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DUSU: डूसू चुनाव में सुस्त वोटिंग, दोनों दलों ने किए जीत के दावे, इस बार नहीं दिखा ये नजारा
Fri, 22 Sep 2023 07:35 PM IST
शिव शरण शुक्ला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Fri, 22 Sep 2023 07:35 PM IST
सार
वोटिंग को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह नए छात्रों में ही दिखाई पड़ रहा है। दोनों ही प्रमुख छात्र संगठनों ने युवा छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए विशेष इंतजाम किए थे। छात्र दोनों ही खेमों में जाकर उनकी विचारधारा सुनकर अपनी राय बना रहे थे। आज चुनाव के दिन भी छात्र अपने प्रत्याशियों के बारे में बात करते और उनके बारे में अपनी अंतिम राय बनाते देखे गए।
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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में आज वोटिंग चल रही है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार वोटिंग कुछ सुस्त बताई जा रही है। वोटिंग में कहीं से भी हिंसा होने के अब तक कोई समाचार नहीं मिले हैं, जबकि चुनाव प्रचार के दौरान एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों छात्र दलों के नेताओं ने एक दूसरे पर हिंसा करने के आरोप लगाए थे। हालांकि, इसके बाद भी छात्रों में वोटिंग को लेकर उत्साह बना हुआ है। सुस्त वोटिंग के बाद भी दोनों प्रमुख छात्र संगठनों एबीवीपी और एनएसयूआई ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए हैं।
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वोटिंग को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह नए छात्रों में ही दिखाई पड़ रहा है। दोनों ही प्रमुख छात्र संगठनों ने युवा छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए विशेष इंतजाम किए थे। छात्र दोनों ही खेमों में जाकर उनकी विचारधारा सुनकर अपनी राय बना रहे थे। आज चुनाव के दिन भी छात्र अपने प्रत्याशियों के बारे में बात करते और उनके बारे में अपनी अंतिम राय बनाते देखे गए।
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लॉ सेंटर वन की विथि छात्रा खुशी ने अमर उजाला को बताया कि पहली बार छात्रसंघ के चुनावों में वोटिंग करके उन्हें बहुत अच्छा लगा है। यह रोमांचकारी अनुभव था। विश्वविद्यालय परिसर में जिस तरह चुनाव की गतिविधियां चलीं और दोनों ही पक्षौं की ओर से विभिन्न मुद्दों पर वार्ताएं आयोजित की गईं, उसे सुनकर नए छात्रों को काफी कुछ सीखने को मिला। छात्र संघ चुनावों को लेकर उनका मानना है कि युवा छात्रों को राजनीति की पहली सीख लेने के लिए सक्रिय रूप से छात्र संघ चुनावों में सक्रियता से भाग लेना चाहिए।
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नहीं दिखे बड़े नेता
दरअसल, दिल्ली विश्वविद्यालय का चुनाव अपने आप में केवल एक विश्वविद्यालय में छात्रसंघ का चुनाव होता है, लेकिन संभवतः राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के केंद्र में होने के कारण यहां के विश्वविद्यालयों के चुनाव राष्ट्रीय प्रमुखता में देखे और सुने जाते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की इसी प्रमुखता को देखते हुए भाजपा के शीर्ष नेता भी एबीवीपी छात्र प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार के लिए आते रहे हैं। इसी प्रकार एनएसयूआई प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार के लिए कांग्रेस के बड़े दिग्गज नेता यहां पहुंचते रहे हैं।
लेकिन इस बार के चुनाव में दोनों ही दलों के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति रही। छात्रों का मानना है कि बड़े नेताओं के चुनाव प्रचार में न आने के कारण इस बार छात्र संघ के चुनाव को लेकर बहुत ज्यादा उत्साह नहीं बनता देखा जा रहा है। हालांकि, इसके बाद भी छात्र संगठनों और प्रत्याशियों ने चुनाव को रोचक बनाने के लिए काफी प्रयास किए हैं।
जीतेंगे अध्यक्ष पद सहित पूरा चुनाव- एबीवीपी
एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल ने अमर उजाला से कहा कि कोरोना काल में विश्वविद्यालयों में छात्र संगठनों के चुनाव नहीं हो सके थे। तीन साल के बाद हो रहे छात्र संगठन के चुनावों को लेकर काफी छात्रों को सूचना भी नहीं थी जिसके कारण मतदान प्रतिशत में कुछ कमी देखी जा रही है, हालांकि इसके बाद भी छात्रों का चुनाव को लेकर उत्साह पूरी तरह बना हुआ है और बढ़-चढ़कर मतदान हो रहा है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक आशुतोष सिंह ने अमर उजाला को बताया कि पूरी चुनावी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है। छात्रों में वोटिंग को लेकर उत्साह बना हुआ है। उनकी तरफ से सभी छात्रों को पूरा सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर यह देखा जा रहा है कि युवाओं में राष्ट्रीयता और सनातन धर्म के प्रति युवाओं का झुकाव बढ़ रहा है। छात्र संघ के चुनाव में भी छात्रों के बीच यह ट्रेंड साफ दिखाई पड़ रहा है। उन्हें पूरा विश्वास है कि इस बार भी एबीवीपी सभी पदों पर जीत दर्ज कर एक इतिहास रचेगी।