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लोकसभा में बिना चर्चा पारित होंगी अनुदान मांगें, मोदी सरकार लाएगी 'गिलोटिन'
Fri, 06 Mar 2020 09:56 PM IST
अमित कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित कुमार
Updated Fri, 06 Mar 2020 09:56 PM IST
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नरेंद्र मोदी-अमित शाह (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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दिल्ली में हुई हिंसा के मद्देनजर संसद के दोनों सदनों में जारी हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने 'गिलोटिन' लाने का फैसला किया है। इसके तहत अब विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों को बिना चर्चा के ही पारित करा लिया जाएगा।
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गिलोटिन के बाद सरकार बिना किसी चर्चा के ही अनुदान मांगों को पारित करा सकती है। कांग्रेस के सात सांसदों के निलंबन के बाद सरकार और विपक्ष के बीच तल्खी बढ़ने के कारण सदन की कार्यवाही चलने के आसार कम हो गए हैं।
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सरकार के एक मंत्री के मुताबिक दिल्ली हिंसा पर विपक्ष के साथ बढ़ी खींचतान के बाद बजट सत्र के दूसरे चरण में सरकार की योजना पर पानी फिर गया है। विपक्ष के साथ तकरार घटने के बदले और बढ़ गई है। चूंकि विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों और दो अध्यादेशों को मंजूरी दिलाना जरूरी है और सरकार के पास समय कम है।
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इसलिए सरकार ने 16 मार्च को लोकसभा में गिलोटिन लाने का फैसला किया है। इसके बाद सरकार अनुदान मांगों, अध्यादेशों और बिलों को हंगामे के बीच ही सदन की मंजूरी ले लेगी। अनुदान मांगों की मंजूरी के लिए सरकार सीधे मतदान (ध्वनि मत) का सहारा लेगी।
क्या होता है गिलोटिन
बजट सत्र के दौरान मंत्रालयों की अनुदान मांगों को बिना चर्चा के ही पारित कराने की प्रक्रिया को 'गिलोटिन' कहा जाता है। जिन मांगों पर चर्चा नहीं हो पाती है, उस पर वोटिंग कराकर पारित कर दिया जाता है। इसे ही 'गिलोटिन' कहा जाता है।
कार्यवाही चलने के आसार कम
दिल्ली हिंसा पर सरकार और विपक्ष के बीच जारी तनातनी पर बीच का रास्ता निकलने की उम्मीद फिलहाल नजर नहीं आ रही है। हालांकि सरकार ने 11 मार्च को इस मुद्दे पर चर्चा का प्रस्ताव दिया है, मगर विपक्ष की ओर से इस पर अब तक सकारात्मक रुख नहीं दिखाया गया है। अगर विपक्ष राजी भी हुआ तो इस पर चर्चा लंबी खिंचेगी। फिर विभिन्न मंत्रालयों के अनुदान मांगों पर बारी बारी से चर्चा कराने का सरकार के पास समय नहीं होगा।
राज्यसभा में दिखेगी खींचतान
सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि अनुदान मांगों पर असली खींचतान राज्यसभा में देखने को मिलेगी। हालांकि सरकार के पास उच्च सदन में अनुदान मांगों को मंजूरी दिलाने के लिए दो हफ्ते का लंबा वक्त होगा। ऐसे में सरकार उच्च सदन को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं है।
हर मुद्दे पर आक्रामक रहेगी सरकार
चाहे सांसदों के निलंबन का मामला हो या फिर दिल्ली हिंसा का, सरकार किसी भी मुद्दे पर विपक्ष के सामने रक्षात्मक रणनीति नहीं अपनाएगी। जाहिर तौर पर इससे संसद में सरकार और विपक्ष के बीच खींचतान घटने के बदले और बढ़ेगी।