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स्कूल में दाखिले के लिए भटक रहे हैं पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी बच्चे, सर्टिफिकेट के बावजूद किया इंकार
Tue, 24 Sep 2019 08:10 PM IST
Harendra Chaudhary
अमित शर्मा, अमर उजाला
अमित शर्मा, अमर उजाला
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 24 Sep 2019 08:10 PM IST
सार
- वर्ष 2016 में मधु को सुषमा स्वराज के दखल के बाद मिला था दाखिला
- मधु के पास नहीं था पिछली शिक्षा का कोई रिकॉर्ड
- उसी स्कूल ने तीन पाकिस्तानी मूल के बच्चों को उम्र के आधार पर दाखिला देने से किया इंकार
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Pakistani hindu refugee
- फोटो : AmarUjala
विस्तार
पाकिस्तान से भागकर भारत आए हिंदू शरणार्थियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दक्षिणी दिल्ली के एक स्कूल ने तीन पाकिस्तानी भाई-बहनों को स्कूल से यह कहकर निकाल दिया है कि उनकी उम्र नवीं कक्षा में पढ़ने के लिहाज से बहुत ज्यादा है। अब बच्चों के माता-पिता उनका एडमिशन कराने के लिए कभी स्कूल तो कभी स्थानीय विधायक के घर के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें दाखिला नहीं मिल पाया है। बच्चों के अभिभावकों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर उनका नामांकन कराने की अपील की है।
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इस साल मई में आए थे भारत
दरअसल, पाकिस्तान में हिंदुओं का उत्पीड़न बहुत ज्यादा बढ़ जाने के बाद संजिनी बाई (16 वर्ष), रवि कुमार (17 वर्ष) और मूना कुमारी (18 वर्ष) इसी साल मई 2019 में अपने परिवार के साथ भारत आए थे। वहां से आने के बाद जुलाई महीने में उन्होंने दिल्ली के शिक्षा विभाग में अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। संजिनी और मूना कुमार के पास पाकिस्तान के एक स्कूल से आठवीं कक्षा में पास करने का प्रमाण पत्र भी है, जबकि रवि कुमार के पास भी दसवीं की परीक्षा देने का प्रमाण पत्र है।
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पहले मिल गई थी अनुमति
तीनों ही बच्चों ने नवीं कक्षा में पढ़ने के लिए अनुमति मांगी थी। रजिस्ट्रेशन के बाद बच्चों को स्कूल में बैठने की अनुमति मिल गई थी, लेकिन गत 14 सितंबर को स्कूल ने उन्हें यह कहकर निकाल दिया कि उनकी उम्र नवीं कक्षा में पढ़ने के लिहाज से बहुत ज्यादा है, जिसके बाद से ही बच्चों का संघर्ष जारी है। बच्चों के परिवारवालों ने अमर उजाला को बताया कि उनके कई प्रयास के बाद भी स्कूल बच्चों का दाखिला लेने को तैयार नहीं है।
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