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Waqf Bill: जेपीसी अध्यक्ष से मिला AIMPLB का प्रतिनिधिमंडल, वक्फ संशोधन विधेयक को तुरंत वापस लेने की मांग
Fri, 23 Aug 2024 11:05 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 23 Aug 2024 11:05 PM IST
सार
वक्फ संशोधन विधेयक पर सुझाव के लिए बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष जगदंबिका पाल से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने की है।
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वक्फ संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को वक्फ संशोधन विधेयक पर सुझाव के लिए बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष जगदंबिका पाल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने विधेयक को असांविधानिक और धर्मनिरपेक्षता की भावना के खिलाफ बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। इस पर जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने प्रतिनिधिमंडल को विधेयक पर मुस्लिम पक्ष से जुड़े सभी संगठनों की राय लेने का आश्वासन दिया।
ये धार्मिक मामले में हस्तक्षेप- मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद फजुलुर्रहमान मुजद्दिदी की अगुवाई वाले प्रतिनिधिमंडल ने जेपीसी के अध्यक्ष से विधेयक के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई और इसे धार्मिक मामले में हस्तक्षेप करार दिया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा है कि वक्फ काउंसिल में गैरमुस्लिमों का प्रतिनिधित्व और जिलाधिकारी को मिले असीमित अधिकार को किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिस प्रकार गुरुद्वारों, मठों और धार्मिक प्रबंधकों में दूसरे धर्म के व्यक्ति को जगह नहीं दी जाती, वैसा ही प्रावधान वक्फ के लिए किया जाना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने आशंका जताई कि विधेयक के कानून बनने के बाद मस्जिदों, कब्रिस्तानों, दरगाहों पर कब्जे की राह आसान हो जाएगी।
सभी की राय लेगी जेपीसी- जगदंबिका पाल
जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि जेपीसी इस मामले में मुसलमानों के सभी अहम संगठनों, शख्सियतों की राय लेगी। प्रतिनिधिमंडल में बोर्ड के कानूनी समिति के दो सदस्य सीनियर वकील एम. आर शमशाद, अधिवक्ता फजील अहमद अयूबी, बोर्ड के अन्य सदस्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री के रहमान खान, मौलाना अबू तालिब रहमानी, मौलाना मतिउर रहमान मदनी और कार्यालय सचिव डॉ. मुहम्मद वकारुद्दीन लतीफी के अलावा डॉ. खालिद अनवर शामिल थे।
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संयुक्त संसदीय समिति में कुल 31 सदस्य
भाजपा सदस्य जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय समिति को लोकसभा से विवादास्पद विधेयक की जांच करने का काम सौंपा गया है। विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने इस पर विरोध जताया है। यह विधेयक भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की पहली बड़ी पहल है जिसका उद्देश्य एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की प्रक्रिया में सुधार करना है। इसमें कई सुधारों का प्रस्ताव है, जिसमें राज्य वक्फ बोर्डों के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिम प्रतिनिधियों को प्रतिनिधित्व देने वाली एक केंद्रीय वक्फ परिषद की स्थापना भी शामिल है।
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ये धार्मिक मामले में हस्तक्षेप- मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद फजुलुर्रहमान मुजद्दिदी की अगुवाई वाले प्रतिनिधिमंडल ने जेपीसी के अध्यक्ष से विधेयक के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई और इसे धार्मिक मामले में हस्तक्षेप करार दिया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा है कि वक्फ काउंसिल में गैरमुस्लिमों का प्रतिनिधित्व और जिलाधिकारी को मिले असीमित अधिकार को किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिस प्रकार गुरुद्वारों, मठों और धार्मिक प्रबंधकों में दूसरे धर्म के व्यक्ति को जगह नहीं दी जाती, वैसा ही प्रावधान वक्फ के लिए किया जाना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने आशंका जताई कि विधेयक के कानून बनने के बाद मस्जिदों, कब्रिस्तानों, दरगाहों पर कब्जे की राह आसान हो जाएगी।
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सभी की राय लेगी जेपीसी- जगदंबिका पाल
जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि जेपीसी इस मामले में मुसलमानों के सभी अहम संगठनों, शख्सियतों की राय लेगी। प्रतिनिधिमंडल में बोर्ड के कानूनी समिति के दो सदस्य सीनियर वकील एम. आर शमशाद, अधिवक्ता फजील अहमद अयूबी, बोर्ड के अन्य सदस्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री के रहमान खान, मौलाना अबू तालिब रहमानी, मौलाना मतिउर रहमान मदनी और कार्यालय सचिव डॉ. मुहम्मद वकारुद्दीन लतीफी के अलावा डॉ. खालिद अनवर शामिल थे।
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संयुक्त संसदीय समिति में कुल 31 सदस्य
भाजपा सदस्य जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय समिति को लोकसभा से विवादास्पद विधेयक की जांच करने का काम सौंपा गया है। विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने इस पर विरोध जताया है। यह विधेयक भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की पहली बड़ी पहल है जिसका उद्देश्य एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की प्रक्रिया में सुधार करना है। इसमें कई सुधारों का प्रस्ताव है, जिसमें राज्य वक्फ बोर्डों के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिम प्रतिनिधियों को प्रतिनिधित्व देने वाली एक केंद्रीय वक्फ परिषद की स्थापना भी शामिल है।
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