दिल्ली: यमुना वाटर टैक्सी परियोजना की एनजीटी से गुहार
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राष्ट्रीय राजधानी के परिक्षेत्र में यमुना पर नौवहन और नौचालन (वाटर टैक्सी परियोजना) के निर्माण कार्य की शुरूआत करने का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में पहुंच चुका है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने एनजीटी में याचिका दाखिल कर वजीराबाद से फतेहपुर जाट तक करीब 16 किलोमीटर जलक्षेत्र में वाटर टैक्सी परियोजना को शुरू करने के लिए निर्माण कार्य की अनुमति मांगी है। प्राधिकरण ने कहा है कि यह टैक्सी परियोजना पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल होगी। वहीं एनजीटी ने इस मामले में पर्यावरण मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय, दिल्ली सरकार व यमुना से संबंधित सभी प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर दो हफ्तों में जवाब मांगा है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही है। पीठ ने इस मामले में दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी, यमुना विकास प्राधिकरण और पूर्वी दिल्ली नगर निगम को भी जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले पर अगली सुनवाई 19 अक्तूबर को होगी।
प्राधिकरण ने अपनी याचिका में कहा है कि बीते वर्ष 13 जनवरी को मनोज मिश्रा के मामले में एनजीटी ने अपने विस्तृत आदेश में कहा था कि यमुना डूब क्षेत्र में स्थायी या अस्थायी किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए। वहीं सरकार ने विस्तृत और कई पहलुओं पर किए गए अध्ययन के बाद पाया है कि दिल्ली के वजीराबाद से फतेहपुर जाट तक 16 किलोमीटर परिक्षेत्र में नौवहन किया जा सकता है।
इसके लिए निर्माण कार्य करने होंगे। जलमार्ग को विकसित करने के लिए जो भी निर्माण कार्य होगा वह पर्यावरण के अनुकूल रखा जाएगा। लिहाजा एनजीटी अपने आदेश में इस टैक्सी परियोजना को शुरू करने के लिए निर्माण कार्य करने की अनुमति दे। अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया है कि इस जलक्षेत्र में वाटर टैक्सी परियोजना शुरू करने के लिए पर्याप्त गहराई है।