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दिल्ली को लंबे समय तक शीला दीक्षित से अधिक लोकप्रिय कोई व्यक्तित्व नहीं मिल पाएगा: जनार्दन द्विवेदी
Sat, 20 Jul 2019 06:25 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 20 Jul 2019 06:25 PM IST
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शीला दीक्षित
- फोटो : PTI
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शीला दीक्षित, एक ऐसी शख्सियत रही हैं, जिन्होंने बतौर मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि एक खुशनुमा और लोकप्रिय नेता की हैसियत से लोगों के दिलों पर राज किया है। कोई भी व्यक्ति किसी भी समय उनके पास जाकर अपनी बात कह सकता था। उनके दरवाजे सभी के लिए खुले थे। आज शीला जी हमारे बीच नहीं रही। मुझे नहीं लगता कि अब दिल्ली को लंबे समय तक शीला दीक्षित से अधिक लोकप्रिय कोई व्यक्तित्व मिल पाएगा। लोकसभा चुनाव से पहले जनवरी में जब शीला जी को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंपी गई तो मैंने कार्यकर्ताओं के चेहरे पर एक अजीब सी खुशी और आत्मविश्वास देखा था। मुझे ऐसा लगा कि जैसे ये कार्यकर्ता लंबे समय से शीला जी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन वे किसी वजह से चुप रहे।
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी ने शनिवार को अमर उजाला डॉट कॉम के साथ बातचीत में शीला दीक्षित से जुड़ी कुछ यादें सांझा की। उन्होंने कहा, दिल्ली के विकास की जब कभी बात होगी तो शीला जी को याद किया जाएगा। वे मुख्यमंत्री रही या पार्टी अध्यक्ष, इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। दोनों ही स्थितियों में वे लोगों के बीच बराबर सम्मान पाती रहीं। कार्यकर्ताओं ने कभी उनकी बात नहीं टाली। कांग्रेस पार्टी नेतृत्व भी सदैव शीला जी की बात को तव्वजो देता रहा है। उनका खुशनुमा चेहरा दिल्ली वाले कभी भुला नहीं सकेंगे। वे बहुत सहजता के साथ हर वर्ग के लोगों से जुड़ जाती थीं। उनके जीवन को देखें तो वह सार्वजनिक जीवन के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
जनवरी में जब शीला दीक्षित ने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष का कार्यभार संभाला तो जनार्दन द्विवेदी ने कहा था, शीला जी कांग्रेस के लिए शुभ रही हैं। जब उन्हें दिल्ली की जिम्मेदारी मिलती है तो लोग भी साथ देते हैं और प्रकृति भी। उसी कार्यक्रम में मौजूद लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने शीला जी की तुलना पहले स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी वीर कुंअर सिंह से की थी। डॉ. कर्ण सिंह ने कहा था, मैं शीला दीक्षित को पिछले 50 वर्ष से जानता हूं। इस उम्र में भी शीला दीक्षित ने चुनौती स्वीकार की है, वह हर किसी के वश की बात नहीं है।
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कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी ने शनिवार को अमर उजाला डॉट कॉम के साथ बातचीत में शीला दीक्षित से जुड़ी कुछ यादें सांझा की। उन्होंने कहा, दिल्ली के विकास की जब कभी बात होगी तो शीला जी को याद किया जाएगा। वे मुख्यमंत्री रही या पार्टी अध्यक्ष, इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। दोनों ही स्थितियों में वे लोगों के बीच बराबर सम्मान पाती रहीं। कार्यकर्ताओं ने कभी उनकी बात नहीं टाली। कांग्रेस पार्टी नेतृत्व भी सदैव शीला जी की बात को तव्वजो देता रहा है। उनका खुशनुमा चेहरा दिल्ली वाले कभी भुला नहीं सकेंगे। वे बहुत सहजता के साथ हर वर्ग के लोगों से जुड़ जाती थीं। उनके जीवन को देखें तो वह सार्वजनिक जीवन के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
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जनवरी में जब शीला दीक्षित ने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष का कार्यभार संभाला तो जनार्दन द्विवेदी ने कहा था, शीला जी कांग्रेस के लिए शुभ रही हैं। जब उन्हें दिल्ली की जिम्मेदारी मिलती है तो लोग भी साथ देते हैं और प्रकृति भी। उसी कार्यक्रम में मौजूद लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने शीला जी की तुलना पहले स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी वीर कुंअर सिंह से की थी। डॉ. कर्ण सिंह ने कहा था, मैं शीला दीक्षित को पिछले 50 वर्ष से जानता हूं। इस उम्र में भी शीला दीक्षित ने चुनौती स्वीकार की है, वह हर किसी के वश की बात नहीं है।
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