फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Delta Variant Of COVID19 Mutates Into Delta Plus: Government will reduce the interval between two doses of Covishield coronavirus

कोरोना: डेल्टा वैरिएंट ने बढ़ाई चिंता, कोविशील्ड की दो खुराकों के अंतराल को कम करेगी सरकार!

Wed, 16 Jun 2021 03:26 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Wed, 16 Jun 2021 03:26 PM IST
सार

केंद्र सरकार देश में लग रही ऑक्सफोर्ड-ऐस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच अंतराल घटाने पर एक बार फिर से विचार कर रही है। 

विज्ञापन
Delta Variant Of COVID19 Mutates Into Delta Plus: Government will  reduce the interval between two doses of Covishield coronavirus
कोविशील्ड - फोटो : twitter@serum institute

विस्तार

कोरोना महामारी की दूसरी लहर में तबाही मचाने वाले डेल्टा वैरिएंट ने अब नया रूप धारण कर लिया। कोरोना के नए वैरिएंट डेल्टा प्लस ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में केंद्र सरकार देश में लग रही ऑक्सफोर्ड-ऐस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच अंतराल घटाने पर एक बार फिर से विचार कर रही है।

विज्ञापन


 सरकार के राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के कोविड-19 संबंधी कार्यसमूह के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा है कि आंशिक टीकाकरण तथा पूर्ण टीकाकरण की प्रभावशीलता के बारे में सामने आ रहे साक्ष्यों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह मंथन भी चल रहा है कि क्या भारत को कोविड-19 रोधी टीके कोविशील्ड की दोनों खुराकों के बीच अंतराल को घटाकर फिर से चार से आठ हफ्ते कर देना चाहिए।
विज्ञापन


अरोड़ा ने कहा कि कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच अंतराल को 4-6 हफ्ते से बढ़ाकर 12-16 हफ्ते करने का फैसला वैज्ञानिक आधार पर लिया गया था और इस बारे में एनटीएजीआई के सदस्यों के बीच कोई मतभेद नहीं थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोविड-19 और टीकाकरण परिवर्तनशील
उन्होंने कहा, ''कोविड-19 और टीकाकरण परिवर्तनशील हैं। कल को यदि टीका निर्माण तकनीक (वैक्सीन प्लेटफॉर्म) में कहा जाता है कि टीके की खुराकों के बीच अंतराल कम करना लोगों के लिए फायदेमंद है चाहे इससे महज पांच या दस फीसदी ही अधिक लाभ मिल रहा हो तो समिति गुण-दोष के आधार तथा ज्ञान के बूते पर इस बारे में फैसला लेगी। वहीं दूसरी ओर, यदि ऐसा पता चलता है कि वर्तमान फैसला सही है तो हम इसे जारी रखेंगे।''

स्वास्थ्य मंत्रालय के वक्तव्य के मुताबिक, अरोड़ा ने बताया कि टीके की खुराकों के बीच अंतर बढ़ाने का आधार एडेनोवेक्टर टीकों से जुड़े बुनियादी वैज्ञानिक कारण थे। अप्रैल माह के अंतिम हफ्ते में ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग की एजेंसी पब्लिक हैल्थ इंग्लैंड ने आंकड़े जारी कर बताया था कि टीके की खुराक के बीच 12 हफ्ते का अंतराल होने पर इसकी प्रभावशीलता 65 से 88 फीसदी के बीच रहती है।

13 मई को बढ़ाया था दो डोज के बीच अंतराल
अरोड़ा ने कहा कि इसी वजह से वे अल्फा स्वरूप के प्रकोप से बाहर आ सके। वहां टीके की खुराकों के बीच अंतर 12 हफ्ते रखा गया था। हमारा सोचना था कि यह एक अच्छा विचार है और इस बात के बुनियादी वैज्ञानिक कारण भी मौजूद हैं कि अंतराल बढ़ाने पर एडेनोवेक्टर टीके बेहतर परिणाम देते हैं। इसलिए टीके की खुराकों के बीच अंतराल बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते करने का 13 मई को फैसला लिया गया। सरकार ने 13 मई को कहा था कि उसने कोविड-19 कार्यकारी समूह की अनुशंसाओं को स्वीकार करते हुए कोविशील्ड टीके की दो खुराकों के बीच के अंतराल को 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह कर दिया है। 

अरोड़ा ने कहा कि कोविशील्ड टीके की दो खुराकों के बीच अंतराल को बढ़ाने का निर्णय वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर पारदर्शी तरीके से लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में समूह के सदस्यों के बीच कोई मतभेद नहीं था।

12 से घटाकर 8 हफ्ते करने पर हो रहा विचार

अरोड़ा ने बताया कि खुराकों के बीच अंतर बढ़ाने का जब हमने फैसला लिया। उसके दो से तीन दिन बाद ब्रिटेन से खबरें आईं कि एस्ट्राजेनेका टीके की एक खुराक से महज 33 फीसदी बचाव ही होता है, जबकि दो खुराकों से 60 फीसदी तक बचाव होता है। मई माह के मध्य से ही यह विचार विमर्श चल रहा है कि क्या भारत को खुराकों के बीच अंतराल फिर से चार से आठ हफ्ते कर देना चाहिए।

उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ में हुए एक अध्ययन का जिक्र किया, जिसमें आंशिक टीकाकरण की पूर्ण टीकाकरण से तुलना की गई। इस अध्ययन में स्पष्ट रूप से बताया गया कि आंशिक टीकाकरण और पूर्ण टीकाकरण दोनों की प्रभावशीलता 75 फीसदी है। यह अध्ययन अल्फा स्वरूप के संबंध में किया गया था जो पंजाब, उत्तर भारत और दिल्ली में पाया गया था।

अरोड़ा ने बताया कि सीएमसी वेल्लोर में हुए अध्ययन के परिणाम भी इसके समान ही हैं जिसमें बताया गया कि कोविशील्ड के आंशिक टीकाकरण से 61 फीसदी तक बचाव हो सकता है और दो खुराकों से 65 फीसदी तक बचाव होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed