ASI: संसद में सांस्कृतिक विरासत दस्ता स्थापित करने की मांग, चोरी हुए एंटीक्स की बरामदगी होगा उद्देश्य
राज्यसभा सचिवालय ने एक अधिकारिक बयान में बताया कि इटली, कनाडा, नीदरलैंड, अमेरिका, स्कॉटलैंड, स्पेन और फ्रांस सहित अन्य देशों ने सांस्कृतिक विरासत दस्ते की स्थापना की है। इसका उद्देश्य चोरी की गई वस्तुओं को ट्रैक करना और पुनर्प्राप्ति है।
विस्तार
संसद में एक स्थायी संसदीय समिति ने समर्पित सांस्कृतिक विरासत दस्ता स्थापित करने की मांग की है। इसका उद्देश्य चोरी हुए पुरावशेषों की बरामदगी होगा। समिति का कहना है कि अन्य देशों की तरह दस्ते में अधिकारी शामिल होंगे, जिन्हें पुनर्प्राप्ति के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। सोमवार को संसद के दोनों सदनों में परिवहन, पर्यटन और संस्कृति विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने यह सिफारिश की है।
इन देशों में भी है समिति
समिति का कहना है कि दस्ते में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों को शामिल किया जाए। विदेश मंत्रालय के अधिकारी दूसरे देशों की सरकारों के साथ समन्वय के लिए काम करेंगे। वहीं, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी पुरातत्व महत्व की जानकारी देंगे। राज्यसभा सचिवालय ने एक अधिकारिक बयान में बताया कि इटली, कनाडा, नीदरलैंड, अमेरिका, स्कॉटलैंड, स्पेन और फ्रांस सहित अन्य देशों ने सांस्कृतिक विरासत दस्ते की स्थापना की है। इसका उद्देश्य चोरी की गई वस्तुओं को ट्रैक करना और पुनर्प्राप्ति है।
कई साइटों का अबतक नहीं हो सका दस्तावेजीकरण
समिति ने कहा कि स्मारक और पुरावशेषों पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमएमए) की स्थापना के बाद से 15 वर्षों में अनुमानित 58 लाख पुरावशेषों में से केवल 16.8 लाथ पुरावशेषों का ही आज की तारीख तक दस्तावेजीकरण हो सका है। एएसआई महानिदेशक ने कहा कि 58 लाख का आंकड़ा केवल एक अनुमान है। भारत में कई और पुरावशेष मौजूद हो सकते हैं। समिति का कहना है कि उन्होंने महसूस किया कि एएसआई के स्वामित्व वाली साइटों का दस्तावेजीकरण पहले ही हो जाना चाहिए था। कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल के चंद्रकेतुगढ़ जैसी एएसआई साइटें कई कलाकृतियों के स्रोत हैं। कलाकृतियां दुनियाभर में अवैध रूप से बेची जाती हैं। संस्कृति मंत्रालय 1961 से अस्तित्व में है। जबकि, एसएसआई मंत्रालय से करीब एक सदी पहले से अस्तित्व में है। दस्तावेजीकरण पर जोर देने की जगह एएसआई खुद की साइट संग्राहलयों में पुरावशेषों का दस्तावेजीकरण नहीं कर सका।