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Delhi Police: क्या CP की नियुक्ति में चौथी बार दोहराया जाएगा लालकृष्ण आडवाणी का 'प्रयोग'? AGMUT कैडर पर नजर

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 30 Jul 2025 07:03 PM IST
सार

दिल्ली पुलिस के इतिहास में संजय अरोड़ा, ऐसे तीसरे आईपीएस रहे हैं, जिन्होंने 'एजीएमयूटी' (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और यूनियन टेरेटरीज) कैडर से बाहर का पुलिस अधिकारी होने के बावजूद दिल्ली पुलिस की कमान संभाली। खास बात है कि तीनों आईपीएस, भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकार यानी एनडीए शासनकाल में ही दिल्ली पुलिस आयुक्त बने हैं।

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Delhi Police: Will LK Advani's 'experiment' be repeated for the fourth time in the appointment of CP
दिल्ली पुलिस, Delhi police - फोटो : X: @DelhiPolice

विस्तार

'तमिलनाडु कैडर के 1988 बैच के आईपीएस' संजय अरोड़ा, 31 जुलाई को दिल्ली पुलिस आयुक्त के पद से रिटायर हो रहे हैं। अभी तक केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस आयुक्त के लिए किसी आईपीएस अधिकारी का नाम फाइनल नहीं किया है। दिल्ली पुलिस के इतिहास में संजय अरोड़ा, ऐसे तीसरे आईपीएस रहे हैं, जिन्होंने 'एजीएमयूटी' (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और यूनियन टेरेटरीज) कैडर से बाहर का पुलिस अधिकारी होने के बावजूद दिल्ली पुलिस की कमान संभाली। खास बात है कि तीनों आईपीएस, भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकार यानी एनडीए शासनकाल में ही दिल्ली पुलिस आयुक्त बने हैं। सबसे पहले 1999 में अजय राज शर्मा, उसके बाद 2021 में राकेश अस्थाना और 2022 में संजय अरोड़ा को दिल्ली पुलिस कमिश्नर बनाया गया था। दिल्ली पुलिस के पूर्व अफसरों का कहना है, अब दिल्ली पुलिस आयुक्त का पद एक 'प्रयोगशाला' बन कर रह गया है। 'एजीएमयूटी' कैडर को कमतर आंका जा रहा है। 

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मौजूदा समय में दिल्ली पुलिस में विवेक गोगिया '1991 बैच', सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं, लेकिन उनका कार्यकाल 31 जुलाई को समाप्त हो रहा है। इनके बाद वरिष्ठता के क्रम में 1991 बैच की आईपीएस अधिकारी नुजहत हसन हैं। नंबर दो पर वीरेंद्र सिंह चहल हैं। सूत्र बताते हैं कि इन दोनों आईपीएस को पुलिस आयुक्त की दौड़ में शामिल नहीं किया गया है। दिल्ली पुलिस आयुक्त की दौड़ में 'एजीएमयूटी' कैडर के 1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस सतीश गोलचा का नाम शामिल है। वे फिलहाल, तिहाड़ जेल के महानिदेशक के पद पर तैनात हैं। वे सीबीआई में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इनके बाद 1993 बैच के वरिष्ठ 'एजीएमयूटी' कैडर के आईपीएस अधिकारी प्रवीर रंजन का नाम भी पुलिस आयुक्त के पद की दौड़ में शामिल है। वे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में विशेष निदेशक के पद पर तैनात हैं। 
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पिछले कुछ समय से सीआरपीएफ के डीजी जीपी सिंह का नाम भी दिल्ली पुलिस आयुक्त के पद के लिए सामने आ रहा था। वे असम पुलिस के डीजीपी रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बाबत, जीपी सिंह खुद इच्छुक नहीं बताए जा रहे। फिलहाल वे देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल, 'सीआरपीएफ' के महानिदेशक पद पर ही बने रहना चाहते हैं।  
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केंद्र सरकार ने 2021 में बीएसएफ के डीजी राकेश अस्थाना को दिल्ली पुलिस आयुक्त बना दिया था। उस वक्त 'एजीएमयूटी' कैडर के आईपीएस, केंद्र सरकार का आदेश देख हैरान रह गए थे। ऐसा भी नहीं है कि 'एजीएमयूटी' कैडर में वरिष्ठ आईपीएस अफसरों का अभाव है। अभी तक तीन अफसरों को छोड़, बाकी सभी पुलिस आयुक्त 'एजीएमयूटी' कैडर से रहे हैं। 1999 के दौरान तत्कालीन एनडीए सरकार, जिसमें लालकृष्ण आडवाणी गृह मंत्री थे, उन्होंने यूपी कैडर के आईपीएस अजय राज शर्मा को दिल्ली पुलिस आयुक्त बनाया था। दिल्ली पुलिस में डीजी रैंक से रिटायर हुए एक अधिकारी बताते हैं, उस वक्त 'एजीएमयूटी' कैडर में उच्च स्तर पर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। दिल्ली पुलिस आयुक्त लगने की होड़ में कई अफसरों ने गोपनीयता के नियमों को ताक पर रख दिया था। 

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के अंदर की बातें बाहर आने लगी थी। तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने इस तरह के विवाद को शांत कराने के मकसद से उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अजय राज शर्मा को दिल्ली पुलिस आयुक्त की कमान सौंप दी थी। हालांकि शर्मा की नियुक्ति के बाद दिल्ली पुलिस के कुछ अफसरों ने लामबंद होने की कोशिश की, लेकिन अजय राज शर्मा की सख्ताई के आगे उन्होंने शांत बैठना ही ठीक समझा। 'गुजरात कैडर के आईपीएस' राकेश अस्थाना, जब बीएसएफ डीजी के पद से रिटायर होने वाले थ तो उन्हें एक साल का सेवा विस्तार दे दिया था। 

इसके बाद उन्हें दिल्ली पुलिस आयुक्त लगा दिया गया। उससे पहले अस्थाना, बीएसएफ महानिदेशक के अलावा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो के डीजी का प्रभार भी संभाल चुके थे। तब भी दिल्ली पुलिस में हालात ठीक नहीं थे। दिल्ली पुलिस के तत्कालीन सीपी एसएन श्रीवास्तव के कार्यकाल में कई बड़े अफसरों के बीच खींचतान हुई थी। 
उस वक्त खुद सीपी पर भी आरोप लगे थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय में शिकायतें भेजी गई। उस समय की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राकेश अस्थाना को दिल्ली पुलिस का आयुक्त लगा दिया गया। 

हालांकि उनके कार्यकाल में भी वे सभी अफसर शांत बैठ गए, जो एक दूसरे की टांग खिंचाई कर रहे थे। वजह, अस्थाना को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ही नहीं, बल्कि पीएम मोदी भी अच्छे से जानते रहे हैं। इस वजह से 'एजीएमयूटी' कैडर के आईपीएस मौन साध कर अपने काम में लग गए। पूर्व आईपीएस बताते हैं,  अखिल भारतीय सेवा वाले अधिकारी को किसी भी राज्य में भेजा जा सकता है। जिस तरह से वे प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में आते हैं, ऐसे ही दूसरे कैडर का अफसर दिल्ली का पुलिस आयुक्त बन सकता है। कानूनी तौर से इसमें कुछ गलत नहीं है। यहां पर जो सवाल उठ रहे हैं, वह 'एजीएमयूटी' कैडर के आईपीएस अधिकारियों को लेकर है। 


'एजीएमयूटी' कैडर के कई वरिष्ठ आईपीएस डीजी रैंक में हैं। वे भी पुलिस प्रमुख बनना चाहते हैं। पहले अजय राज शर्मा, राकेश अस्थाना और फिर संजय अरोड़ा, ऐसे तो 'एजीएमयूटी' कैडर के कई आईपीएस जो खुद को पुलिस आयुक्त बनने की दौड़ में शामिल कर रहे थे, वे बाहर हो जाएंगे। ये कदम एक आध बार के लिए तो ठीक है, लेकिन इसे नियमित आदत के तौर पर विकसित करना ठीक नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि 'एजीएमयूटी' कैडर के सभी अफसर खींचतान में शामिल हैं। जो लायक हैं, उन्हें पुलिस आयुक्त बनने का अवसर मिलना चाहिए। भरोसा तो करना ही होगा। 

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