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एफसीआरए संशोधन विधेयक: संसदीय समिति के सदस्यों ने क्यों की बैठक स्थगित करने की मांग? चार हफ्तों का मांगा समय
Tue, 29 Sep 2026 06:46 PM IST
देवेश त्रिपाठी
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Tue, 29 Sep 2026 06:46 PM IST
सार
एफसीआरए संशोधन विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति के कुछ सदस्यों ने 12 अक्तूबर की प्रस्तावित बैठक को कम से कम चार सप्ताह के लिए स्थगित करने की मांग की है। कांग्रेस सांसद एंटो एंटनी समेत सदस्यों ने समिति अध्यक्ष संजय जायसवाल को पत्र लिखकर विधेयक और संबंधित दस्तावेजों के अध्ययन के लिए अधिक समय मांगा है।
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संसदीय समिति के अध्यक्ष संजय जायसवाल को लिखा पत्र
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
विदेशी अंशदान विनियमन (एफसीआरए) संशोधन विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति के कुछ सदस्यों ने समिति के अध्यक्ष संजय जायसवाल से 12 अक्तूबर को प्रस्तावित बैठक स्थगित करने की मांग की है।
29 सितंबर को लिखे गए पत्र में कांग्रेस सांसद एंटो एंटनी समेत समिति के सदस्यों ने बैठक को कम से कम चार सप्ताह के लिए टालने का अनुरोध किया है। सदस्यों ने कहा कि प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन कानून के महत्व और व्यापक प्रभावों को देखते हुए उन्हें विधेयक और इससे जुड़े दस्तावेजों का विस्तार से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय चाहिए।
संसदीय समिति के सदस्यों ने दिए क्या सुझाव?
सदस्यों ने जनता की टिप्पणियों, सुझावों और संबंधित पक्षों के अभ्यावेदनों को प्राप्त करने की अवधि भी कम से कम चार सप्ताह तक खुली रखने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे संगठन, विशेषज्ञ और आम लोग विधेयक को लेकर अपनी राय समिति के सामने रख सकेंगे।
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पत्र में कहा गया है कि पर्याप्त समय मिलने से समिति के सदस्य प्राप्त अभ्यावेदनों पर उचित तरीके से विचार कर सकेंगे। इसके बाद विधेयक पर अधिक व्यापक और सूचित तरीके से चर्चा की जा सकेगी। भाजपा सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता में 31 सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति को एफसीआरए कानून के प्रावधानों की विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश करनी है।
क्या है एफसीआरए संसोधन विधेयक?
एफसीआरए कानून विदेशी अंशदान या विदेशी आतिथ्य को स्वीकार करने और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है। कानून में राष्ट्रीय हितों के लिए नुकसानदायक गतिविधियों के लिए ऐसे विदेशी अंशदान या आतिथ्य के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रावधान भी है।
विदेशी फंड प्राप्त करने वाले सभी संगठनों और गैर सरकारी संगठनों के लिए एफसीआरए के तहत पंजीकरण अनिवार्य है। इन संगठनों की गतिविधियों की निगरानी गृह मंत्रालय बतौर नोडल प्राधिकरण करता है। एफसीआरए संशोधन विधेयक इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्षी दलों की मांग के बाद इसे 12 अगस्त को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था। विपक्षी दलों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी।
विपक्षी दलों ने एफसीआरए विधेयक पर लगाए थे क्या आरोप?
विपक्षी दलों ने विधेयक पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए आरोप लगाया है कि इसके कुछ प्रावधान अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हैं। उनका दावा है कि प्रस्तावित प्रावधान ईसाई गैर सरकारी संगठनों और अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित सामाजिक कल्याण तथा शैक्षणिक संस्थानों के वैध विदेशी वित्तपोषण को प्रभावित कर सकते हैं।
आरोपों को खारिज कर सरकार ने दिया क्या जवाब?
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29 सितंबर को लिखे गए पत्र में कांग्रेस सांसद एंटो एंटनी समेत समिति के सदस्यों ने बैठक को कम से कम चार सप्ताह के लिए टालने का अनुरोध किया है। सदस्यों ने कहा कि प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन कानून के महत्व और व्यापक प्रभावों को देखते हुए उन्हें विधेयक और इससे जुड़े दस्तावेजों का विस्तार से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय चाहिए।
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संसदीय समिति के सदस्यों ने दिए क्या सुझाव?
सदस्यों ने जनता की टिप्पणियों, सुझावों और संबंधित पक्षों के अभ्यावेदनों को प्राप्त करने की अवधि भी कम से कम चार सप्ताह तक खुली रखने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे संगठन, विशेषज्ञ और आम लोग विधेयक को लेकर अपनी राय समिति के सामने रख सकेंगे।
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पत्र में कहा गया है कि पर्याप्त समय मिलने से समिति के सदस्य प्राप्त अभ्यावेदनों पर उचित तरीके से विचार कर सकेंगे। इसके बाद विधेयक पर अधिक व्यापक और सूचित तरीके से चर्चा की जा सकेगी। भाजपा सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता में 31 सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति को एफसीआरए कानून के प्रावधानों की विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश करनी है।
क्या है एफसीआरए संसोधन विधेयक?
एफसीआरए कानून विदेशी अंशदान या विदेशी आतिथ्य को स्वीकार करने और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है। कानून में राष्ट्रीय हितों के लिए नुकसानदायक गतिविधियों के लिए ऐसे विदेशी अंशदान या आतिथ्य के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रावधान भी है।
विदेशी फंड प्राप्त करने वाले सभी संगठनों और गैर सरकारी संगठनों के लिए एफसीआरए के तहत पंजीकरण अनिवार्य है। इन संगठनों की गतिविधियों की निगरानी गृह मंत्रालय बतौर नोडल प्राधिकरण करता है। एफसीआरए संशोधन विधेयक इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्षी दलों की मांग के बाद इसे 12 अगस्त को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था। विपक्षी दलों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी।
विपक्षी दलों ने एफसीआरए विधेयक पर लगाए थे क्या आरोप?
विपक्षी दलों ने विधेयक पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए आरोप लगाया है कि इसके कुछ प्रावधान अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हैं। उनका दावा है कि प्रस्तावित प्रावधान ईसाई गैर सरकारी संगठनों और अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित सामाजिक कल्याण तथा शैक्षणिक संस्थानों के वैध विदेशी वित्तपोषण को प्रभावित कर सकते हैं।
आरोपों को खारिज कर सरकार ने दिया क्या जवाब?
- सरकार का कहना है कि विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता के लिए सामान्य कानूनी प्रक्रियाएं लागू की जा रही हैं और किसी खास समुदाय को निशाना नहीं बनाया जा रहा है।
- सरकार के मुताबिक प्रस्तावित कानून किसी धर्म विशेष से जुड़ा नहीं है। इसका उद्देश्य विदेश से मिलने वाले अंशदान को नियंत्रित करना, पारदर्शिता बढ़ाना और प्राप्त धन के उचित इस्तेमाल को सुनिश्चित करना है।
- सरकार ने विदेशी अंशदान के कथित दुरुपयोग के उदाहरण के तौर पर जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़ी घटनाओं का भी उल्लेख किया है।