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हाई कोर्ट: जीएनसीटी संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस, चार जून को होगी सुनवाई

Tue, 04 May 2021 02:29 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रियंका तिवारी Updated Tue, 04 May 2021 02:29 PM IST
सार

अदालत लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्र श्रीकांत प्रसाद की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2021 भारत के संविधान के अनुच्छेद 13, 14, 19 और 239AA का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने अदालत से अधिनियम को कम करने का आग्रह किया है।

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Delhi High Court issues notice to Centre over plea challenging GNCT Amendment Act
दिल्ली हाई कोर्ट - फोटो : PTI

विस्तार

हाल ही में दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार में एक बड़ा टकराव देखने को मिला जब केंद्र सरकार ने 22 मार्च, 2021 को संसद में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2021 पारित कराया था। इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (4 मई) को केंद्र सरकार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम, 2021 (जीएनसीटी) को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है।

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अदालत ने मामले को 4 जून को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा।
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लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्र ने दायर की याचिका
बता दें, अदालत लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्र श्रीकांत प्रसाद की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2021 भारत के संविधान के अनुच्छेद 13, 14, 19 और 239AA का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने अदालत से अधिनियम को कम करने का आग्रह किया है।

गरमाई सियासत
उल्लेखनीय है कि इस विधेयक के पारित होने के बाद दिल्ली की सियासत गरमा उठी थी। दिल्ली सरकार और संसद में विपक्षी दलों ने इस विधेयक को काला कानून बताते हुए लोकतंत्र के खिलाफ करार दिया था। कई विपक्षी दलों ने संसद में इस संशोधन प्रस्ताव के खिलाफ वॉकआउट किया था। 


केंद्र सरकार का तर्क 
इधर,  केंद्र सरकार का तर्क था कि यह विधेयक कोई नया विधेयक नहीं है और इसे 1991 में लाया गया था।  केंद्र ने कहा कि हम केवल इसमें जरूरी संशोधन कर रहे हैं, जिससे दिल्ली सरकार सुचारू रूप से चल सकेगी। खैर, संशोधन विधेयक लाने की असल वजह कुछ भी हो, लेकिन इसे लेकर सियासत जोरों पर है। 

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