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दिल्ली पुलिस की एफआईआर में उर्दू और फारसी शब्दों का चलन होगा बंद, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Wed, 27 Nov 2019 04:59 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 27 Nov 2019 04:59 PM IST
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Delhi High Court order delhi police to not use the Urdu and Farsi words in the FIR
DELHI POLICE - फोटो : Amar Ujala (File)

आजादी से पहले और उसके बाद, खासतौर पर पुलिस व अदालती कामकाज में उर्दू एवं फारसी शब्दों का जमकर इस्तेमाल होता रहा है। केवल पुलिस की बात करें तो आज भी एफआईआर यानी प्राथमिकी रिपोर्ट दर्ज करते समय उर्दू एवं फारसी के शब्दों का खुलकर प्रयोग किया जाता है। दिल्ली पुलिस में अब यह चलन बंद हो रहा है। किसी भी एफआईआर में केवल हिंदी या अंग्रेजी के शब्दों का इस्तेमाल होगा। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर दिल्ली पुलिस में ये नया नियम लागू किया जा रहा है।

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बता दें कि 1947 से पहले अंग्रेजी शासन के दौरान पुलिस, अदालत और राजस्व महकमे में जो भी कामकाज होता था, उसमें हिंदी की बजाए उर्दू या फारसी के शब्दों की संख्या ज्यादा रहती थी। जमीन की पैमाइश, अदालती आदेश या कर प्रणाली, इन सबके बारे में जब कोई आदेश सार्वजनिक किया जाता था तो उसमें उर्दू के साथ साथ फारसी के शब्द भी रहते थे।

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दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस अब उर्दू और फारसी के शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेगी।

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विशेषकर एफआईआर दर्ज करते समय इस बात का ध्यान रखा जाएगा। ऐसे शब्दों की जगह आम बोलचाल में प्रयोग होने वाले हिंदी या अंग्रेजी के शब्दों का ही इस्तेमाल होगा। इस बारे में सभी पुलिसकर्मियों को अवगत करा दिया गया है। इस मामले में हाईकोर्ट के समक्ष जनहित याचिका लगाने वाले एडवोकेट विशाल गोयल का कहना है कि उर्दू और फारसी के शब्द आम लोगों की समझ में नहीं आते हैं।

एफआईआर में तो इन दोनों भाषाओं का खूब इस्तेमाल होता है। हमनें अपनी जनहित याचिका के जरिए अदालत से मांग की थी कि कम से कम ऐसे शब्दों को एफआईआर से बाहर रखा जाए। जिन शब्दों का मतलब आम लोगों को पता ही नहीं है तो इनके इस्तेमाल का कोई औचित्य नहीं बनता।


याचिकाकर्ता का कहना है कि इनकी जगह पर आसान हिंदी या अंग्रेजी के शब्द इस्तेमाल किए जा सकते हैं। पीआईएल में यह भी कहा गया था कि पुलिस अधिकारी आम लोगों के लिए काम करते हैं। वे ऐसे लोगों के लिए काम नहीं करते हैं, जिनके पास उर्दू, हिंदी या फारसी भाषा की पीएचडी डिग्री है।

यही वजह है कि एफआईआर दर्ज करने के लिए सामान्य बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल किया जाए। दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने सभी थानों और विभिन्न शाखाओं को ये आदेश जारी कर दिए हैं।

 

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