फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Delhi govt must take blame for granting permission to fell 422 trees: SC

Supreme Court: 'दिल्ली सरकार को लेनी चाहिए 442 पेड़ों की कटाई की जिम्मेदारी', शीर्ष अदालत की सख्त टिप्पणी

Wed, 17 Jul 2024 06:32 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 17 Jul 2024 06:32 PM IST
सार

Supreme Court: राजधानी दिल्ली में पेड़ों की कटाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट काफी सख्त हो चुका है। बता दें कि दिल्ली सरकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 442 पेड़ों की कटाई की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार को लेनी चाहिए।

विज्ञापन
Delhi govt must take blame for granting permission to fell 422 trees: SC
पेड़ों की कटाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पर्यावरण के प्रति चिंता जताते हुए देश की शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार पर बड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार ने पर्यावरण को बचाने में संवेदनशीलता नहीं दिखाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार को 442 पेड़ों के कटाई की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। क्योंकि दिल्ली सरकार ने साउर्थन रिज रिजर्व फॉरेस्ट इलाके के 442 पेड़ों को काटने की अनुमति दिल्ली विकास प्राधिकरण को दी। जबकि दिल्ली सरकार के पास ऐसी अनुमति देने के लिए कोई शक्ति नहीं है। बता दें कि इन पेड़ों को काटने की अनुमति सड़क बनाने के लिए दी गई थी।
विज्ञापन


राजधानी में पेड़ों की कटाई पर SC ने खुद लिया संज्ञान
मामले में न्यायमूर्ति अभय एस ओका और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि यह एक स्वीकार्य स्थिति है, जैसा कि अधिकारी की तरफ से दिए गए बयान से पता चलता है कि 422 पेड़ों को काटने के लिए अधिकारी ने कोई अनुमति नहीं दी थी। बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए रिज वन में 1,100 पेड़ों को कथित रूप से काटने के मामले में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष के खिलाफ खुद संज्ञान लेने के बाद से अवमानना कार्यवाही की सुनवाई कर रहा था।
विज्ञापन


'दिल्ली सरकार को 442 पेड़ों के कटाई की जिम्मेदारी लेनी चाहिए'
पीठ ने 12 जुलाई को दिए आदेश में कहा कि, दिल्ली सरकार को 422 पेड़ों को गिराने की अनुमति देने का दोष स्वीकार करना चाहिए, हालांकि दिल्ली सरकार को ऐसी अनुमति देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। पीठ ने आगे कहा, इस प्रकार, रिज क्षेत्र के पेड़ों के अलावा, सरकार ने दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 के तहत अनुमति के बिना रिज क्षेत्र के बाहर के पेड़ों को काटने और गिराने में भी मदद की।
विज्ञापन
विज्ञापन


'सरकार ने पर्यावरण सुरक्षा में दिखाई असंवेदनशीलता'
शीर्ष अदालत ने कहा कि डीडीए की तरह, दिल्ली सरकार ने पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता की कमी दिखाई है। पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार ने वृक्ष अधिकारी और वृक्ष प्राधिकरण को कार्यालय या बुनियादी ढांचा भी उपलब्ध नहीं कराया है। पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार को अदालत के सामने आना चाहिए और बताना चाहिए कि वह अपने अवैध कृत्यों के कारण पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई कैसे करेगी।

'पेड़ों को काटने की अनुमति देने का ये पहला मामला नहीं'
दिल्ली सरकार के हलफनामे से यह भी पता चलता है कि यह एकमात्र ऐसा मामला नहीं है, जहां दिल्ली सरकार के वन विभाग ने पेड़ों को काटने की अनुमति देने का दावा किया है। उन्होंने पहले भी ऐसा किया है। पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार का रुख यह है कि डीडीए ने स्वीकार किया है कि उन्होंने दिल्ली सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं को गलत पढ़ा था। इससे दिल्ली सरकार पेड़ों की कटाई की अनुमति देने वाले आदेश पारित करने की अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाएगी।


सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा पिछले पांच साल का ब्यौरा
शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली सरकार को उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई रिपोर्ट, यदि कोई हो, पेश करनी चाहिए, जिन पर पेड़ों की कटाई की अनुमति देने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि कि पिछले पांच वर्षों में दिल्ली सरकार ने कितनी ऐसी अनुमतियां दी हैं और उन सभी अनुमतियों को पेश करें। वहीं दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सोंधी ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि कार्यालय का बुनियादी ढांचा, कर्मचारी और आवश्यक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर छह सप्ताह के भीतर वृक्ष प्राधिकरण और वृक्ष अधिकारी को उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed