नोटबंदी के फैसले पर किसानों के बीच नाराजगी से सरकार चिंता में
जेटली से उन्होंने किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी का प्रवाह बढ़ाने का आग्रह किया है। तो नकदी की कमी के वजह से किसानों के सामने आ रही प्रमुख समस्याओं से वित्त मंत्री को अवगत कराया है।
सूत्र बताते हैं कि शुक्रवार को बालियान ने नकदी की कमी की वजह से किसानों के सामने आ रही मुश्किलों को लेकर संसद भवन में जेटली से मुलाकात की। बालियान ने वित्त मंत्री को अवगत कराया है कि गन्ने का बकाया भुगतान न होने की वजह से पश्चिमी यूपी के किसान पहले से ही परेशान हैं। ऊपर से नोटबंदी के कदम से उनके बीच नकदी का संकट पैदा हो गया है।
इसके अलावा गेहूं से आयात शुल्क हटाने के कदम को लेकर भी किसानों के बीच सरकार की छवि का नुकसान हो सकता है। बताया जा रहा है कि गेहूं से आयात शुल्क हटाने के मामले को लेकर संघ के कुछ शीर्ष अधिकारियों ने सरकार के प्रमुख नेताओं से बातचीत भी की है।
मगर अगले दो माह में गेहूं की नई फसल कटकर बाजार में आएगी
मगर चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि बृहस्पतिवार को गेहूं से आयात शुल्क हटाने के फैसले को लेकर जब संघ के अधिकारियों ने मंत्रियों से बातचीत शुरू की तो वित्त मंत्री अरुण जेटली, कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह, उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान से लेकर निर्मला सीतारमन तक ने फैसले की पूरी जानकारी से अनभिज्ञता जताई।
दरअसल गेहूं से आयात शुल्क हटाने के मामले को लेकर संघ के चिंतित होने की मुख्य वजह यह है कि सरकार के इस कदम से गेहूं का उत्पादन करने वाले किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। सरकार ने गेहूं की कमी और आटे के बढ़ते दाम के मद्देनजर बेशक यह फैसला लिया है।
मगर अगले दो माह में गेहूं की नई फसल कटकर बाजार में आएगी। आयात शुल्क हटाने के वजह से अब निजी कंपनियां बाहर से भारी मात्रा में गेहूं आयात कर लेंगी। इससे किसानों को अपने गेहूं का उचित दाम मिलने में कठिनाई हो सकती है।
इसी दौरान यूपी और पंजाब सरीखे गेहूं उत्पादन करने वाले राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। गेहूं के मामले को लेकर किसानों की नाराजगी भाजपा का चुनावी जायका न बिगाड़ दे इसलिए संघ अभी से सरकार के सामने मामले को लेकर मुस्तैद हो गया है।