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Hindi News ›   India News ›   Delhi Election : Women, youth, poor and minorities will decide the fate of Delhi even in 2025

Delhi Election 2025: महिला, युवा,गरीब और अल्पसंख्यक 2025 में भी तय करेंगे दिल्ली का भाग्य

Sat, 11 Jan 2025 11:43 AM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sat, 11 Jan 2025 11:43 AM IST
सार

Delhi Election 2025: दिल्ली में विधानसभा के लिए पांच फरवरी को मतदान होना है। वोटिंग से पहले राजधानी में राजनीतिक दलों का प्रचार-प्रसार जोर पकड़ चुका है। पार्टियां एक दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं।

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Delhi Election : Women, youth, poor and minorities will decide the fate of Delhi even in 2025
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को उनकी सबसे सुरक्षित सीट पर चुनौती दे दी है। हालांकि समीकरण के लिहाज से भाजपा के प्रत्याशी प्रवेश वर्मा के सामने भी चुनौतियों का पहाड़ है। क्योंकि केजरीवाल 2013, 2015, 2020 में तीन बार 53 प्रतिशत से अधिक वोट पाकर चुनाव जीत चुके हैं। यह क्षेत्र भी प्रवेश वर्मा का गढ़ नहीं है, लेकिन कांग्रेस के संदीप दीक्षित के चुनाव मैदान में होने का फायदा उन्हें मिल सकता है।

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भाजपा के आईटी सेल के अमित मालवीय कहते हैं कि अभी हड़बड़ी मत दिखाइए। 10-15 दिन बाद से जमीनी झलक दिखाई देने लगेगी। आखिरी दो सप्ताह में भाजपा आप की बाजी को पलट देगी। भाजपा के ही नेता अरुण शुक्ला तर्क देते हैं कि केजरीवाल को 2013 में 53.4,2015 में 64.34 लेकिन 2020 में 61.1 फीसदी वोट मिले थे। इससे जाहिर होता है कि केजरीवाल के वोट 2020 में ही घटने शुरू हो गए थे। इसलिए अपनी सीट पर उनकी छटपटाहट साफ दिखाई दे रही है। शुक्ला कहते हैं कि  केजरीवाल से ज्यादा लड़ाई में मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना घिरी हैं। उनका तो हारना तय है, क्योंकि मुकाबले में रमेश विधूड़ी है। तीन बार के विधायक, दो बार के सांसद विधूड़ी गुर्जर हैं और दक्षिणी दिल्ली तो उनका गढ़ है। अरुण का कहना है कि वैसे भी 2020 के विधानसभा में पहला चुनाव लड़ रही मार्लेना 10 हजार से कुछ अधिक वोटों के ही अंतर से जीती थी और इस बार महिलाओं के वोट बंटवारे के लिए वहां से कांग्रेस ने अलका लांबा को उतारा है।
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जमीनी मुद्दे पर भाजपा की जमीन गीली कर रहे हैं केजरीवाल
आप के संयोजक केजरीवाल को पता है कि मुख्य मुकाबला भाजपा से ही है। पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी 15 सीटें 15 के अंतर से जीती थी। इन सीटों पर इस बार मुकाबला कड़ा होने के आसार हैं। इसलिए अपने कोर वोट बनाए रखने के लिए अरविंद केजरीवाल लगातार जनता से वादा कर रहे हैं। ताजी घोषणा में उन्होंने आरडब्ल्यूए में सुरक्षा गार्ड की तैनाती और खुर्चा दिल्ली सरकार द्वारा वहन करने का वादा किया है। सरकार बनने पर पुरानी सहूलियतों को जारी रखने के साथ महिलाओं को 2100 रुपये देने का वादा किया है। जाट आरक्षण का मुद्दा उठा दिया है और लगातार अपने अंदाज में भाजपा को घेर रहे हैं। कांग्रेस को घेर रहे हैं। वह हर हाल में अपने कोर वोटर, जिसमें महिला, अल्पसंख्यक और गरीब हैं, उन्हें सहेजे रहना चाहते हैं। दिल्ली चुनाव को लेकर सर्वे एजेंसी से जुड़े सर्वेश कुमार कहते हैं कि दिल्ली में 33-34 लाख लोग झुग्गियों में रहते हैं। इनमें अब आधे से अधिक मतदाता हैं। केजरीवाल को 2015 और 2020 में समाज के निचले ने थोक के भाव वोट दे दिया था। इसका एक बड़ा कारण 200 यूनिट की फ्री बिजली, 400 लीटर तक का मुफ्त पानी, डीटीसी बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा थी।
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कांग्रेस कहीं वोट कटवा न बन जाए?
संदीप दीक्षित तो काफी आक्रामक तरीके से कांग्रेस के चुनाव प्रचार का बीड़ा उठाए हैं। इसके अनुपात में अभी कांग्रेस के अन्य धुरंधर थोड़ा शांत हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री अजय माकन भी अभी मोर्चा नहीं खोल रहे हैं। इंडिया गठबंधन के घटक दलों ने भी दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को अकेला छोड़ दिया है। लेकिन फिर भी कांग्रेस को इस चुनाव में करिश्मा की उम्मीद है। उसे अल्पसंख्यक, महिला समेत सभी वर्गों का वोट मिलने की उम्मीद है। हारुन युसूफ तो कहते  हैं कि लोग पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के दौर को याद कर रहे हैं। इसलिए दिल्ली में बाजी पलटेगी। जबकि भाजपा की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय कहते हैं कि कहीं कांग्रेस वोट कटवा न बन जाए। न दरअसल भाजपा को भी एक डर सता रहा है। उसे लग रहा है कि सरकार विरोधी वोट में कांग्रेस भी छोटा ही सही हिस्सा ले सकती है। वैसे कांग्रेस के दिल्ली के नेताओं से बात कीजिए तो वह बिना रिकार्ड पर आए 5-7 सीट मिलने की संभावना जता रहे हैं। कांग्रेस छोड़कर आप में गए एक नेता तो कहते हैं कि दिल्ली में कांग्रेस हरियाणा के चुनाव नतीजे का बदला लेना चाहती है।  

प्रधानमंत्री ने पहले ही दे दी है सौगात
दिल्ली में चुनौती समझकर भाजपा ने जमीनी कसरत तेज कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल के शुरुआत में ही प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत गरीबों को 1678 फ्लैट का तोहफा दे दिया है। झुग्गी -झोपड़ी से लेकर निचले वर्ग में भाजपा का विस्तार कार्यक्रम लगातार चल रहा है। युवाओं को नौकरी के लिए रोजगार का मेला लगाना, आप सरकार के समय से चल रही योजनाओं को जारी रखना और इसके अलावा महिलाओं समेत सभी वर्ग के बड़ी घोषणा की योजना है। पोस्टर वॉर के सहारे भाजपा और आप एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। दरअसल 2020 के चुनाव में 1.47 करोड़ मतदाता थे। इस बार 8 लाख मतदाता बढ़े  हैं। भाजपा के रणनीतिकारों के मुताबिक आम आदमी पार्टी के प्रति लोगों की नाराजगी भी बढ़ी है और केजरीवाल की पार्टी को इस बार जनता मजा चखाएगी।

छोटे दल बिगाड़ सकते हैं बड़े-बड़े का खेल
दिल्ली चुनाव में 10 सीटों असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएमआईएम चुनाव लड़ेगी। बसपा ने भी दिल्ली विधानसभा चुनाव में जोर-शोर से चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इसके लिए मायावती के भतीजे आकाश आनंद आक्रामक अंदाज में चुनाव प्रचार करके दिल्ली को अच्छा खासा समय देने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि छोटे दल चुनाव में उतर कर दिल्ली में सरकार बनाने का दावा करने वाले दलों की मुसीबत बढ़ा सकते हैं।


एआई, सोशल मीडिया, मीम्स: देखना है कितना जमा पाते हैं धाक
आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया सेल से जुड़े सूत्र की माने तो उनके दल की भी तैयारी बड़ी है। भाजपा की आईटी सेल के नेता अमित मालवीय के उत्साह को देखकर लगता है कि इस बार का चुनाव मीम्स, सोशल मीडिया, एआई के भरपूर उपयोग के सहारे लड़ा जाएगा। कांग्रेस के एक आईटी सेल के नेता इस समय भाजपा में हैं। बताते हैं कि तैयारी जोरदार हो रही है। सूत्र का कहना है कि दिल्ली के हर वर्ग को ध्यान में रखकर इस बार प्रचार सामग्री तैयार की गई है।

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