चीन ने लगाया अड़ंगा, लेकिन भारतीय सेना ने बना डाला गलवां घाटी में महत्वपूर्ण ब्रिज
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भारत और चीन के बीच पिछले कुछ समय से जिस पुल के निर्माण को लेकर मतभेद बढ़ा था और जिसकी वजह से सोमवार को दोनों देशों की सेना के बीच खूनी झड़प हुई, उस महत्वपूर्ण पुल को भारतीय सेना के इंजीनियरों ने बृहस्पतिवार को पूरा कर लिया है।
सामरिक दृष्टि से भारत और भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण इस चार खंभे और 60 मीटर वाले पुल के बनने से अब भारत कई मायनों में एलएसी में चीन के खिलाफ मजबूत और बेहतर स्थिति में पहुंच जाएगा। गलवां-श्योक नदी के संगम के पूर्वी दिशा में तीन किलोमीटर दूर और पेट्रोलिंग पॉइंट-14 से दो किलोमीटर पीछे बने इस बेली ब्रिज ने भारत को इस स्थान पर मजबूती देने का काम किया है।
भारतीय सेना के फॉर्मेशन इंजीनियर द्वारा बनाए गए इस पुल के निर्माण कार्य को रोकने के लिए चीनी सेना (पीएलए) लगातार प्रयास कर रही थी और पिछले कुछ दिनों में इस इलाके में बढ़े तनाव का मुख्य कारण भी यही पुल था। यही वजह थी पीएलए ने पूरी गलवां घाटी पर ही अपना दावा ठोक दिया था। हालांकि चीनी सेना के तमाम रुकावटों के बावजूद भारत की तरफ से निर्माण कार्य को रोका नहीं गया और कम समय में इसे बनाकर तैयार कर लिया गया।
भारत के लिए महत्वपूर्ण
इस पुल के बनने के बाद भारतीय पैदल सेना (इन्फेंट्री) को ठंडी पहाड़ी नदी को पार करने में जहां आसानी होगी वहीं ये इस संवेदनशील क्षेत्र में भारत की पकड़ को भी मजबूत करेगा। इसके अलावा लेह के दरबुक से दौलत बेग ओल्डी (काराकोरम दर्रा के ठीक दक्षिण में स्थित अहम मिलिट्री बेस) तक बन रहे 255 किलोमीटर की रणनीतिक सड़क की रक्षा भी करेगा।
इस पुल की अहमियत को इसी से समझा जा सकता है कि एलएसी से करीब 7-8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भारतीय सेना के बेस कैंप (120 किलोमीटर कैंप) से सीमा पर पहुंचने में आसानी होगी और साथ ही इस इलाके में भारत की तरफ से तेजी से निर्माण कार्य किए जा सकेंगे।
भारतीय सेना के अधिकारियों ने एक अंग्रेजी अखबार से बताया कि चाहे कैसी भी परिस्थिति हो, वे अपने इलाके में निर्माण कार्य आगे भी तेजी से जारी रखेंगे।
गौरतलब है कि इसी हफ्ते सोमवार (15 जून, 2020) की रात को पैट्रोलिंग पॉइंट-14 के पास ही चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर पत्थर, कंटीली तारों और लोहे के रॉड से हमला कर दिया था, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे और कई बुरी तरह घायल हुए थे। वहीं चीन की तरफ से अनाधिकारिक तौर पर 43 जवानों की मौत हुई थी।