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सिर्फ दिल्ली के लोगों की नहीं, पूरे देश की है राष्ट्रीय राजधानी
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 23 Nov 2017 05:45 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : SOCIAL MEDIA
केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है और दिल्ली देश के सभी नागरिकों की है। जहां तक दिल्ली विधानसभा की बात है, इस केंद्र सरकार की प्रमुखता है।
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दिल्ली बनाम उपराज्यपाल मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ केसमक्ष केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) मनिंदर सिंह ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली पर केंद्र सरकार की प्रधानता है। उन्होंने कहा कि यह कहना अलोकतांत्रिक है कि दिल्ली विधानसभा को केंद्र सरकार केसमान ही अधिकार है।
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पढ़ें- केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, दिल्ली न तो राज्य और न ही राज्य सरकार
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केंद्र सरकार ने फिर दोहराया कि दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है न कि राज्य। एएसजी ने कहा कि दिल्ली के उपराज्यपाल मंत्रिपरिषद के सलाह को मानने केलिए बाध्य नहीं है। एएसजी ने कहा, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है और देश केसभी नागरिकों के लिए है। दिल्ली सरकार कहती है कि उसकी चुनी हुई सरकार है।
भारत सरकार भी चुनी हुई सरकार है। जहां तक दिल्ली विधानसभा का प्रश्न है, इस पर केंद्र सरकार की प्रधानता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है और इसे विशेष दर्जा मिला हुआ है। लेकिन दिल्ली राज्य नहीं है। भले ही केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा हो लेकिन वह केंद्रशासित प्रदेश ही रहेगा। उसे राज्य नहीं कहा जा सकता।
एएसजी मनिंदर सिंह ने यह भी कहा कि दिल्ली देश केसभी नागरिकों की है। कोई यह कैसे कह सकता है कि दिल्ली सिर्फ दिल्लीवासियों के लिए है। सुनवाई केदौरान उन्होंने बिना किसी का नाम लेते हुए कहा कि वे कहते हैं कि हम यह तय करेंगे कि दिल्ली में 26 जनवरी का परेड होगा या नहीं?
दिल्ली सरकार की इस दलील पर कि उसे अपने विभाग केकर्मचारियों की नियुक्ति और ट्रांसफर का अधिकार होना चाहिए, एएसजी ने कहा कि दिल्ली सरकार केसेवानिवृत्त कर्मचारियों केलिए 4000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि केंद्र सरकार जारी करती है। बुधवार को सुनवाई केदौरान संविधान पीठ ने यह पाया कि दिल्ली सरकार के वकीलों की दलीलों में विरोधाभास है। लिहाजा पीठ ने सरकार को नोट के जरिए इसे स्पष्ट करने के लिए कहा है। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।
एएसजी मनिंदर सिंह ने यह भी कहा कि दिल्ली देश केसभी नागरिकों की है। कोई यह कैसे कह सकता है कि दिल्ली सिर्फ दिल्लीवासियों के लिए है। सुनवाई केदौरान उन्होंने बिना किसी का नाम लेते हुए कहा कि वे कहते हैं कि हम यह तय करेंगे कि दिल्ली में 26 जनवरी का परेड होगा या नहीं?
दिल्ली सरकार की इस दलील पर कि उसे अपने विभाग केकर्मचारियों की नियुक्ति और ट्रांसफर का अधिकार होना चाहिए, एएसजी ने कहा कि दिल्ली सरकार केसेवानिवृत्त कर्मचारियों केलिए 4000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि केंद्र सरकार जारी करती है। बुधवार को सुनवाई केदौरान संविधान पीठ ने यह पाया कि दिल्ली सरकार के वकीलों की दलीलों में विरोधाभास है। लिहाजा पीठ ने सरकार को नोट के जरिए इसे स्पष्ट करने के लिए कहा है। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।