फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Delhi High Court Rejects Centre Review Plea Over Rs 5400 Grade Pay for CRPF Inspectors

सीआरपीएफ: इंस्पेक्टरों को 5400 का ग्रेड 'पे' देने का केस, दिल्ली हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन याचिका खारिज

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 29 Sep 2026 07:42 PM IST
सार

सीआरपीएफ इंस्पेक्टरों के 5400 रुपये ग्रेड पे मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र की रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी। कोर्ट ने 10 मार्च 2025 के आदेश को बरकरार रखा। आखिर क्या है पूरा मामला? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

विज्ञापन
Delhi High Court Rejects Centre Review Plea Over Rs 5400 Grade Pay for CRPF Inspectors
सीआरपीएफ - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के इंस्पेक्टरों को 5400 रुपये का ग्रेड 'पे' यानी वित्तीय लाभ देने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य प्रतिवादियों की रिव्यू पिटीशन संख्या 300/2026 खारिज कर दी है। 'गजेंद्र सिंह एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य' मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 25 सितंबर को यह फैसला दिया है। अपने आदेश में अदालत ने 10 मार्च 2025 का वह निर्देश बरकरार रखा है, जिसमें आईटीबीपी इंस्पेक्टर सुशील कुमार की तर्ज पर सभी तय मापदंड पूरे करने वाले सीआरपीएफ इंस्पेक्टरों को उक्त वित्तीय फायदा देने की बात कही गई थी। इस फैसले के खिलाफ सरकार, रिव्यू पिटीशन में चली गई, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। 
विज्ञापन


फायदे का दावा करने के हकदार नहीं
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता, छठे वेतन आयोग के 29 अगस्त 2008 के रिजॉल्यूशन के तहत किसी भी फायदे का दावा करने के हकदार नहीं हैं। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में दिल्ली हाईकोर्ट के रमेश चंद्र शर्मा बनाम भारत संघ और अन्य के मामले का (2025) हवाला दिया। 
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने दिया था केस को अंतिम रूप
इसके जवाब में वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर छिब्बर ने कहा कि आईटीबीपी के इंस्पेक्टर 'सुशील कुमार बनाम भारत संघ एवं अन्य' के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस संबंध में दायर एसएलपी को खारिज कर केस को अंतिम स्वरूप दिया गया है। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, उन्होंने अपने दस मार्च 2025 के आदेश के तहत केवल सुशील कुमार के फैसले को लागू करने का आदेश दिया था और याचिका को ही प्रतिवेदन मानकर पात्रता की जांच कर उस पर आठ सप्ताह में फैसला लेने की बात कही थी। यही वजह रही कि हाईकोर्ट ने सरकारी वकील के किसी भी तर्क को सुनने से मना कर दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


लंबे समय से हो रही इस वित्तीय फायदे की बात 
बता दें कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के निरीक्षक लंबे समय से उस वित्तीय लाभ की मांग कर रहे हैं, जिसे वे 2008 के प्रावधान से जुड़ा बताते हैं। उनकी मांग का केंद्र 4800 रुपये ग्रेड पे में चार वर्ष की सेवा के बाद 5400 रुपये ग्रेड पे का लाभ देना है। आईटीबीपी के निरीक्षक सुशील कुमार ने सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट से यह लड़ाई जीती थी। हालांकि केंद्र सरकार इस मामले में एसएलपी में भी गई और बाद में रिव्यू पिटीशन भी किया गया, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने सरकार को कोई राहत नहीं दी।

बाकी मामलों में भी वही फैसला लागू होगा
इस केस से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने असम राइफल के याचिकाकर्ता नवीन कुमार, जो सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं, के मामले में फैसला देते हुए कहा था कि जब एक बार सुशील कुमार के मामले में निर्णय हो गया है तो उस जैसे बाकी मामलों में भी वही फैसला लागू होगा। जो फायदा किसी एक कार्मिक को मिला है तो वह बाकी को भी मिलना चाहिए। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन ने गैर-कार्यात्मक उन्नयन (एनएफयू) के इस फैसले में आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार बनाम भारत सरकार एवं अन्य, रिट पिटीशन संख्या 690/2022 को आधार बनाया था। असम राइफल का सूबेदार, बाकी केंद्रीय बलों में इंस्पेक्टर रैंक के बराबर होता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था, याचिकाकर्ता नवीन कुमार भी 5400 रुपये के ग्रेड पे का अधिकारी है। सुशील कुमार की तरह नवीन कुमार उक्त वित्तीय फायदा लेने के योग्य है। 

क्या है 5400 रुपये 'ग्रेड पे' का मामला
सीएपीएफ में वित्त मंत्रालय का 2008 में जारी हुआ एक कार्यालय ज्ञापन लागू नहीं किया जा रहा। यह केंद्र सरकार के बाकी विभागों में तो लागू होता है, लेकिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के इंस्पेक्टरों को इससे बाहर रखा जा रहा है। इस कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है कि जिन कर्मियों का 48 सौ रुपये का 'ग्रेड पे' है और वे उसमें चार साल की सेवा पूरी कर चुके हैं तो उनका 'ग्रेड पे' 54 सौ रुपये हो जाएगा। केंद्रीय बलों में इस नियम को लागू कराने के लिए निरीक्षकों को अदालत की शरण लेनी पड़ रही है। सबसे पहले आईटीबीपी इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने यह लड़ाई जीती थी। अब उन्हें 5400 रुपये का ग्रेड पे और सहायक कमांडेंट का पद मिल गया है। 


बीएसएफ इंस्पेक्टरों को नहीं मिला फायदा
'सीएपीएफ' में जवान/अधिकारी, जब भी अपनी पदोन्नति, भत्ते एवं दूसरे आर्थिक फायदे, जिनमें गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (एनएफएफयू) भी शामिल है, को लेकर अदालत से लड़ाई जीतते हैं तो उस मामले में कोई न कोई बाधा खड़ी कर दी जाती है। 48 सौ रुपये के 'ग्रेड पे' में चार साल की सेवा पूरी करने वाले इंस्पेक्टरों को 54 सौ का ग्रेड पे देना, अदालती लड़ाई जीतने के बावजूद याचिकाकर्ताओं को यह फायदा नहीं मिल सका। बीएसएफ के 129 इंस्पेक्टरों द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट से अपने हक की लड़ाई जीतने के बाद बल मुख्यालय ने अपने स्पीकिंग ऑर्डर में ऐसे तर्क दिए कि इंस्पेक्टर हैरान रह गए। कहा गया कि केंद्र सरकार के दूसरे विभागों में समान वेतनमान वाले कर्मियों को जो आर्थिक फायदे मिलते हैं, वे बीएसएफ में इंस्पेक्टरों 'जीडी' के लिए नहीं हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed