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दिल्ली हाईकोर्ट : सभी बाल विवाह को अमान्य ठहराने की मांग, आप सरकार से मांगा जवाब
Mon, 11 Jan 2021 07:40 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 11 Jan 2021 07:40 PM IST
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delhi high court
- फोटो : PTI
दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में हुए सभी बाल विवाह को सिरे से अमान्य (अवैध) करार देने का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर सोमवार को आप सरकार से जवाब मांगा। याचिकाकर्ता ने बाल विवाह निषेध अधिनियम के उस प्रावधान को चुनौती दी है जो नाबालिगों की शादी को तभी शून्यकरणीय मानता है, जब दोनों में से एक ने ऐसी मांग की हो और वह शादी के वक्त नाबालिग रहा हो।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया और एक महिला की याचिका पर उसका रुख जानना चाहा। याचिकाकर्ता एक महिला ने उसके नाबालिग रहने के दौरान कथित रूप से की गई उसकी शादी को अमान्य करार देने का भी अनुरोध किया है।
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अदालत ने महिला के पिता, भाई और उसके पति से मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 फरवरी से पहले जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता के वकील तनवीर अहमद मीर ने अदालत से आग्रह किया है कि राज्य में हर बाल विवाह को सिरे से अमान्य ठहराया जाए।
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मीर ने अदालत से कहा कि उनकी मुवक्किल की अप्रैल 2010 में जब शादी हुई थी तब वह नाबालिग थी और उससे पहले वह किसी अज्ञात स्थान पर रह रही थी, क्योंकि उसे आशंका थी कि उसके परिवार वाले उससे जबरन शादी के लिए हां करवा लेंगे।
मामी के बेटे से करवा दी गई थी शादी
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसकी शादी उसकी मामी के बेटे से करवा दी गई। उसका यह भी दावा है कि वह 10 दिसंबर, 1993 को पैदा हुई थी और जब अप्रैल, 2010 में उसका ब्याह कराया गया तब उसके पास इसके लिए हां करने के सिवा कोई चारा नहीं था। क्योंकि वह दसवीं के परीक्षा परिणाम का इंतजार कर रही थी और अपने माता-पिता की मर्जी के खिलाफ नहीं जा सकी।
महिला ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते हुए वह अपने माता-पिता के साथ 19 दिसंबर 2020 तक शांति से रह रही थी कि उसका पति उसे अपने साथ गुजरात ले जाने के लिए आया। जब विरोध किया तब उसके भाई ने उसके पति के इशारे पर सभी के सामने उसकी कथित रूप से पिटाई की। तब से वह भागती फिर रही है। उसने सुरक्षा भी मांगी है।