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Delhi Mayor Election: क्यों नहीं हो पा रहा दिल्ली मेयर का चुनाव, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद क्या बदलेगा?

Fri, 17 Feb 2023 05:56 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 17 Feb 2023 05:56 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली नगर निगम की पहली बैठक का नोटिस 24 घंटे के भीतर जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने  मेयर चुनाव में मनोनीत सदस्यों के वोट डालने पर भी रोक लगा दी। 

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Delhi Mayor Election: row over delhi mayor election and case in supreme court, look timeline
दिल्ली मेयर चुनाव - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

दिल्ली में महापौर चुनाव को लेकर चल रही तनातनी के बीच शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया। देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि मेयर चुनाव के दौरान मनोनीत सदस्यों को वोट देने की इजाजत नहीं होगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि निगम की पहली बैठक का नोटिस 24 घंटे के भीतर जारी हो। आदेश में कोर्ट ने यह भी कहा कि निगम की पहली बैठक में महापौर का चुनाव हो। महापौर का चुनाव होने के बाद महापौर की अध्यक्षता में अध्यक्षता में उप-मेयर और स्थाई समिति के सदस्यों को चुनाव हो। कोर्ट के इस आदेश को आम आदमी पार्टी ने अपनी जीत बताया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर लिखा, सुप्रीम कोर्ट का आदेश जनतंत्र की जीत।
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आइये जानते हैं आखिर दिल्ली एमसीडी में मेयर के चुनाव पर क्या विवाद है? सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने आदेश में क्या-क्या कहा है? एमसीडी चुनाव के नतीजे क्या रहे थे? मेयर चुनाव के लिए पहले कौन सी तारीखें तय हुईं थीं और उनमें क्या हुआ? मामला सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा?  
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दिल्ली एमसीडी चुनाव के नतीजे क्या रहे?
दिल्ली एमसीडी चुनाव चार दिसंबर को हुए थे और वोटों की गिनती सात दिसंबर को हुई। आम आदमी पार्टी चुनावों में एक स्पष्ट विजेता के रूप में उभरी थी, उसने 134 वार्ड जीते और नगर निकाय में भाजपा के 15 साल के शासन को समाप्त कर दिया। भाजपा ने दूसरे स्थान पर रहते हुए 104 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस ने 250 सदस्यीय नगरपालिका सदन में नौ सीटों पर जीत हासिल की थी।

पहली बैठक में मनोनीत पार्षदों को शपथ दिलाने पर हंगामा 
चुनाव परिणाम के लगभग महीने भर बाद छह जनवरी को सदन की बैठक हुई। इस दिन नवनिर्वाचित व मनोनीत पार्षदों को शपथ दिलाने के साथ महापौर, उपमहापौर और स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव होने की योजना थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका। बैठक में मनोनीत पार्षदों को शपथ दिलाने के कारण जबरदस्त हंगामा हो गया। इस कारण बैठक में कोई कामकाज नहीं हो सका था। 
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दूसरी बैठक में पार्षदों ने ली शपथ, लेकिन नहीं हो पाया मेयर चुनाव 
पहली बैठक स्थगित होने के बाद नौ जनवरी को मेयर चुनाव की तारीख तय की गई, लेकिन इस बार भी सदन हंगामे की भेंट चढ़ गया और चुनाव टल गए। आम आदमी पार्टी व भाजपा में एमसीडी में पार्षद मनोनीत करने के मामले में चल रहा टकराव दूसरी बार बुलाई गई बैठक में भी जारी रहा। हालांकि, इस दिन नगर निगम के सदन में पार्षदों को शपथ दिलाई गई। आप के पार्षदों के विरोध के बाद भी पहले मनोनीत पार्षदों को शपथ दिलाई गई। 

इस बैठक में हुए घटनाक्रमों की बात करें तो आम आदमी पार्टी ने सदन में मीडिया के सामने हेड काउंट कर हाजिरी लगवाई। मेयर चुनाव की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी के पार्षद सदन में धरने पर बैठ गए। दूसरी ओर भाजपा की मेयर प्रत्याशी रेखा गुप्ता सदन के बाहर धरने पर बैठ गईं। आप का एक पार्षद निगम सचिव से बात करने के लिए जैसे ही मंच पर चढ़ा, भाजपा के पार्षदों ने इसका जबरदस्त विरोध किया। इसके बाद शोर थमता न देखकर सदन की कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया। 

तीसरी बैठक, आप के दो विधायकों का वोटिंग का अधिकार रद्द
दो असफल कोशिशों के बाद मेयर चुनाव के लिए छह फरवरी तीसरी बार बैठक बुलाई गई। सदन शुरू होते ही हंगामा होने लगा। इसके बाद पहले तो पीठासीन अधिकारी ने 10 मिनट के लिए सदन स्थगित किया, बाद में उन्होंने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। दरअसल, कुर्सी पर बैठते ही पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने मेयर, डिप्टी मेयर और स्थायी समिति के छह सदस्यों के चुनाव एक साथ कराने की घोषणा की। 

साथ ही कहा कि मनोनीत पार्षद (एल्डरमैन) भी मेयर चुनाव में हिस्सा लेंगे और स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव में केवल पार्षद शामिल होंगे। मेयर चुनाव में वोट करने के लिए मनोनीत आप के विधायक महेंद्र गोयल ने तीनों पदों के चुनाव एक साथ कराए जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि मेयर चुनाव में एल्डरमैन को वोट देने का हक देना असांविधानिक है। इस पर पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 2016 के फैसले में साफ कहा है कि एल्डरमैन मेयर चुनाव में वोट डाल सकते हैं। इसके बाद सदन की कार्यवाही कुछ देर के स्थगित कर दी गई। 

थोड़ी देर बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई। तभी पूर्ववर्ती दक्षिणी निगम की स्थायी समिति अध्यक्ष रहीं भाजपा पार्षद शिखा राय ने पीठासीन अधिकारी के सामने यह मांग रखी कि आप के दो विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी और संजीव झा को कोर्ट से सजा मिल चुकी है, इसलिए वह मेयर चुनाव में वोट देने के योग्य नहीं हैं। पीठासीन अधिकारी ने इसका समर्थन किया और आप के इन दो विधायकों का वोटिंग का अधिकार रद्द कर दिया। इसको लेकर हंगामा शुरू हो गया। हंगामा बढ़ता देख पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। 

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा?
लगातार मेयर चुनाव टलने के विरोध में आप ने फिर से सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया। आप की मेयर प्रत्याशी डॉ शैली ओबेरॉय ने दिल्ली में मेयर का चुनाव कराने के लिए शीर्ष अदालत का रुख किया। हालांकि, जब छह फरवरी को चुनाव की तारीख तय हो गईं, तो याचिका वापस ले ली गई। इसके बाद जब छह फरवरी को भी चुनाव नहीं हो सका तो पार्टी ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। मामले में जब पहली बार सुनवाई हुई थी तब सुप्रीम कोर्ट ने उपराज्यपाल विनय सक्सेना व अन्य लोगों को नोटिस जारी कर मनोनीत सदस्यों के मताधिकार पर जवाब मांगा था।

अब सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?
दिल्ली में महापौर चुनाव को लेकर चल रही तनातनी के बीच शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि निगम की पहली बैठक का नोटिस 24 घंटे के भीतर जारी हो। आदेश में कोर्ट ने यह भी कहा कि निगम की पहली बैठक में महापौर का चुनाव होगा। मनोनीत सदस्यों को वोट देने की इजाजत नहीं होगी। इसके अलावा महापौर का चयन होने के बाद उनकी अध्यक्षता में उप-महापौर और स्थाई समिति के सदस्यों को चुनाव होगा। 

राजनीतिक दलों ने कोर्ट के आदेश पर क्या कहा?
कोर्ट के इस आदेश को आम आदमी पार्टी अपनी जीत बता रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर लिखा, सुप्रीम कोर्ट का आदेश जनतंत्र की जीत। सुप्रीम कोर्ट का बहुत बहुत शुक्रिया। ढाई महीने बाद अब दिल्ली को मेयर मिलेगा। ये साबित हो गया कि एलजी और बीजेपी मिलकर आये दिन दिल्ली में कैसे गैरकानूनी और असंवैधानिक आदेश पारित कर रहे हैं। उधर भाजपा की अभी तक इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आदेश के बाद क्या बदलेगा?
कोर्ट के आदेश के मुताबिक अगले 24 घंटे में एमसीडी की बैठक के लिए नोटिस जारी होगा। इसके बाद सदन की पहली बैठक में महापौर का चुनाव करना होगा। इसके बाद ही सदन की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। 
 
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