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...जब हनीट्रैप के जाल में नहीं फंसे सेल चेयरमैन, तो उन्हें ऐसे मार डालने की रची साजिश

Sat, 19 Oct 2019 05:30 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 19 Oct 2019 05:30 PM IST
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Delhi Crime Branch revealed in chargesheet that accused tried to drag sail chairman in honey trap
अनिल कुमार चौधरी - फोटो : social media

एक टेंडर को लेकर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के चेयरमैन की जान पर बन आई। जिस व्यक्ति को टेंडर दिया गया, उसने तय नियम और शर्तों के मुताबिक माल सप्लाई नहीं किया। यानी माल की गुणवत्ता सही नहीं थी। नतीजा, कोल का टेंडर रद्द कर दिया गया। जिसके नाम टेंडर खुला था, उसके पिता एके सिंह ने इसे नाक का सवाल बना लिया। उन्होंने पहले तो सेल चेयरमैन अनिल चौधरी को हनीट्रैप में फंसाने का प्रयास किया, लेकिन जब बात नहीं बनी तो एक नहीं, दो नहीं, कई बार हनीट्रैप का जाल बिछाया गया। लेकिन चौधरी हर बार बच निकले।

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इसके बाद मुख्य आरोपी एके सिंह ने सेल चेयरमैन की जान लेने का प्लान तैयार कर दिया। इसके लिए बाकायदा 67 हजार डॉलर की सुपारी दे दी गई। पिछली सात अगस्त को चौधरी पर जानलेवा हमला हो गया, लेकिन वे पुलिस की मदद से बच गए। हालांकि वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

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क्यों मारने चाहते थे आरोपी

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने इसी सप्ताह मामले का आरोप पत्र दाखिल किया है। इसी में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ। इस मामले के मुख्य आरोपी एके सिंह को अदालत से जमानत मिल गई है। हालांकि क्राइम ब्रांच इसे रद्द कराने के लिए अदालत से अपील करने जा रही है। आरोप पत्र में बताया गया है कि मुख्य आरोपी एके सिंह के बेटे को सेल ने 100 करोड़ रुपये का टेंडर दिया था। उसे 30 करोड़ रुपये एडवांस भी दे दिए गए। बाद में पता चला कि संबंधित कंपनी की तरफ से जो माल सप्लाई किया जा रहा है कि उसकी क्वालिटी अच्छी नहीं है। इस बाबत कंपनी संचालक को चेतावनी भी दी गई, लेकिन कोई असर नहीं हुआ।

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67 हजार डॉलर में सुपारी

कोल के सैंपल फेल हो रहे थे। आखिर में सेल ने कोल का टेंडर रद्द कर दिया। बस यहीं से मुख्य आरोपी एके सिंह, सेल के चेयरमैन अनिल चौधरी से खुन्नस रखने लगे। पहले तो सेल चेयरमैन को हनीट्रैप में फंसाने की कोशिश हुई। इसके बाद उन्हें मारने की सुपारी दे दी गई। खास बात है कि सुनील नाम के व्यक्ति को 67 हजार डॉलर में सुपारी दी गई। बतौर क्राइम ब्रांच, एके सिंह का कहना था कि उसने सुपारी किलर को सारे पैसे एक बार में नहीं, बल्कि कई किश्तों में देने की बात कही थी।


एके सिंह ने कहा कि मेरी 67 हजार टन कोल सप्लाई की पेमेंट फंसी है। जैसे-जैसे ये पेमेंट आएगी, वैसे ही उसे पैसा दे दिया जाएगा। सौदा कुछ इस तरह हुआ कि प्रत्येक टन की पेमेंट पर उसे एक डॉलर दिया जाना था।

चौधरी को मारने का यह प्लान बनाया

क्राइम ब्रांच ने आरोप पत्र में बताया है कि जब चौधरी हनीट्रैप में नहीं फंसे, तो एके सिंह ने सुनील से कहा कि वह सेल चेयरमैन पर हमला करे। यह हमला ऐसा होना चाहिए कि चौधरी कम से कम दो महीने तक अस्पताल में रहे। इस दौरान उनकी जगह जो नया अधिकारी आएगा, वे उससे सेटिंग कर अपनी पेमेंट क्लीयर करा लेगा। इसके बाद सुनील ने छह लाख रुपये में चार युवकों को हमले की सुपारी दे दी। इसमें दो लाख रुपये एडवांस भी दे दिए गए। जब इस हमले को अंजाम दिया गया, तो मौके पर सुनील अपनी कार में बैठकर यह पूरी वारदात देख रहा था।

पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को पकड़ा

सात अगस्त को अनिल चौधरी अपनी कार में सवार होकर कहीं जा रहे थे। उनके साथ ड्राइवर एनके पाठक था। उसी वक्त एक होंडा सिटी कार ने उनका पीछा करना शुरु किया। बाद में वही कार ओवरटेक कर उनके सामने आ गई। जब तक चौधरी की कार हुडको प्लेस के निकट पहुंच चुकी थी। चारों युवकों ने चौधरी को कार से बाहर निकालकर उन पर हमला कर दिया। बदमाशों के पास लोहे की रॉड थी, जिससे चौधरी बुरी तरह जख्मी हो गए। इस दौरान गश्त कर रहे दो पुलिसकर्मी वहां आ गए। उन्होंने आरोपी ललित कुमार और अमरजीत को पकड़ लिया, जबकि अन्य दो आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने चौधरी को अस्पताल पहुंचाया।

कुल सात आरोपी हुए थे गिरफ्तार

इस मामले में दो आरोपी मौके से पकड़े गए थे। उनसे पूछताछ के दौरान दूसरे आरोपियों का भी पता चल गया। हौजखास पुलिस ने प्रवेश कुमार और ओमप्रकाश शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया। 23 अगस्त को इस मामले में पांचवा आरोपी सतेंद्र उर्फ छुटकू भी पुलिस के हाथ लग गया। चूंकि मामला सेल के चेयरमैन से जुड़ा था, इसलिए केस की जांच 24 अगस्त को क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। क्राइम ब्रांच की पूछताछ में ओमप्रकाश ने बताया था कि सतेंद्र उसका दोस्त है।



सतेंद्र ने उसे अपने जीजा सुनील बल्हारा से मिलवाया। सुनील ने सेल में काम करने वाले एक शख्स से झगड़ा चलने की बात कही थी। सुनील ने ओमप्रकाश को छह लाख रुपये की सुपारी दे दी। ओमप्रकाश ने अपने साथियों ललित, अमरजीत और प्रवेश के साथ इस वारदात को अंजाम दिया। बाद में 27 अगस्त को क्राइम ब्रांच ने सुनील बल्हारा को भी गिरफ्तार कर लिया। इस केस में 28 गवाह बनाए गए हैं।

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