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दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन बार-बार क्यों खराब हो रही?
बीबीसी हिंदी
Updated Fri, 07 Dec 2018 02:18 PM IST
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Delhi Metro Blue Line
- फोटो : Amar Ujala
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"मेट्रो लेट चल रही है इसलिए दफ्तर समय पर नहीं पहुंच पाऊंगी।" क्या पिछले दो दिन से आप भी दफ़्तर लेट पहुंचने के लिए यही वजह बता रहे हैं? दिल्ली के जिस दफ़्तर में जाइए, एक जगह खड़े हो कर दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन की लेट लतीफी पर चर्चा करने वाले लोग मिल ही जाएंगे।
पांच दिसंबर को दिल्ली मेट्रो की इस लाइन की 16 ट्रिप कैंसल थी और 20 ट्रिप देरी से चल रही थी। लेकिन पिछले दो दिनों से ब्लू लाइन पर मेट्रो ट्रेन शॉर्ट लूप में चल रही है। एक लूप है वैशाली से यमुना बैंक के लिए और दूसरा लूप है यमुना बैंक से द्वारका के लिए।
ब्लू लाइन की सीधी मेट्रो वैशाली से द्वारका नहीं चल रही और लोगों को बीच में मेट्रो बदलने की जरूरत पड़ रही है। इससे मेट्रो को जो नुकसान हुआ सो हुआ, लोगों की लंबी कतार ऑफिस आने और जाने के समय मेट्रो स्टेशन पर देखने को मिल रही है। कई लोगों ने आधे घंटे की दूरी दो से तीन घंटे में तय की। इस वजह से प्राइवेट गाड़ियां ज्यादा निकलीं और लोगों को ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।
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पांच दिसंबर को दिल्ली मेट्रो की इस लाइन की 16 ट्रिप कैंसल थी और 20 ट्रिप देरी से चल रही थी। लेकिन पिछले दो दिनों से ब्लू लाइन पर मेट्रो ट्रेन शॉर्ट लूप में चल रही है। एक लूप है वैशाली से यमुना बैंक के लिए और दूसरा लूप है यमुना बैंक से द्वारका के लिए।
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ब्लू लाइन की सीधी मेट्रो वैशाली से द्वारका नहीं चल रही और लोगों को बीच में मेट्रो बदलने की जरूरत पड़ रही है। इससे मेट्रो को जो नुकसान हुआ सो हुआ, लोगों की लंबी कतार ऑफिस आने और जाने के समय मेट्रो स्टेशन पर देखने को मिल रही है। कई लोगों ने आधे घंटे की दूरी दो से तीन घंटे में तय की। इस वजह से प्राइवेट गाड़ियां ज्यादा निकलीं और लोगों को ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।
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दिक्कत कहां है?
सवाल ये है कि आखिर दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन इतनी खराब क्यों होती है?
इस बार ज्यादा दिक्कत दिल्ली को गाजियाबाद के वैशाली से जोड़ने वाली लाइन में आ रही है। दिल्ली मेट्रो के मुताबिक दिक्कत बहुत हद तक ठीक हो गई है। अब जो दिक्कत रह गई है वो है यमुना बैंक से वैशाली के बीच की। इसलिए तीसरे दिन भी मेट्रो की फ्रिक्वेंसी थोड़ी कम कर दी गई है और रफ़्तार धीमी। ब्लू लाइन मेट्रो की दिक्कत को समझने के लिए आपको ये समझना जरूरी है कि मेट्रो काम कैसे करती है। दिल्ली मेट्रो वैसे तो ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम पर काम करती है।ब्लू लाइन में 17 इंटरलॉकिंग सेक्शन हैं, जिनको 8 इंटरलॉकिंग पॉइंट में बांटा गया है। जब मेट्रो ट्रेन एक सेक्शन से निकल जाती है तो उसकी सूचना उनके नजदीकी इंटरलॉकिंग पॉइंट पर पहले खुद-ब-खुद मिल जाया करती थी। कौन सी मेट्रो ट्रेन किस स्टेशन से निकली है, इसका डेटा नियमित अंतराल पर मेट्रो के ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (OCC) यानी मेट्रो के सेंट्रलाइज्ड सर्वर में मिलता रहता था।
लेकिन बीते तीन दिनों से ये सिग्नल ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर को नहीं मिल पा रहा है। इंटरलॉकिंग पॉइंट अपने आप बंद हो जा रहे हैं और अपने आप चलने लग रहे हैं। इसलिए दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन को अब हर स्टेशन से मैनुअली कंट्रोल किया जा रहा है। इस चक्कर में मेट्रो की रफ़्तार धीमी पड़ गई है, हर सूचना मौखिक तौर पर दूसरे स्टेशन तक देनी पड़ रही है और फिर वहां से सूचना ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर तक जा रही है।
दिल्ली मेट्रो के प्रवक्ता, निखिल कुमार के मुताबिक, "ब्लू लाइन के 8 इंटरलॉकिंग पॉइंट में से पांच को फिलहाल ठीक कर लिया गया है। अब दिक्कत केवल तीन प्वाइंट पर बची है।" इसलिए फिलहाल मेट्रो ट्रेन द्वारका से लेकर यमुना बैंक तक ठीक चल रही है। यमुना बैंक से वैशाली के लाइन पर अब भी दिक्कत है और ट्रेन छह मीनट के अंतराल पर आ रही है।
दिक्कत कैसे होगी दूर?
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के मुताबिक ये पहला मौका है जब उनकी तकनीकी सॉफ्टवेयर टीम इस दिक्कत को समझ नहीं पा रही है। इसलिए उन्होंने जर्मनी से मदद मांगी है। दिल्ली मेट्रो ने ये सॉफ्टवेयर M/S SIMENS से खरीदा था। ये जर्मनी की कंपनी है। डीएमआरसी के मुताबिक छह दिसंबर का पूरा डेटा लॉग उन्होंने जर्मनी को भेजा है। फिलहाल उनको जर्मनी की तरफ से जवाब का इंतजार है।
निखिल के मुताबिक, "ये एक तकनीकी दिक्कत है, फोन और मेल पर ही बातचीत के जरिए इसका हल निकल आने की उम्मीद है।"
इस सवाल के जवाब में ब्लू लाइन पर दिक्कत ज्यादा क्यों आती है? निखिल मुस्कुराते हुए कहते हैं, "दिल्ली मेट्रो में रोजाना 28 लाख लोग सफर करने हैं, जिसमें से तकरीबन 11 लाख ब्लू लाइन पर चलते हैं। इसमें से सबसे ज्यादा मीडिया में काम करने वाले लोग हैं।"
निखिल के मुताबिक, "ये एक तकनीकी दिक्कत है, फोन और मेल पर ही बातचीत के जरिए इसका हल निकल आने की उम्मीद है।"
दिक्कत के बीच कितनी सुरक्षित है रेल यात्रा?
ब्लू लाइन की दिक्कतों के बारे में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने एक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि डीएमआरसी इन दिनों "फेल- सेफ" तकनीक पर काम कर रही है। किसी भी वक़्त सिग्नल फेल होने पर मेट्रो अपनी स्पीड कम कर मेनुअल मोड में ही काम करने लगती है। यात्री निश्चिंत होकर मेट्रो से यात्रा कर सकते हैं। यात्रा में थोड़ी देर हो सकती है, पर यात्रा सुरक्षित है।"इस सवाल के जवाब में ब्लू लाइन पर दिक्कत ज्यादा क्यों आती है? निखिल मुस्कुराते हुए कहते हैं, "दिल्ली मेट्रो में रोजाना 28 लाख लोग सफर करने हैं, जिसमें से तकरीबन 11 लाख ब्लू लाइन पर चलते हैं। इसमें से सबसे ज्यादा मीडिया में काम करने वाले लोग हैं।"