फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   delhi government schools check students not know counting to 100 arvind kejriwal

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों को 1 से 100 तक हिंदी में गिनती नहीं बोलनी आती

Sat, 09 Feb 2019 02:14 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Published by: Jitendra Bhardwaj Updated Sat, 09 Feb 2019 02:14 PM IST
विज्ञापन
delhi government schools check students not know counting to 100 arvind kejriwal
प्रतीकात्मक तस्वीर

हम देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हैं। बात कर रहे हैं सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चो की। बचपन में दादा-दादी या नाना-नानी खूब रटाते थे, बोलो एक, दो, तीन, चार ...पैंसठ, सत्तर, उन्यासी, पिच्यासी, नब्बे और पूरे सौ। जब ‘सौ’ आता था तो बच्चे थोड़ा उछल कर या जोश भरे लहजे में बोलते थे 'सौ'। यह सब सिखाने की कोई फीस भी नहीं लगती थी। सिखाने वाले के लिए कोई डिग्रीधारक होना भी जरुरी नहीं था। आज देखिये, दिल्ली में स्कूली बच्चों को हिंदी में 1 से 100 तक गिनती बोलनी नहीं आती। खासतौर पर पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक के अधिकांश बच्चों से हिंदी में जब गिनती बोलने को कहें तो वे मुश्किल से पचास तक का सफर पूरा कर पाते हैं।

विज्ञापन


दिल्ली सरकार का वह शिक्षा विभाग, जो अपनी शिक्षा नीति को लेकर आए दिन देश-दुनिया के सामने अपनी पीठ थपथपाता है, ने सभी स्कूलों को एक सर्कुलर जारी किया है। विषय है: हिंदी में एक से लेकर सौ तक गिनती। इसमें लिखा कि सामान्य तौर से विद्यार्थी हिंदी में गिनती गिनने में सक्षम नहीं हैं। दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत सभी स्कूलों को यह निर्देश दिया जाता है कि वे बच्चों को एक से सौ तक हिंदी में गिनती बोलना, सिखाने का हर संभव प्रयास करें।

विज्ञापन

यह सर्कुलर शिक्षा विभाग के अलावा दिल्ली हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष को भेजा गया है। सरकारी स्कूलों के अधिकारियों से जब बातचीत की गई तो उन्होंने पहली शर्त यह रख दी कि उनका नाम कहीं नहीं आना चाहिए।



यह आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने बताया, हां यह सही है कि बच्चों को हिंदी में गिनती बोलनी नहीं आती। बहुत से ऐसे बच्चे हैं जो पचास तक भी नहीं पहुंच पाते। कुछ ऐसे हैं जो सीधे दस, बीस, तीस, चालीस, पचास और साठ आदि तो बोल लेते हैं, मगर इनके बीच में क्या है, यहां वे अटक जाते हैं। इसका मुख्य कारण है कि बच्चों को नर्सरी, पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा में गिनती बोलना नहीं सिखाया गया। ऐसा नहीं हैं कि स्टाफ नहीं है। इसके लिए कोई अलग से प्रयास भी नहीं करना होता। खेल खेल में बच्चों को यह सब सिखाया जा सकता है। इसके लिए तो कहीं न कहीं स्कूल प्रशासन दोषी है।

अब विभाग की नींद टूटी है।देखते हैं कि आठवीं तक के बच्चों को हिंदी में गिनती बोलना कैसे सिखाया जाए। स्कूलों में लैटर भेजा गया है।जल्द ही प्रगति रिपोर्ट तलब की जाएगी। बता दें कि दिल्ली में टीचर-स्टूडेंट अनुपात 30 है।
 

दिल्ली में स्कूलों की स्थिति पर एक नजर...

  • 2012-13 में शिक्षा का बजट 5491 करोड़ रुपये था
  • 2017-18 में यह बजट 11300 करोड़ रुपये कर दिया गया 
  • कुल बजट का 23.54 फीसदी शिक्षा पर खर्च हो रहा है 
  • 2012-13 के दौरान दिल्ली में कुल 5155 स्कूल थे, 
  • 2016-17 में स्कूलों की संख्या बढ़कर 5772 हो गई 
  • 2012-13 में 42.68 लाख बच्चे स्कूलों में एनरॉल थे 
  • 2016-17 में 44.43 लाख बच्चे स्कूलों में दाखिल थे 
  • दिल्ली में ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडेक्ट स्पेंट ऑन एजुकेशन 1.65 था 
  • 2012-13 में सरकार द्वारा प्रतिवर्ष वहन किया जाने वाला प्रति स्टूडेंट खर्च 29641 रुपये था
  • 2016-17 में यह खर्च 54910 रुपये हो गया 
  • 2017-18 में इस खर्च को 61622 रुपये कर दिया
विज्ञापन

साल 2016-17 की दिल्ली के स्कूलों पर प्रज्ञा फाउँडेशन की रिपोर्ट...

संगठन स्कूल बच्चे 
एनडीएमसी 719 309724
एसडीएमसी 580 263019
ईडीएमसी 365  203353
राज्य सरकार 1017 1509514
केंद्र सरकार 46 110546 
अन्य 3004 1825081
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed