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दिल्ली सरकार ने कहा- PUBG, हिटमैन, फोर्टनाइट हैं हिंसक वीडियो गेम्स, बच्चों को बना रहे मानसिक बीमार
Wed, 06 Feb 2019 10:01 AM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 06 Feb 2019 10:01 AM IST
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pubg game
- फोटो : Engadget
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पबजी यानि प्लेयर अननोन बैटल ग्राउंड गेम और इसके जैसे कई ऑनलाइन गेम्स से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। दिल्ली सरकार के दिल्ली कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (डीसीपीसीआर) ने सभी स्कूलों को भेजे नोट भेज कर उन्हें आगाह किया कि पबजी, फोर्टनाइट, हिटमैन और पोकेमोन गो जैसे ऑनलाइन और वीडियो गेम बच्चों के लिए खतरनाक हैं। ये बच्चों को मानिसक तौर पर प्रभावित करते हैं।
बच्चों के माता-पिता को भेजे गए इस नोट में कहा गया है, "ये गेम्स महिला-विरोधी, नफरत, छल-कपट और बदला लेने की भावना से भरे हुए हैं। एक ऐसी उम्र जबकि बच्चे चीजें सीखते हैं, यह उनके जीवन और मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
डीसीपीसीआर की सदस्य रंजना प्रसाद ने कहा, "इन हिंसक वीडियो गेम्स की वजह से बच्चों का बचपन छिन रहा है।"
अभिभावकों को भेजे नोट में ग्रैंड थेफ्ट ऑटो, गॉड ऑफ वॉर जैसे गेम्स का भी जिक्र है। ये ऑनलाइन गेम्स स्मार्टफोन पर उपलब्ध हैं। हालांकि नोट में इन नकारात्मक खेलों के पैदा होने वाले लक्षण और बच्चों को इससे दूर रखने के उपाय भी बताए गए हैं।
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नौकरीपेशा युवा भी डॉक्टरों के पास काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। इन युवाओं को फोन पर पबजी खेलना इतना पसंद है कि ये ऑफिस का पूरा लंच टाइम इसी में खपा देते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि ब्लू व्हेल के बाद पबजी दूसरा सबसे ज्यादा लत लगाने वाले गेम के रूप में सामने आया है। जबकि और भी गेम मनोरंजन की जगह अब तनाव का कारण बन रहे हैं।
हाल ही में गुजरात सरकार ने स्कूली छात्रों के लिए पबजी पर बैन लगा दिया था। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो साल में गेम्स के आदी बच्चे तीन गुना बढ़े हैं।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि ये पबजी और फ्रंटलाइन क्या है? मोदी ने आगे कहा- 'बच्चों को तकनीक से दूर नहीं रख सकते। तकनीक का इस्तेमाल सुधार के लिए हो और माता-पिता अपने बच्चों को तकनीक की सही जानकारी दें। ऑनलाइन गेम समस्या भी है और समाधान भी। बच्चे प्ले-स्टेशन से प्ले-फील्ड की ओर जाएं। सोशल स्टेटस के कारण टेंशन में ना आएं।'
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बच्चों के माता-पिता को भेजे गए इस नोट में कहा गया है, "ये गेम्स महिला-विरोधी, नफरत, छल-कपट और बदला लेने की भावना से भरे हुए हैं। एक ऐसी उम्र जबकि बच्चे चीजें सीखते हैं, यह उनके जीवन और मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
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डीसीपीसीआर की सदस्य रंजना प्रसाद ने कहा, "इन हिंसक वीडियो गेम्स की वजह से बच्चों का बचपन छिन रहा है।"
अभिभावकों को भेजे नोट में ग्रैंड थेफ्ट ऑटो, गॉड ऑफ वॉर जैसे गेम्स का भी जिक्र है। ये ऑनलाइन गेम्स स्मार्टफोन पर उपलब्ध हैं। हालांकि नोट में इन नकारात्मक खेलों के पैदा होने वाले लक्षण और बच्चों को इससे दूर रखने के उपाय भी बताए गए हैं।
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एम्स में बढ़े बाल मरीज
इस ऑनलाइन गेम ने एम्स में बाल मरीजों की संख्या बढ़ा दी है। इनमें पबजी के ही हर सप्ताह चार से पांच नए मरीज पहुंच रहे हैं। गेम की लत में डूबे मरीजों की उम्र 8 से 22 साल तक के बीच है।नौकरीपेशा युवा भी डॉक्टरों के पास काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। इन युवाओं को फोन पर पबजी खेलना इतना पसंद है कि ये ऑफिस का पूरा लंच टाइम इसी में खपा देते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि ब्लू व्हेल के बाद पबजी दूसरा सबसे ज्यादा लत लगाने वाले गेम के रूप में सामने आया है। जबकि और भी गेम मनोरंजन की जगह अब तनाव का कारण बन रहे हैं।
हाल ही में गुजरात सरकार ने स्कूली छात्रों के लिए पबजी पर बैन लगा दिया था। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो साल में गेम्स के आदी बच्चे तीन गुना बढ़े हैं।
जब पीएम मोदी बोले- ये पबजी वाला है क्या?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते 29 जनवरी को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में स्कूली बच्चों और अभिभावकों से परीक्षा पे चर्चा 2.0 कार्यक्रम के तहत रू-ब-रू थे। कार्यक्रम के दौरान मधुमिता गुप्ता ने पीएम मोदी से एक सवाल पूछा कि बच्चों को ऑनलाइन मोबाइल गेम से कैसे दूर रखें। इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा- ये पबजी वाला है क्या। पबजी का नाम लेते ही पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा।पीएम मोदी ने आगे कहा कि ये पबजी और फ्रंटलाइन क्या है? मोदी ने आगे कहा- 'बच्चों को तकनीक से दूर नहीं रख सकते। तकनीक का इस्तेमाल सुधार के लिए हो और माता-पिता अपने बच्चों को तकनीक की सही जानकारी दें। ऑनलाइन गेम समस्या भी है और समाधान भी। बच्चे प्ले-स्टेशन से प्ले-फील्ड की ओर जाएं। सोशल स्टेटस के कारण टेंशन में ना आएं।'