हाई कोर्ट: जीएनसीटी संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस, चार जून को होगी सुनवाई
अदालत लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्र श्रीकांत प्रसाद की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2021 भारत के संविधान के अनुच्छेद 13, 14, 19 और 239AA का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने अदालत से अधिनियम को कम करने का आग्रह किया है।
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विस्तार
हाल ही में दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार में एक बड़ा टकराव देखने को मिला जब केंद्र सरकार ने 22 मार्च, 2021 को संसद में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2021 पारित कराया था। इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (4 मई) को केंद्र सरकार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम, 2021 (जीएनसीटी) को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है।
अदालत ने मामले को 4 जून को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा।
लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्र ने दायर की याचिकाDelhi High Court issues notice to the Centre on a plea challenging Government of National Capital Territory of Delhi (Amendment) Bill, 2021, and sets June 4 as the next date of hearing pic.twitter.com/4rL8bM3vKG
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) May 4, 2021
बता दें, अदालत लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्र श्रीकांत प्रसाद की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2021 भारत के संविधान के अनुच्छेद 13, 14, 19 और 239AA का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने अदालत से अधिनियम को कम करने का आग्रह किया है।
गरमाई सियासत
उल्लेखनीय है कि इस विधेयक के पारित होने के बाद दिल्ली की सियासत गरमा उठी थी। दिल्ली सरकार और संसद में विपक्षी दलों ने इस विधेयक को काला कानून बताते हुए लोकतंत्र के खिलाफ करार दिया था। कई विपक्षी दलों ने संसद में इस संशोधन प्रस्ताव के खिलाफ वॉकआउट किया था।
केंद्र सरकार का तर्क
इधर, केंद्र सरकार का तर्क था कि यह विधेयक कोई नया विधेयक नहीं है और इसे 1991 में लाया गया था। केंद्र ने कहा कि हम केवल इसमें जरूरी संशोधन कर रहे हैं, जिससे दिल्ली सरकार सुचारू रूप से चल सकेगी। खैर, संशोधन विधेयक लाने की असल वजह कुछ भी हो, लेकिन इसे लेकर सियासत जोरों पर है।