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नोटबंदी से सुस्त पड़ी रफ्तार, विकास दर में 0.3 फीसदी की कमी

Thu, 02 Feb 2017 06:15 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Feb 2017 06:15 PM IST
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demonetisation plays down gdp growth, will be 0.3 percent down
indian economy - फोटो : Getty Images
नोटबंदी के बाद देश में विकास की रफ्तार काफी सुस्त हो गई थी, जिसके अगले 6 महीने में सुधरने की संभावना है। सरकार द्वारा 31 जनवरी को संसद में पेश आर्थिक सर्वे में यह बात सामने आई है।
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जीडीपी दर को किया 7.6 फीसदी

सर्वे में जीडीपी दर को 7.9 फीसदी से घटाकर के 7.6 फीसदी कर दिया गया है। केंद्र सरकार के सांख्यिकी विभाग ने पिछले महीने दावा किया था कि इस वित्त वर्ष में विकास दर  7.1 फीसदी रहेगी, जबकि इसको पहले 7.6 फीसदी रखा गया था। हालांकि इस गिरावट का मुख्य कारण औद्योगिक विकास को माना गया है न कि नोटबंदी को। 
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विकास दर में होगी 25-50 बेसिस पाइंट की कमी

आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि इस वित्त वर्ष में नोटबंदी के कारण जीडीपी की विकास दर में 25-50 बेसिस पाइंट की कमी होगी। अगले वित्त वर्ष के लिए सर्व में विकास दर के 6.75 फीसदी से 7.5 फिसदी रहने की संभावना जताई गई है। 
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इसलिए किया गया है जीडीपी दर में बदलाव

2015-16 के जीडीपी में इसलिए बदलाव किया गया था क्योंकि साल के शुरूआत में औद्योगिक और सर्विस सेक्टर में विकास की रफ्तार अनुमान से काफी तेज रही थी। औद्योगिक सेक्टर में विकास का अनुमान 7.4 फीसदी रखा गया था, लेकिन यह 8.2 फीसदी की रफ्तार से बढ़ गई। इसी तरह सर्विस सेक्टर का अनुमान भी 8.9 फीसदी रखा गया था, जिसमें 1 फीसदी की वृद्धि देखी गई। 

विकास दर के लिए कच्चे तेल और कृषि पर रखनी होगी नजर

आम बजट से एक दिन पहले पेश की गई समीक्षा में कहा गया है कि नोटबंदी के बाद आने वाले कुछ समय में जीएसटी के अमल और दूसरे संरचनात्मक सुधारों से अर्थव्यवस्था को इसकी क्षमता के मुताबिक आठ से दस फीसदी के तेज विकास के स्तर पर पहुंचाया जा सकेगा। समीक्षा में सरकार को महंगाई के मुद्दे पर सतर्क करते हुए कहा गया है कि उसे दाल के अलावा दूसरे कृषि उत्पादों पर भी नजर रखनी चाहिए। पिछले साल दाल के दाम काफी बढ़ गए थे, ऐसा ही दूसरे कृषि उत्पादों के मामले में नहीं हो इस पर नजर रखनी होगी। इसमें कहा गया है कि मुद्रा की तंगी से दूसरे कृषि उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।


आर्थिक समीक्षा में दुनिया के बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के खतरे की तरफ भी इशारा किया गया है। इसके अलावा प्रमुख देशों के बीच व्यापार क्षेत्र में तनाव पैदा होने के बारे में भी सरकार का ध्यान खींचा गया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियम की ओर से तैयार की गई आर्थिक समीक्षा में दावा किया गया है कि नएनोटों के जरूरत के मुताबिक अर्थव्यवस्था में आने के बाद आर्थिक विकास की रफ्तार सामान्य हो जाएगी।
 
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