{"_id":"6ae1e71ef27cd58b0d0878bf","slug":"delhi-hc-dismisses-cockroach-janta-party-pil-compensation-approach-supreme-court-2026-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली: सीजेपी से 50 करोड़ मुआवजे की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से हाईकोर्ट का इनकार, याचिकाकर्ता को क्या कहा?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
दिल्ली: सीजेपी से 50 करोड़ मुआवजे की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से हाईकोर्ट का इनकार, याचिकाकर्ता को क्या कहा?
Wed, 28 Oct 2026 05:50 PM IST
अमन मौर्या
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: अमन मौर्या
Updated Wed, 28 Oct 2026 05:50 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रदर्शनों से हुई परेशानी के मुआवजे के लिए 50 करोड़ जमा कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है और याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट जाने को कहा है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobestock
विस्तार
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) को 50 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। यह रकम राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों को पार्टी के विरोध प्रदर्शनों के कारण हुई कथित परेशानी और व्यवधान के लिए अंतरिम मुआवजे के तौर पर मांगी गई थी। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करें। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इसी तरह के मामलों पर विचार कर रहा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी हाई कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में ऐसे ही मामलों पर सुनवाई चल रही है।
ये भी पढ़ें: गुजरात: पाकिस्तान-बांग्लादेश से भेजे जा रहे थे धमकी भरे ई-मेल, आरोपियों ने बताया कैसे ऑपरेट होता था नेटवर्क
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अनुशासन के तहत ऐसी स्थिति में उसे इस मामले की कार्यवाही से दूर रहना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि उसे ऐसा कोई आदेश नहीं देना चाहिए जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत हो। खंडपीठ ने कहा, 'न्यायिक अनुशासन की मांग है कि ऐसी स्थिति में यह अदालत कार्यवाही से खुद को दूर रखे और कोई ऐसा आदेश न दे जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से टकराता हो।' इसके बाद, कोर्ट ने वकील राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर जनहित याचिका का निपटारा कर दिया और उन्हें अपनी मांग के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने को कहा।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: असम: धुबरी में बाल विवाह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 54 पतियों समेत 80 गिरफ्तार; पॉक्सो अधिनियम के तहत केस दर्ज
क्या है याचिकाकर्ता की मांग?
अपनी याचिका में, सैनी ने मांग की थी कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) को 50 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया जाए। यह रकम पार्टी के विरोध प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के निवासियों को हुई कथित परेशानी और असुविधा के लिए अंतरिम मुआवजे के तौर पर मांगी गई थी। याचिका में एक उच्च-स्तरीय समिति बनाने की भी मांग की गई थी, जो प्रभावित नागरिकों के दावों का आकलन करे और मुआवजे की राशि तय करे। इसमें आरोप लगाया गया था कि विरोध प्रदर्शनों ने आम जनजीवन को बाधित किया, जिससे व्यापारियों, यात्रियों, दफ्तर जाने वालों और स्कूली बच्चों को परेशानी हुई। याचिकाकर्ता ने अधिकारियों को यह निर्देश देने की भी मांग की थी कि वे उचित मुआवजे के लिए कार्यवाही शुरू करें और प्रभावित लोगों को अंतरिम राहत देने के लिए एक फंड बनाएं।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: गुजरात: पाकिस्तान-बांग्लादेश से भेजे जा रहे थे धमकी भरे ई-मेल, आरोपियों ने बताया कैसे ऑपरेट होता था नेटवर्क
विज्ञापन
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अनुशासन के तहत ऐसी स्थिति में उसे इस मामले की कार्यवाही से दूर रहना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि उसे ऐसा कोई आदेश नहीं देना चाहिए जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत हो। खंडपीठ ने कहा, 'न्यायिक अनुशासन की मांग है कि ऐसी स्थिति में यह अदालत कार्यवाही से खुद को दूर रखे और कोई ऐसा आदेश न दे जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से टकराता हो।' इसके बाद, कोर्ट ने वकील राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर जनहित याचिका का निपटारा कर दिया और उन्हें अपनी मांग के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने को कहा।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: असम: धुबरी में बाल विवाह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 54 पतियों समेत 80 गिरफ्तार; पॉक्सो अधिनियम के तहत केस दर्ज
क्या है याचिकाकर्ता की मांग?
अपनी याचिका में, सैनी ने मांग की थी कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) को 50 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया जाए। यह रकम पार्टी के विरोध प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के निवासियों को हुई कथित परेशानी और असुविधा के लिए अंतरिम मुआवजे के तौर पर मांगी गई थी। याचिका में एक उच्च-स्तरीय समिति बनाने की भी मांग की गई थी, जो प्रभावित नागरिकों के दावों का आकलन करे और मुआवजे की राशि तय करे। इसमें आरोप लगाया गया था कि विरोध प्रदर्शनों ने आम जनजीवन को बाधित किया, जिससे व्यापारियों, यात्रियों, दफ्तर जाने वालों और स्कूली बच्चों को परेशानी हुई। याचिकाकर्ता ने अधिकारियों को यह निर्देश देने की भी मांग की थी कि वे उचित मुआवजे के लिए कार्यवाही शुरू करें और प्रभावित लोगों को अंतरिम राहत देने के लिए एक फंड बनाएं।