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Mahua Moitra: सरकारी आवास मामले में संपदा निदेशालय में अपील करें, हाईकोर्ट का महुआ मोइत्रा को निर्देश
Thu, 04 Jan 2024 01:48 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 04 Jan 2024 01:48 PM IST
सार
जस्टिस सुब्रमण्यन प्रसाद ने कहा कि नियमों के तहत किसी रहवासी को एक निश्चित समय के बाद भी सरकारी आवास में रहने की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने महुआ मोइत्रा से कहा कि वह संपदा निदेशालय में याचिका दायर करें, वहां कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।
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महुआ मोइत्रा
- फोटो : amar ujala
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को लोकसभा से निष्कासित टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा को सरकारी आवास में रहने की इजाजत के लिए संपदा निदेशालय जाने को कहा है। जस्टिस सुब्रमण्यन प्रसाद ने कहा कि नियमों के तहत किसी रहवासी को एक निश्चित समय के बाद भी सरकारी आवास में रहने की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने महुआ मोइत्रा से कहा कि वह संपदा निदेशालय में याचिका दायर करें, वहां कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।
कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को याचिका वापस लेने की दी अनुमति
कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। साथ ही कहा कि किसी भी रहवासी से आवास खाली कराने से पहले उसे नोटिस देना जरूरी है। अपनी याचिका में महुआ मोइत्रा ने अपील की थी कि संपदा निदेशालय के 11 दिसंबर के आदेश पर रोक लगे और 2024 के लोकसभा चुनाव तक उन्हें सरकारी आवास में रहने की अनुमति दी जाए। बता दें कि सांसदों को सरकारी आवास सरकार के संपदा निदेशालय द्वारा ही आवंटित किए जाते हैं।
इस मामले में गई महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता
टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा को अनैतिक आचरण का दोषी मानते हुए बीती 8 दिसंबर 2023 को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी से संसद में सवाल पूछने के बदले महंगे गिफ्ट लिए और साथ ही उद्योगपति के साथ अपने संसदीय लॉगइन और पासवर्ड भी साझा किए। संसद की आचरण संबंधी समिति की रिपोर्ट के आधार पर टीएमसी नेता को संसद सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया था। महुआ मोइत्रा ने अपने निष्कासन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हुई है।
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कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को याचिका वापस लेने की दी अनुमति
कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। साथ ही कहा कि किसी भी रहवासी से आवास खाली कराने से पहले उसे नोटिस देना जरूरी है। अपनी याचिका में महुआ मोइत्रा ने अपील की थी कि संपदा निदेशालय के 11 दिसंबर के आदेश पर रोक लगे और 2024 के लोकसभा चुनाव तक उन्हें सरकारी आवास में रहने की अनुमति दी जाए। बता दें कि सांसदों को सरकारी आवास सरकार के संपदा निदेशालय द्वारा ही आवंटित किए जाते हैं।
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इस मामले में गई महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता
टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा को अनैतिक आचरण का दोषी मानते हुए बीती 8 दिसंबर 2023 को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी से संसद में सवाल पूछने के बदले महंगे गिफ्ट लिए और साथ ही उद्योगपति के साथ अपने संसदीय लॉगइन और पासवर्ड भी साझा किए। संसद की आचरण संबंधी समिति की रिपोर्ट के आधार पर टीएमसी नेता को संसद सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया था। महुआ मोइत्रा ने अपने निष्कासन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हुई है।
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