फैसला: छह साल पहले चाचा ने किया था भतीजे के साथ दुष्कर्म, बीबीए की मदद से मिला इंसाफ
छह साल पहले चाचा ने भतीजे के साथ दुष्कर्म किया था। बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) की मदद से पीड़ित बालक और उसकी बेबस मां को अदालत से न्याय मिला है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने बाल यौन शोषण के उस मामले में फैसला सुनाया है, जिसमें छह साल पहले चाचा ने ही अपने भतीजे के साथ दुष्कर्म किया था। हाईकोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामले में पीड़ित बालक और उसके परिवार को मुआवजे के तौर पर 6 लाख रुपये देने का निर्देश दिया है। पीड़ित बालक और उसकी बेबस मां को अदालत से यह न्याय बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के हस्तक्षेप के बाद मिला है।
यह घटना छह साल पहले की है। दरअसल, पीड़ित बालक के पिता गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और मां घरों में कामकाज कर अपने बीमार पति के इलाज करवा रही थी और बेटा का पालन पोषण कर रही थी। इस दौरान पीड़ित के चाचा ने उसके घर में बालक के साथ दुष्कर्म किया। जब मामला सामने आया, तो इसकी जानकारी बचपन बचाओ आंदोलन तक पहुंची, जिसके बाद उसने पीड़ित बालक को इंसाफ दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। आखिरकार गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने बालक के हक में फैसला सुनाया। बता दें कि पीड़ित बालक के पिता गंभीर रूप से तपेदिक के शिकार हैं और पिछले दो सालों से बिस्तर पर हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बीबीए के हस्तक्षेप से अंतरिम मुआवजे के तौर पर 6 लाख रुपये देने का निर्देश दिया। न्यायालय ने एक लाख रुपये पीड़ित को तुरंत सौंपने और अगले दो दिनों में 5 लाख रुपये देने का निर्देश दिया। न्यायालय ने पीड़ित और उसके परिवार की वित्तीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) को पीड़ित लड़के और उसकी मां के नाम पर फिक्स डिपॉजिट में पांच लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने डीएलएसए को यह भी सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि मां को हर महीने ब्याज मिले।
बीएए की निदेशक ने की सराहना
बीबीए की निदेशक (लीगल) सम्पूर्णा बेहुरा ने न्यायालय के इस फैसले की प्रशंसा की है। बीबीए चार दशकों से बच्चों को शोषण से मुक्त करने और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास कर रहा है।
बता दें कि अदालत ने यह फैसला ऐसे समय में सुनाया है, जब बीबीए की सहयोगी संस्था कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन (केएससीएफ) यौन शोषण और बलात्कार के शिकार बच्चों को अदालत से न्याय सुनिश्चित करने के लिए ‘जस्टिस फॉर एवरी चाइल्ड’ अभियान चला रहा है। इस अभियान का उद्देश्य देश के 100 जिलों में पॉक्सो अधिनियम के तहत चल रहे कम से कम 5,000 मामलों में बच्चों को न्याय दिलाना है। इस अवधि के दौरान केएससीएफ यौन शोषण और बलात्कार के पीड़ित बच्चों को कानूनी, स्वास्थ्य सुविधाएं, पुनर्वास, शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों की सुविधाएं प्रदान करेगा।