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पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाली माधुरी गुप्ता को हाईकोर्ट ने दी जमानत

Thu, 31 May 2018 03:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 31 May 2018 03:01 PM IST
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Delhi High Court grants bail to convicted former diplomat Madhuri Gupta
माधुरी गुप्ता
दिल्ली हाईकोर्ट ने जासूसी कांड में दोषी करार दी गई पूर्व राजनयिक माधुरी गुप्ता को जमानत दे दी है। दोषी करार दिए जाने के खिलाफ माधुरी गुप्ता की अपील पर अगली सुनवाई सितंबर में होगी। अदालत ने माधुरी गुप्ता को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को गोपनीय जानकारियां मुहैया कराने का दोषी पाया और तीन साल कैद की सजा सुनाई। अदालत ने माधुरी के इस तर्क को खारिज कर दिया कि महिला होने के नाते सहानुभूति बरती जाए। अदालत ने कहा कि उस पर गंभीर आरोप हैं और उसने देश की प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुंचाया है। माधुरी गुप्ता पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग में प्रेस एवं सूचना सचिव थी। दिल्ली पुलिस ने उसे 2010 में गिरफ्तार किया था। 
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पटियाला हाउस अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्घार्थ शर्मा ने बचाव पक्ष व सरकारी पक्ष को सुनने के बाद फैसले में कहा कि दोषी शिक्षित महिला है। यूपीएससी पास माधुरी विभिन्न देशों के दूतावास में कार्यरत रही हैं। इस घटना के समय वह पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास में काफी संवेदनशील पद पर थीं। अदालत ने कहा कि ऐसे पद पर तैनात किसी भी व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह आम नागरिक से ज्यादा जिम्मेदारी से काम करेगा। दोषी के कार्य से देश की प्रतिष्ठा को आघात लगा है। ऐसे में उनका मानना है कि वह किसी भी प्रकार से सहानुभूति की हकदार नहीं है। 
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कोर्ट ने नहीं दी थी माधुरी को सजा में रियायत

Delhi High Court grants bail to convicted former diplomat Madhuri Gupta
कोर्ट ने माधुरी गुप्ता को गोपनीयता अधिनियम की धारा तीन के तहत तीन वर्ष साधारण कैद और धारा पांच के तहत भी तीन वर्ष कैद की सजा दी है। तीनों सजाएं साथ चलेंगी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने माधुरी गुप्ता को 22 अप्रैल 2010 में गिरफ्तार किया था। उस पर गोपनीय जानकारी आईएसआई को देने और उसके दो अधिकारियों को मुबशर रजा राणा व जमशेद के संपर्क में रहने के आरोप थे। दिल्ली पुलिस ने जांच के बाद 19 जुलाई 2010 को माधुरी गुप्ता के खिलाफ गोपनीयता अधिनियम समेत कई धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने माधुरी गुप्ता के खिलाफ आपराधिक साजिश, विश्वासघात व गोपनीयता अधिनियम के तहत 12 नवंबर 2016 को आरोप तय किए थे। 

बचाव पक्ष और माधुरी के तर्क

सजा पर जिरह के दौरान बचाव पक्ष ने सहानुभूति बरतने का आग्रह करते हुए कहा कि माधुरी 23 अप्रैल 2010 से 10 जनवरी 2012 के दौरान कुल 20 माह 17 दिन जेल में रह चुकी है। जिस आरोप में उसे दोषी ठहराया गया है, उसमें अधिकतम तीन वर्ष कैद की सजा का प्रावधान है। ऐसे में जेल में काटी गई अवधि को सजा मानते हुए उसे नेकचलनी पर रिहा किया जाए। वहीं, माधुरी ने आंखों में आंसू लिए तर्क रखा कि उसके माता-पिता की जल्द मौत हो गई थी। उसका एक भाई तीन दशक से यूएस में रह रहा है। इस मामले के कारण नौकरी से बर्खास्त होने पर वह रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली सभी सुविधाओं से वंचित हो चुकी है। एक सीनियर सिटीजन व परिस्थितियों से पीड़ित महिला होने के नाते उसके साथ सहानुभूति बरती जाए। 
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