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Election: संगठन और मोदी के दम पर भाजपा, केजरीवाल मुफ्त योजनाओं के सहारे, कांग्रेस को फिर खड़े होने का भरोसा
सार
Delhi election: भाजपा के चुनाव प्रचार में इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी जबरदस्त मेहनत की है। वहीं केजरीवाल अपने काम और योजना के सहारे इस बार मैदान में हैं। अगर कांग्रेस की बात करें तो वह अपनी खोई हुई जमीन को फिर से वापस पाने के लिए डटकर मुकाबला कर रही है।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली में चुनाव प्रचार थम चुका है। अब पांच फरवरी को मतदान होगा। चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद तीनों प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी जीत का दावा किया है। भाजपा संगठन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज और केजरीवाल-आतिशी सरकार की एंटी इनकंबेंसी फैक्टर के दम पर जीत का दावा किया है। वहीं, अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि उनकी 55 सीटें आ रही हैं, महिलाओं ने साथ दिया तो यह संख्या 60 भी हो सकती है। कांग्रेस ने अपनी मजबूत वापसी की दावेदारी की है।
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10 हजार बैठकें, 650 सभाएं- बीजेपी
भाजपा अपने मजबूत संगठन के लिए जानी जाती है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी पार्टी संगठन का जबरदस्त काम दिखाई पड़ा है। चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि इस चुनाव के लिए उनके कार्यकर्ताओं ने कड़ी मेहनत की है। उनके चार हजार से अधिक शक्ति केंद्र प्रमुखों ने लगातार बैठकें की हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, संगठन के अन्य बड़े नेताओं की 650 से अधिक जनसभाएं हुई हैं।भाजपा के सहयोगी दलों में चंद्रबाबू नायडू के अलावा जदयू और लोजपा (रामविलास पासवान) के नेताओं ने भी भाजपा को ताकत देने की कोशिश की है।
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आरएसएस-विहिप का साथ
भाजपा के चुनाव प्रचार में इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी जबरदस्त मेहनत की है। संगठन के नेता-कार्यकर्ताओं ने एक-एक बूथ की जिम्मेदारी संभाली और छोटी-छोटी बैठकों के अलावा कार्यकर्ताओं को चुनाव की ट्रेनिंग देने तक का काम संघ के नेताओं के हवाले रहा। आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने गलियों में खाक छानते हुए भाजपा के पत्रक तक बांटने का काम करते हुए देखे गए हैं। विहिप, बजरंग दल और सेवा भारती जैसे संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी इस चुनाव में भागीदारी की है। यदि भाजपा जीत हासिल करने में कामयाब रही तो इसका बड़ा श्रेय इन कार्यकर्ताओं को जाएगा।
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हर वर्ग से किए गए हैं बड़े-बड़े वादे
केजरीवाल की मुफ्त बिजली-पानी की योजना उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। माना यही जा रहा था कि उनकी इन्हीं योजनाओं के कारण कोई दूसरा दल 2015 और 2020 के चुनावों में उनके आसपास भी नहीं फटक पाया। लेकिन इस बार भाजपा ने किसी भी सेक्टर के मतदाताओं को लुभाने में कोई कमी नहीं रख छोड़ी है। पार्टी ने हर वर्ग को लुभाने के लिए बड़े चुनावी वादे किए हैं।
झुग्गी-झोपड़ी के मतदाताओं के लिए पक्के मकान की योजना, महिलाओं को 2500 रुपये हर महीने देने की घोषणा, युवाओं के लिए 50 हजार सरकारी नौकरी, 20 लाख स्वरोजगार के अवसर सहित बुजुर्गों-श्रमिकों सबको साधने की कोशिश की गई है। भाजपा नेताओं का मानना है कि इस बार वे इस मामले में केजरीवाल से बहुत आगे हैं। विशेषकर झुग्गी वालों को पक्का मकान देने की योजना और महिलाओं की योजना गेम चेंजर साबित हो सकती है।
बजट ने कर दिया खेल
भाजपा को अनुमान है कि जिस तरह केंद्र सरकार ने बजट में मध्य वर्ग को 12 लाख रुपये तक की आय को कर मुक्त कर दिया है, इससे दिल्ली का लगभग 40 लाख मतदाता वर्ग प्रभावित होगा। इन परिवारों में यदि दो मतदाता भी हों तो यह दिल्ली के एक बड़े वर्ग को प्रभावित करने वाला निर्णय साबित हो सकता है।
केजरीवाल की चुनौती
अरविंद केजरीवाल चुनाव के पहले जिस तरह विवादों में घिरे थे और भाजपा ने जिस तरह उसे मुद्दा बनाने की कोशिश की है, उससे पूरा चुनाव केजरीवाल के इर्द-गिर्द ही सिमटा रहा है। लेकिन इसके बाद भी केजरीवाल का एक समर्थक वर्ग आज भी उनके साथ डटकर खड़ा हुआ है। यही ताकत केजरीवाल को यह कहने का आत्मविश्वास दे रही है कि इस चुनाव में भी वे 55 से 60 सीटें लाने जा रहे हैं।
भाजपा के संगठन की प्रचंड ताकत के बाद भी केजरीवाल का चुनाव कहीं से कमजोर पड़ता नहीं दिखाई दिया है। आम आदमी पार्टी हर मुद्दे पर हमलावर रही है। उनके नेताओं ने फ्रंटफुट पर आकर बैटिंग की है। केजरीवाल दिल्ली के कमजोर वर्गों को यह बताने का प्रयास करते रहे हैं कि यदि भाजपा जीत जाती है तो उनकी सभी योजनाओं को बंद किया जा सकता है। यदि इस वर्ग ने केजरीवाल का भरोसा किया तो भाजपा के सारे दांव धरे के धरे रह जाएंगे।
राहुल-प्रियंका के आने से बनी बात
कांग्रेस को अपनी कमजोर रणनीति का नुकसान हुआ है, लेकिन जिस तरह अंतिम समय में आकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने चुनाव में कांग्रेस के लिए वोट मांगे हैं, उससे कांग्रेस कई सीटों पर मजबूत हो गई है। चुनाव विश्लेषक मान रहे हैं कि कांग्रेस ओखला, सीमापुरी, समयपुर बादली, सीलमपुर और चांदनी चौक जैसी सीटों पर मजबूत लड़ाई लड़ रही है। दूसरी सीटों पर भी कांग्रेस अच्छा वोट हासिल कर सकती है। इससे कांग्रेस को दिल्ली में वापसी का मौका मिल सकता है।