हर हाथ में मोबाइल, हर आदमी पत्रकार... अब नहीं चलेगा यह
- कोई आपत्तिजनक मैसेज आया और फॉरवर्ड किया तो समझो गए जेल
- सोशल मीडिया के लिए बनाई गई गाइडलाइन्स पर लोगों ने जताई खुशी
- कहा- बेलगाम हो चुकी सोशल मीडिया पर अंकुश लगाना जरूरी था
विस्तार
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल ने ओटीटी पर रिलीज हुई मिर्जापुर वेब सीरीज पर जबरदस्त आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रधानमंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री से शिकायत की थी कि मिर्जापुर वेब सीरीज में उनके लोकसभा क्षेत्र मिर्जापुर को हिंसक बताकर बदनाम किया जा रहा है। अब ओटीटी समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बहुत सजग रहना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लगाम के लिए बनाई गई गाइडलाइंस और उसके बाद में उसके बनने वाले कानून से बेलगाम हो चुकी सोशल मीडिया पर बहुत अंकुश लगेगा। यही नहीं 'हर हाथ में मोबाइल हर आदमी पत्रकार' जैसे चलन पर भी सोशल मीडिया के बनाए गए नए नियमों से अंकुश लगेगा। क्योंकि ऐसे लोग ही ज्यादातर समाज में माहौल खराब करते हैं।
हर हाथ में मोबाइल, हर आदमी पत्रकार
आईटी विशेषज्ञ दीनबंधु वर्मा कहते हैं कि हर आदमी के हाथ में अपना मोबाइल है और हर आदमी पत्रकार है। जिसके मन में जो आता है जैसा आता है वह पूरा कंटेंट परोस कर रख देता है। लेकिन सोशल मीडिया को कंट्रोल करने के लिए बनने वाले नए कानून से हर आदमी जो मनचाही सही गलत सूचना प्रेषित करता है उन पर न सिर्फ अंकुश लगेगा बल्कि ऐसे लोगों में डर और भय बनेगा जो माहौल को खराब करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं। वर्मा कहते हैं कि नए कानून से सोशल मीडिया संचालित करने वालों और माइक्रोब्लॉगिंग कंपनियों की मनमानी पर भी अंकुश लग सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक सोशल मीडिया कंपनियां अपनी मनमर्जी से बहुत कुछ प्राइवेसी के नाम पर छिपा लेती थी। अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सोशल मीडिया को कंट्रोल करने के लिए बनाई गई गाइडलाइंस और फिर कानून का कड़ाई से पालन करने पर बहुत हद तक बेवजह पैदा होने वाले तनाव पर अंकुश लग सकेगा। उन्होंने बताया कि बीते डेढ़ साल में अगर आंकड़ों पर गौर करें तो पाएंगे कि दिल्ली में ज्यादातर हुए बवाल में मोबाइल से फैलाई गई अफवाहें ही थीं जिनसे माहौल खराब हुआ। दिल्ली दंगे से लेकर जेएनयू का विवाद हो या पुलिस वकीलों के विवाद से लेकर सीएए और एनआरसी को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन का मामला। सोशल मीडिया ने हर जगह माहौल खराब किया।
सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले लोगों से ज्यादा सोशल मीडिया संचालित करने वाली कंपनियां और ओटीटी समेत न्यूज वेब पोर्टल पर गाइडलाइंस और बनने वाला कानून लागू होगा। भारतवर्ष में अब तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से सूचनाएं संप्रेषित करने वाले कितने आधिकारिक न्यूज पोर्टल है इसकी जानकारी ही नहीं है। नतीजतन किसी भी सूचना को किसी भी हैंडल या प्लेटफार्म से प्रसारित करने पर अधिसंख्य लोग या तो उसको सच मान लेते हैं या माहौल खराब करने के लिए उस सूचना को आगे प्रेषित कर देते हैं। भारतीय जनता पार्टी के सांसद और दिल्ली प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी कहते हैं इस गाइडलाइन और फिर उसके बनने वाले कानून से बहुत लाभ होने वाला है। माहौल खराब करने के लिए तैयार किए जाने वाले कंटेंट को आखिर किसने सबसे पहले बनाया यह जानना बहुत जरूरी होगा। अब सोशल मीडिया संचालित करने वाली कंपनियां इसके लिए बाध्य होंगी और देश में ऐसे फेक कंटेंट से माहौल खराब करने वाली घटनाओं और उसके अप्रिय परिणामों से हम सचेत हो जाएंगे।
अखिल भारतीय सनातन समाज के संयोजक पंडित प्रदीप तिवारी कहते कि ओटीटी पर जिस तरीके से नग्नता और हिंसा परोसी जा रही थी उसके लिए एक मॉनीटरिंग संस्था का होना बेहद जरूरी था। प्रदीप तिवारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया संचालित करने वाली और माइक्रो ब्लॉगिंग कंपनियों पर अंकुश लगाने के लिए यह फैसला बेहद अहम है। ओटीटी पर रिलीज हुई आश्रम फिल्म में अहम किरदार निभाने वाले फिल्म स्टार संदीप यादव का मानना है एज कैटेगरी होने से निश्चित तौर पर दर्शकों को हम पहले से ही फिल्म के बारे में बता सकेंगे। संदीप का मानना है कि किसी भी चीज को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए रेगुलेशन निश्चित तौर पर बहुत जरूरी है।