजरीवाल के शुक्रवार को उत्तर पूर्वी दिल्ली के गुर्जर चौक से लेकर कौशिक चौक, रहमान चौक, यमुना विहार डिपो, घोंडा चौक और बुलंद मस्जिद तक हुए रोड शो के कई वीडियो शेयर कर दिए। कहा गया कि इनमें भीड़ कम है। बाहर से लोग लाए गए हैं। 

इससे पहले एक और इलाके का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कहा गया कि आप संयोजक ने अपना रोड शो इसलिए रद्द कर दिया, क्योंकि वहां भीड़ नहीं जुट पाई। तीन-चार दिन पहले जब अमित शाह की जनसभा हुई थी तो आप ने बसों के फोटो वायरल कर दिए थे। कहा गया कि भाड़े पर बाहर से लोगों को लाया गया है। दक्षिणी दिल्ली के भाजपा उम्मीदवार रमेश बिधूडी के तीन मई के कटवारिया सराय चौपाल और वसंत कुंज के वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिए गए। इसमें दिखाया गया कि आम लोग वहां से नदारद हैं।

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इन बातों पर रहता है जासूसों का फोकस

Detectives in rallies of BJP Congress and BJP in Lok Sabha Election
  • कोई रुपया-पैसा या शराब तो नहीं बांट रहा है
  • डोर टू डोर में प्रत्याशी के पीछे चलने वाले लोग राशन के पैकेट तो नहीं दे रहे
  • प्रत्याशी के साथ कितनी गाड़ियां हैं, उनमें क्या रखा है
  • उम्मीदवार के समर्थक किसी वोटर को कोई दूसरा फायदा देने की बात कह रहे हैं 
  • भाड़े के कितने कार्यकर्ता हैं, हो सके तो उनसे बातचीत का वीडियो भी 
  • खाली कुर्सियां कितनी हैं और रोड शो या जनसभा में बाहरी लोग कितने हैं 
  • संबंधित पार्टी के कार्यकर्ताओं की खुसर-पुसर 
  • खाने पीने के पैकेट पर किसका निशान है, इसका फोटो खींचना करना पड़ता है 
  • अगर प्रत्याशी के साथ उनके परिजन होते हैं तो उन पर नजर रखना
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