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ट्रैक्टर रैली में शक्ति प्रदर्शन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, इस 'दुस्साहस' से कमजोर पड़ेगा किसान आंदोलन!
Wed, 27 Jan 2021 12:31 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 27 Jan 2021 12:31 PM IST
सार
दिल्ली पुलिस ने करीब दो सौ से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाई है। इसके अलावा पुलिस ने किसानों की उग्रता वाली घटनाओं का वीडियो भी बनाया है...
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Tractor Parade on Republic Day
- फोटो : PTI
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विस्तार
किसान संगठनों की ट्रैक्टर रैली में शक्ति प्रदर्शन के दौरान जो दुस्साहस देखने को मिला है, दिल्ली पुलिस उसका हिसाब-किताब करेगी। दिल्ली पुलिस, कानून व्यवस्था अपने हाथ में लेने वाले आरोपियों की सूची तैयार करने में जुट गई है। लालकिला पर ट्रैक्टर ले जाने और वहां अपने संगठन का झंडा फहराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी हो रही है।
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दिल्ली पुलिस ने करीब दो सौ से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाई है। इसके अलावा पुलिस ने किसानों की उग्रता वाली घटनाओं का वीडियो भी बनाया है। एक बड़े पुलिस अधिकारी ने यह पुष्टि की है। इस बात की पूरी संभावना है कि आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर उन किसानों की गिरफ्तारी हो, जिन पर तोड़फोड़ करने, पुलिस पर हमला करने, लालकिला में जबरन घुस कर निजी संगठन का झंडा फहराने और पुलिस द्वारा तय शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप है।
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दूसरी तरफ, मंगलवार की घटना के बाद केंद्र सरकार ने भी आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार न तो तीनों कृषि कानूनों को वापस लेगी और न ही इनकी मूल भावना में कोई बदलाव लाएगी। शाम को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर पर जो उच्चस्तरीय बैठक हुई, उसमें किसानों से आगामी बातचीत की तारीख को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, किसान संगठनों को जिन मार्गों पर ट्रैक्टर रैली निकालने की इजाजत दी गई थी, वहां पुलिस पीसीआर का इंतजाम किया गया था। यह तय हुआ था कि ट्रैक्टर रैली के आगे पुलिस चलेगी। जब तक ट्रैक्टर रैली अपना चक्कर पूरा कर वहीं पर वापस नहीं आ जाती, पुलिस की कुछ गाड़ियां उनके साथ रहेंगी। इसके बावजूद किसानों ने कई रूटों पर पुलिस के पीछे चलने से गुरेज किया।
नतीजा, आईटीओ और लालकिला पर किसानों ने शक्ति प्रदर्शन के दौरान जो दुस्साहस दिखाने का प्रयास किया, वह उन्हें पुलिस कार्रवाई के दायरे में लाने के लिए काफी है। बहुत जल्द ऐसे किसानों की धर पकड़ शुरू होगी, जिन्होंने कानून व्यवस्था तोड़ने का दुस्साहस किया है। पुलिस के पास पर्याप्त सबूत हैं। इलेक्ट्रॉनिक फुटेज और मैनुअल वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए आरोपियों की पहचान का काम शुरू किया गया है।
क्या पुलिस कार्रवाई से किसान आंदोलन कमजोर पड़ेगा या कुछ संगठन उस वक्त दबाव में आ जाएंगे, जब उनके सदस्यों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई होगी, इसके जवाब में किसान संगठन के एक नेता का कहना था, इसे लेकर वे बैठक करेंगे। जिस तरह पुलिस अपना होमवर्क कर रही है, किसान संगठन भी करेंगे। ये देखा जाएगा कि कसूर किसका है। हालांकि हमारे संयुक्त किसान मोर्चा के सहयोगियों द्वारा पहले ही कहा जा चुका है कि ट्रैक्टर रैली में कानून व्यवस्था भंग करने वालों से किसान संगठनों का कोई नाता नहीं है। वह साजिश हो सकती है। किसान संगठन, उसी रूट पर चले हैं, जो पुलिस ने सुझाए थे।
आंदोलन पर इसका दबाव नहीं पड़ेगा। हां सरकार, जो पहले से ही इस आंदोलन को खालिस्तान और हिंसा से जोड़ रही थी, उसे एक मौका तो मिल ही जाएगा। अगर ज्यादा किसानों के खिलाफ मामले दर्ज होते हैं तो सरकार का आंशिक दबाव संभव है। इन सबके बारे में बुधवार को विस्तार से चर्चा होगी। किसान संगठन, अपनी बात पर कायम हैं कि लालकिला या दूसरी जगह पर किसानों ने अगर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है या नियमों का उल्लंघन किया है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।