दिल्ली के नतीजों के 10 निहितार्थ: बजरंगी भाईजान, विकास की बात, उदार हिंदुत्व और...
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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा 54 फीसदी मत प्रतिशत हासिल हुआ है। इससे पहले साल 2015 के चुनाव में भी आप को 55 फीसदी वोट मिला था। इस बार भाजपा का वोट प्रतिशत 32 फीसदी से बढ़कर 40 फीसदी हुआ है। कांग्रेस पार्टी का वोट पांच प्रतिशत तक घट गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दिल्ली की जनता ने नफरत और टकराव की राजनीति को नकार दिया है? आखिर वो कौन सी बाते हैं जिन्होंने आम आदमी पार्टी को इतनी बड़ी जीत दिलाने के लिए रास्ता बनाया। आइए 10 निहितार्थों से जानते हैं आप की जीत के कारण और वो घटनाएं जिन्होंने इस चुनाव में मतदाताओं को अरविंद केजरीवाल की पार्टी के पक्ष में ले जाने में अहम भूमिका निभाई।
- 1. बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा: आप ने निजी स्कूलों की फीस पर नकेल कसी, सरकारी स्कूलों में सुधार किया। अस्पतालों में मुफ्त दवा-इलाज के अलावा 450 मोहल्ला क्लीनिक शुरू किए। 200 यूनिट बिजली व 20 हजार लीटर पानी मुफ्त दिया। इसका फायदा आम लोगों को मिला।
- 2. महिलाओं को फ्री बस, बुजुर्गों को तीर्थयात्रा: महिलाओं के लिए बस में फ्री यात्रा की सुविधा दी। बसों में मार्शल तैनात किए। सौ से ज्यादा जगहों पर वाईफाई और स्ट्रीट लाइटें लगवाईं। बुजुर्गों को तीर्थयात्रा कराई। इनके जरिये हर घर में पैठ बढ़ी।
- 3. भाजपा नेताओं ने आतंकी कहा, केजरीवाल बोले-मैं दिल्ली का बेटा: भाजपा नेताओं ने केजरीवाल को आतंकी, अराजक, टुकड़े-टुकड़े गैंग का समर्थक कहा लेकिन केजरीवाल ने खुद को दिल्लीवासियों का बेटा बताया। उन्होंने अपना फोकस स्थानीय मुद्दों पर ही बनाए रखा।
- 4. उदार हिंदुत्व पर चले केजरीवाल: हिंदू-मुस्लिम, भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबला, गोली मारो... जैसे नारों के बीच हुए चुनाव में केजरीवाल ने उदार हिंदुत्व का रास्ता अपनाया। चैनल पर लाइव हनुमान चालीसा सुनाना हो या मतदान से पहले हनुमान मंदिर जाकर ट्वीट करना, सब उनके पक्ष में गया।
सीएए और शाहीन बाग से दूरी, इस एक बात से बचते रहे
- 5. मोदी पर हमलों से बचते रहे: केजरीवाल ने सीधे पीएम मोदी पर हमला नहीं बोला। बहस की चुनौती भी गृहमंत्री अमित शाह को दी। पाकिस्तान के एक मंत्री ने जब मोदी को हराने की अपील की तो केजरीवाल ने ट्वीट कर जवाब दिया कि मोदीजी हमारे प्रधानमंत्री हैं। हमारे आंतरिक मामले में दखल न दें।
- 6. भाजपा ने कोई चेहरा नहीं दिया: आप की एकतरफा जीत का बड़ा कारण भाजपा की ओर से सीएम पद का कोई चेहरा न होना रहा। केजरीवाल सहित पूरी आप इसे लेकर भाजपा पर हमलावर रही। भाजपा ने पूरा प्रचार अभियान पीएम मोदी के चेहरे पर चलाया। वहीं, आप ने डोर-टू-डोर कैंपेन और केजरीवाल के रोड शो कराए।
- 7. सीएए और शाहीन बाग से दूरी: भाजपा ने पूरे चुनाव में शाहीन बाग को मुद्दा बनाया और केजरीवाल तथा आप पर प्रदर्शनकारियों को बिरयानी खिलाने तक का आरोप लगाया। वहीं, आप ने इस मुद्दे पर सीधे कोई जवाब नहीं दिया। इससे भाजपा की ध्रुवीकरण की कोशिशें नाकाम रहीं।
विकास के एजेंडे पर फोकस और त्रिकोणीय नहीं बना चुनाव
- 8. विकास के एजेंडे पर फोकस: केजरीवाल ने चुनाव से पहले पांच साल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया और कहा कि अगर काम किया हो तभी जिताएं। पहली बार किसी नेता ने विकास के एजेंडे पर इतना आक्रामक होकर वोट मांगा था। भाजपा इसकी काट नहीं खोज पाई।
- 9. त्रिकोणीय नहीं बना चुनाव: 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट आश्यर्चजनक रूप से बढ़ा और पार्टी ने आप को पीछे छोड़ दिया। इससे कांग्रेस को अच्छा करने की उम्मीद थी ही साथ ही भाजपा को इससे फायदे की उम्मीद बंधी थी। इसके बावजूद चुनाव भाजपा और आप की सीधी लड़ाई बन गया। मुकाबला त्रिकोणीय न होने से वोट नहीं बंटे। इसका फायदा आप को मिला।
- 10. भाजपा में स्थानीय नेताओं की अनदेखी: कभी दिल्ली में मदनलाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज जैसा कुशल नेतृत्व था। 1998 में विधानसभा में हार के बाद से स्थानीय नेतृत्व पिछड़ता गया। पिछले दो विधानसभा चुनाव से डॉ. हर्षवर्धन जैसे स्थानीय, जमीन से जुड़े नेताओं की अनदेखी की गई। भाजपा को इसका नुकसान हुआ।